रामू हाँफते हुए दुकान पर पहुँचता है और चिल्लाता है, "कहाँ गया वो पनीर चोर? अभी के अभी मेरा पनीर
वापस करो!" तभी दुकान के कोने में बैठा एक भारी-भरकम आदमी खड़ा होता है। वह और कोई नहीं,
बल्कि उसी इलेक्ट्रिशियन का मालिक (बॉस) है जिसे रामू ने गलती से 'समधी' बना दिया था। मालिक को
देखते ही इलेक्ट्रिशियन डर के मारे छुपने की कोशिश करता है।
मालिक गरजकर पूछता है, "अरे रामू! तुम यहाँ क्या कर रहे हो? और मेरा आदमी जनरेटर छोड़कर यहाँ
क्या कर रहा है?" 🛠️👨🔧
सेठ जी चिल्लाते हैं, "अरे ओ गप्पू! तू यहाँ समधी बनकर बैठा है और वहाँ पूरा मोहल्ला
अंधेरे में डूबा है? चल खड़ा हो और औजार उठा!"
रामू पसीना पोंछते हुए बीच में आता है, "अरे सेठ जी,
शांत हो जाइए! ये... ये तो हमारी 'अतिथि देवो भव' की परंपरा है। हम तो बस इनका स्वागत कर रहे थे।"
सेठ जी गुस्से में कहते हैं, "स्वागत? तुमने मेरे इलेक्ट्रिशियन को दूल्हे का बाप बना दिया! अब
संभालो अपनी शादी, मैं जा रहा हूँ और गप्पू भी मेरे
साथ चलेगा। देखते हैं कौन ठीक करता है तुम्हारा
जनरेटर!" 😤🛠️
रामू को अब अपनी 'इज्जत' और 'अंधेरे' दोनों की चिंता होने लगती है।
रामू हाथ जोड़कर और चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान लाकर सेठ जी के सामने खड़ा हो जाता है।
"अरे सेठ जी! आप भी न... कैसी बातें कर रहे हैं? गप्पू तो बस इसलिए यहाँ
बैठा था क्योंकि मैंने उसे
बताया कि इस पूरी शादी के असली 'वीआईपी' (VIP) मेहमान तो आप हैं! मैंने
इससे कहा कि जब तक सेठ
जी नहीं आते, तब तक तुम यहाँ की व्यवस्था संभालो। अब आप आ ही गए हैं, तो चलिए...
आपके लिए गरमा-गरम पनीर के पकोड़े 🧀 और स्पेशल केसरिया चाय ☕ का इंतज़ाम करवाया है।
आपकी पसंद का ख्याल रखना ही तो
मेरा 'प्रोटोकॉल' है!"
सेठ जी पनीर के पकोड़ों का नाम सुनकर थोड़ा
पिघलने लगते हैं, लेकिन तभी गप्पू (इलेक्ट्रिशियन) धीरे से रामू के कान में कुछ कहता है।
सेठ जी ने जैसे ही बड़े चाव
से पकोड़े का एक बड़ा
टुकड़ा काटा, उनके चेहरे के भाव बदल गए। पकोड़े के अंदर नरम पनीर के बजाय
'कड़ कड़' करता कच्चा
आलू निकला।
सेठ जी: (गुस्से में लाल होकर) "रामू! ये क्या मजाक है? तुमने मुझे वीआईपी
बोलकर कच्चे आलू के पकोड़े खिला दिए? क्या तुम्हें
लगता है कि मैं तुम्हारी इस
'इंजीनियरिंग' को समझ
नहीं पा रहा हूँ?" 😡
रामू: (हकलाते हुए) "अरे... अरे सेठ जी, वो... वो असल में... पनीर अभी
'प्रोसेसिंग' में है! ये तो बस..
. बस स्टार्टर था!" 😰
तभी श्यामू पीछे से हंसते हुए आता है और आग में घी डालने का काम करता है।
श्यामू: "अरे रामू भाई, अब
सच बता भी दो! वो पनीर
वाला तो 'पनीर' लेकर नौ दो ग्यारह हो गया, और आप सेठ जी को 'आलू' में 'पनीर'
का स्वाद ढूँढने को कह रहे
हो? अब तो जनरेटर क्या, यहाँ की इज़्ज़त की बत्ती भी गुल होने वाली है!" 😂
रामू की नई 'खोज': रामू हार नहीं मानता और कहता है कि ये "कच्चे आलू" के
पकोड़े असल
में एक विदेशी डिश है जिसे '
रॉ पोटैटो डिलाइट' कहते हैं, और वह सेठ जी को मनाने के लिए अपनी घड़ी तक दांव पर लगा देता है। ⌚🤣
Manoj rajput ✍️✍️✍️...