नमस्कार 🙏मेरा नाम जूही उपाध्याय है मैं मनोविज्ञान व्याख्याता हूंँ।
अपनी कुछ बातों को आप सबके सामने रखना आई हूंँ।
मेरे हमसफ़र जब तुम मेरे साथ होते हो, नज़ारा कुछ अलग होता है जब मेरे क़दम से क़दम तुम मिलते हो,
मैं अलग हीं दुनिया में होती हूँ ऐसा लगता है मनो धरती पर जन्नत हो, ऐसा कोई कठिन काम जो मैं कर ना सकूं। तुम्हारे दिल में रहती हूंँ तुम मेरे दिल की धड़कनों में तराने जब बजाते हो। कभी मेरी जुल्फों को ठीक करते हो तो कभी मेरे आंँचल हवा झोंका दते हो।
तुम होत तो मैं हूंँ , मेरी सांसे चलती हैं
मैं ख़ुश रहती हूंँ ,मैं हंसती हूंँ , मचलती हूंँ, सजती हूंँ और समवर्ती हूंँ ।
तुम्हारी एक बात जिसकी मैं दीवानी हूंँ **
वो यह की ना जाने कैसे बिन बोले मेरी हर ख़्वाहिशों को समझ जाते हो और उन्हें पूरी करते हो।
हम दोनों की डोर इस क़दर बंधीं हुई है, जैसे जन्मो- जन्म का रिश्ता हो।
और इस रिश्ते को कसी की नज़र ना लगे। यही दुआ है भगवान से मेरी।
होती है थोड़ी बहुत नोक - झोक हम दोनों के बीच भी इसमें भी, मैं हीं रूठ जाती हूंँ, चाहे गलतियां मेरी हीं क्यों ना हो।
और हर बार की तरह तुम मुझे बड़ा प्यार से मना लेते हो, हा हा हा लिखते समय भी मुझे हंसी आ रही है, कि मुझे हंसाने के लिए तुम कितनी नौटंकी करते हो और आख़िरकार मैं मुस्कुरा कर तुम्हारे गलेसे लग जाती हूंँ।
कितना ख़ूबसूरत होता है ना प्यार बहुत ही ज्यादा ।
मुझे लगता है हर रिश्ता ख़ूबसूरत हो सकता है अगर समझदारी हो तो।
एक दूसरे की थोड़ी-थोड़ी गलतियों को माफ़ करके हम अपने हर रिश्ते को बड़े प्यार से बचा सकते हैं।
एक छोटी सी गलती इंसान को एक दूसरे से इतना दूर कर देती है मानो वह कभी एक दूसरे को जानते हीं नहीं थे ।
मैं तो मानती हूंँ की प्यार हर रिश्ते को बचा सकता है चाहे वो जो भी रिश्ते हो।
आज़ मेरा कुछ लिखने का मन किया अपने रिश्ते के बारे में। अपने हमसफ़र के बारे में हमारे साथ को लेकर।
***तुम हो साथ जो मेरे***
तो सब कुछ मुमकिन है, ये धड़कने ठीक से चलतीं है और मैं भी ठीक रहती हूंँ।
सुबह तुम्हें देख कर उठती हूंँ रात में देख कर सोती हूंँ।
प्रभु की कृपा बनी रहेगी तो बुढ़ापा भी तुम्हारे साथ हीं काटेंगी, हम दोनों एक दूसरेक बिना कभी रह नहीं सकते , मैंने अपने पति में हर रिश्ते को देखती हूंँ।
जब उदास होती हूंँ तो भाई के जैसा संभालना,
जब कुछ कहना होता है तो बहन के जैसा सुनते हैं,
जब मैं रूठ जाती हूंँ तो दोस्त की तरह मानते हैं ,
और जहांँ हर ख़्वाहिशों को पूरी करनी हो तो पिता बन जाते हैं ,
जब किसी कारणवश रोने लगती हूँ तो मांँ जैसा दुलार करते हैं।
और यह सब कुछ एक इंसान में मिलना उसी को पति परमेश्वर कहते हैं।
एक दूसरे का ख़्याल रखते रखते कब रिश्ता प्यार में बदल जाता है कुछ कह नहीं सकते।
मगर एक बात तो तय है और मैंने पहले भी कहा है की हर रिश्ता समझदारी के ऊपर है टीका हुआ है ।
इस संसार में जोभी प्यार और समझदारी से रहेगा उनके रिश्ते की उम्र बहुत रहेगी और वह खुश रहेंगे।
धन्यवाद।