अभीर शहर में एक छोटे से कमरे में किराए पर रहता है। कमरे में पहुंचते हुए अभीर ने अवनी के हाथ से बनाया हुआ टिफिन बॉक्स खोला। टिफिन बॉक्स खोलते ही खानें की खुशबू चारों तरफ़ फैल गई, खाने की खुशबू से अभीर से एक सेकेण्ड ना रहा गया और अवनी के हाथ से बनाया गया खाना जैसे एक ही सांस में खत्म कर दिया हो।अभीर हाथों से स्वादिष्ट खाना खाते हुए अवनी की यादों में खो जाता है!
काश अवनी! "तुम यहां मेरे साथ होती तो आज इतना स्वादिष्ट खाना खिलाने के लिए मैं तुम्हारे हाथों को चूम लेता।
अवनी की यादों में खोया हुआ अभीर आफिस के लिए निकलता है। आफिस पहुंचते हैं सभी कलीग दोस्त यार अभीर को शादी की बधाई देते हुए पार्टी की मांग करते हैं।
यहां अवनी का अभीर के बिना जैसे घर का सूनापन महसूस करते करते बुरा हाल है।"हर जगह अभीर की यादें अवनी सोचती है ये रोज़ी रोटी का सवाल नहीं होता तो अभीर मैं हमेशा तुम्हारी बांहों में रहती आखिर तुम्हारी बाहें किसी जन्नत से कम थोड़ी है।"
कुछ दिन बाद अभीर अपने दोस्त अरूण की बर्थडे पार्टी में शामिल होता है।
अभीर का दोस्त अरूण -"आज मैं आप सबके सामने एक अनाउंसमेंट करना चाहता हूं,मैं बहुत जल्द ही अपनी गर्लफ्रेंड प्रिया से शादी करने जा रहा हूं।जो विदेश की बहुत बड़ी कंपनी में काम करती है और बहुत जल्दी अपनी कंपनी ज्वाइन करने वापिस अपने देश आ रही है।"
सारे कलीग दोस्त मिलकर शैम्पेन का आनंद लेते हुए"चीयर्स।"
अभीर अपने दोस्त अरूण को बधाई देता ह और मजाकिया अंदाज में दोस्तो से"भाई बहुत जल्दी एक और विकिट गिरने वाला है।सभी कलीग दोस्त हंसने लगते हैं,और पार्टी का आनंद लेते हैं।
यहां अवनी के पास एक काल आता है।
हैलो अवनी!मैं प्रिया बोल रही हूं।
अवनी - कौन प्रिया?
प्रिया- तुम्हारी स्कूल कलीग प्रिया सचदेवा
अवनी ठिठकते हुए - अरे प्रिया तुम! इतने सालों बाद! कैसे याद आई?कहा हों? तुम मेरी शादी में शामिल होने क्यों नहीं आई? तुम्हें पता! मैंने तुम्हें बहुत याद किया आखिर तुम मेरी एकलौती दोस्त जो हो।बताओ इतने सालों से कहां थी तुम?
प्रिया हंसते हुए - अवनी मेरी प्यारी भोली अवनी। तुम आज भी वही अवनी हों जो स्कूल में हुआ करती थी। मेरे एक दिन स्कूल ना आने पर तुम एक ही सांस में सारी चीजें जानने की कोशिश करती थी।
रूको बाबा! सब कुछ बताती हूं।
सबसे पहले मैं तुम्हें बताना चाहती हूं कि मैं अपने ब्वायफ्रेंड से शादी करने जा रही हूं।
अवनी -"अरे वाह! मेरी नासमझ सी परी को सम्हालने इस दुनिया में भी कोई है।" अवनी हंसते हुए -"वाह भगवान बेचारे की किस्मत ना जाने किस मुहूर्त में लिखी होंगी।
प्रिया -"तुम्हारी हंसी ठिठोलियां हों गई हों तो मैं कुछ और बोलूं।"
अवनी - हां तुम्हें और तुम्हारी बातें सुनने तो मेरे कान तरह चुके थे।
प्रिया-"अच्छा! तो चल फिर मैं अगले महीने अपने देश वापिस आ रही हूं।
अवनी -"क्या? ख़ुशी से उछलती हुई। तुझसे मिले कितने वर्षों निकल गये। जल्दी आना,हम मिलकर ढेर सारी बातें घूमना-फिरना करेंगे।
प्रिया- हां। चलों अब रखतीं हूं फोन बाय।
अवनी - बाय प्रिया।
आज अपनी वर्षों पुरानी बिछडे हुए दोस्त प्रिया से बात करके अवनी बहुत खुश हुई. मानो कई साल पुरानी यादें तरोताजा हो गई हो.
अवनी स्कूल के उन दिनों को याद करती है, जब प्रिया और अवनी एक ही टेबल पर बैठा करते थे. साथ में खाना साथ ही कहीं जाना होता था, यहां तक कि स्कूल के सारे बच्चे" जुडवां" कहकर चिढाते थे, अवनी है तो प्रिया है और प्रिया है तो अवनी. कभी अवनी तो कभी प्रिया के स्कूल नहीं आने पर भी वह टेबल खाली रहती थी.
स्कूल का वह आखिरी दिन, गणित का पेपर देने के बाद, प्रिया, अवनी से मिले बिना ही स्कूल से जल्दी चली जाती है. उस दिन और आज में सिर्फ आठ साल सत्ताईस दिन का फासला था. प्रिया का कोई कांटेक्ट नंबर नहीं होने पर अवनी हर वक्त प्रिया को याद करती थी. हर वक्त सोचती शायद कभी शहर के किसी कोने में प्रिया टकराए. आखिर क्यों? प्रिया अचानक अवनी से बिना मिले ही चली गई और फिर कभी अवनी से कोई संपर्क नहीं किया आखिर क्यों? यह बात हमेशा अवनी के मन में कई सवाल खडे कर देती. अब प्रिया से मिलने पर सारे सवालों के जबाब पूंछ कर ही रहूंगी.
अवनी मन ही मन में हाथ जोडकर" इश्वर तेरा लख- लख शुक्रिया जो आज मेरी वर्षों पुरानी बिछडे हुए मेरी प्यारी बहन जैसी दोस्त प्रिया को वापिस मेरे पास भेज दिया। मेरे मन में अनगिनत सवालों में आज एक ही जबाव मिल गया कि वह सही सलामत है.
इतने में अवनी का फोन बजता है. फोन देखते ही अवनी का चेहरा जैसे सुबह की चंद्रमा की चमक में सूरज अपनी किरणें बिखेरते हुए और भी मनमोहक लगता है, वैसे ही अवनी का चेहरा चन्दमुखी की तरह चमक उठता है, फोन में अभीर का नाम देखते ही अवनी के हाथ जैसे सून्न हो गये हो चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है. बस एक आवाज जो. दिल छूना चाहती है.
वहां से आवाज आती है.
हैलो अवनी!
अवनी की दिल की धडकन मानों एक्सप्रेस से भी तेज होती है. मानो दूर तक भी उसके दिल की धडकन सुन सकता है.
फोन पर दोबारा आवाज आती है.
Hello अवनी! सुन पा रही हो तुम.
अवनी ने दवी हुईं आवाज में- हा.
अभीर- कैसी हो तुम? मैं तुम्हें बहुत याद करता हूं।
अवनी मन ही मन में सोचती है! सच तो कहना चाहतीं हूं लेकिन कह नहीं सकतीं अभीर मैं तुम्हारे बिना वैसे ही हूं जैसे बिना सूरज की रोशनी के सूरजमुखी, तुम मुझे उतने ही जरूरी हो जितना स्वाति नक्षत्र में पपीहे को पानी है.
अभीर- तुम ठीक तो हो ना अवनी?
अवनी- हां मैं ठीक हूं.
अभीर- मेरी गैरमौजूदगी में किसी और को तो पसंद नहीं करने लगी. अभीर हंसी ठिठोलियां करता हुआ.
अवनी दबी हुई आवाज में- सात जन्मों का रिश्ता है जनाब. कैसे किसी को आने दे सकते हैं. मैं हर गुजरते दिन के साथ तुम्हारे लिए और भी ज्यादा प्यार महसूस करती हूँ" अभीर.
अभीर- अच्छा मेरी धर्मपत्नी जी! अब रूलाओगी क्या! अभीर बहुत जोर से हंसने लगता है.
अच्छा अवनी मेरी बात ध्यान से सुनो! कुछ दिनों में बहुत बिजी रहने वाला हूं, एक नये project में मुझे अपाइंटमेंट मिली है. जिससे मुझे बहुत काम है, यदि सब कुछ सही रहा तो, मेरा प्रमोशन होना तय है. फिर हम दोनों साथ रहेंगे और सारी दुनियां घूमेंगें.
अवनी- एक्साइटेड और नर्वस दोनों होते हुए. कोई बात नहीं अभीर. अपना काम मन लगाकर करों.
अभीर- सॉरी अवनी मैं तुम्हें टाइम नहीं दे सकूंगा.
अवनी- हा कोई बात नहीं अभीर. बस अपना ख्याल रखना. आल दा बेस्ट.
अभीर- चलों अब मैं फोन रखता हूं. अपना ख्याल रखना अवनी.
इतना कहते ही फोन cut जाता है और अवनी कुछ बोलते बोलते अपने होंठ जैसे सिल लिए हो. अवनी की आंखों से मोती से आंसू टप टप करते हुए अवनी के दुपट्टे को कब गीला कर देते हैं अवनी को एहसास भी नहीं है.
अभीर कभी आफिस के काम में तो, कभी वाॅस की Meeting तो, कभी दोस्तो की पार्टी में व्यस्त रहने लगा. और अवनी को टाइम ना दे सका. धीरे- धीरे समय निकलता जा रहा था.
यहां अवनी अपने आप को व्यस्त रखने, कभी पडोस के बच्चों के साथ खेलती तो, कभी घर के काम काज में लगी रहती. कुछ समय मिलता तो फोन लेकर घण्टों अभीर के फोन काल और मैसेज के इंतजार में रहती. इसी तरह अवनी का दिन तो जैसे तैसे निकल जाता, लेकिन रात करवट बदलते हुए और अभीर की मीठी मीठी बातें सोचते हुए निकल जाती.
यह कहानी यहीं खत्म होती हैं, अब आगे क्या हुआ जानने के लिए अगला एपिसोड देखे.