injustice in Hindi Classic Stories by manshi books and stories PDF | अन्याय

The Author
Featured Books
  • Wheshat he Wheshat - 2

         وحشت ہی وحشت قسط نمبر (2)   تایا ابو جو کبھی اس کے لیے...

  • Wheshat he Wheshat - 1

    Wheshat he Wheshat - Ek Inteqami Safar
    ترکی کی ٹھٹھورتی ہوئی...

  • مرد بننے کا تاوان

    ناول: بے گناہ مجرمباب اول: ایک ادھورا وجودفیصل ایک ایسے گھر...

  • مرد بننے کا تاوان

    ناول: بے گناہ مجرمباب اول: ایک ادھورا وجودرضوان ایک ایسے گھر...

  • صبح سویرے

    رجحان ہم ہمت کے ساتھ زندگی کا سفر طے کر رہے ہیں۔ کندھے سے کن...

Categories
Share

अन्याय

उर्मी एक गरीब घर की लड़की थी। पर वह बहुत होनहार और होशियार थी। उसके पिता बहुत बीमार रहते थे। उनकी चिकित्सा करवानी थी। पैसों की तंगी की वजह से यह बस एक सपना बन कर रह गया था। उसकी माँ जमींदार के घर काम करती थी और अपने घर का खर्च चलाती थी। उर्मी की माँ ने उसे बताया था, कि जमींदार ने उनका घर हथिया लिया था। जिसकी वजह से वे बेघर हो गए थे। बहुत परिश्रम करने के बाद उन्होंने दोबारा घर बनाया था। जमींदार बहुत क्रूर थे। घर का खर्च चलाना मुश्किल था, इसलिए उर्मी भी जमींदार के घर काम करती थी। एक दिन काम करते वक़्त उर्मी से गलती से एक काँच का गिलास टूट गया। जिसके बाद जमींदार ने उसे काम  से निकाल दिया। उर्मी बहूत दुखी हुई। उसके बाद उर्मी ने कागज के फूल बना कर बेचने शुरू कर दिये। जमींदार वहाँ आ गए, और उन्होंने उर्मी के सारे फूल उठाकर फेंक दिये। वह निराश नहीं हुई। ए उसने फिर से फूल बनाए और उन्हें बेचने शुरू किये। वह जमींदार से बदला लेना चाहती थी। उसे काफी मुनाफा हुआ था। वह बहुत खुशी से घर आई। उसके माँ और पिता जी बहुत खुश हुए। धीरे धीरे उर्मी की दुकान बहुत विख्यात हो गई । उसका मुनाफा बहुत बढ़ गया। वह जल्द ही बहुत अमीर हो गई। उसने अपने पिता जी का इलाज करवाया। सभी को उर्मी पर नाज था। अब उसके पिता जी भी दुकान चलाने लगे। उर्मी एक बड़े विद्यालय में पढ़ने जाती थी। परंतु उर्मी अभी भी संतुष्ट नहीं थी। उसे जमींदार से बदला लेना था। उसने दिन रात एक करके जमींदार से बदला लेने का सोचा। एक दिन उर्मी को एक तरकीब सूझी। पर उसके माँ बाप ने उसे समझाया कि, उन्होंने हमारे साथ बुरा किया है, तो भगवन भी उनके साथ बुरा ही करेंगे। उर्मी हमेशा अपने मत पिता की बात मानती थी। पर इस बार उसने उनकी बात नहीं मानी।उसे शक था, की यदि वे लोगों पर इतना जुल्म करते हैं, तो जरूर कोई काला बाज़ारी भी करते ही होंगे। इस का पता लगाने के लिए उर्मी उसके हर कदम पर नज़र रखने लगी। जल्द ही उसे यह पता चला, कि, सीमा जो उसकी सहेली थी, उसके पिता जमींदारों के घर काम करते हैं। एक दिन उसने सीमा को देखा, उसने सीमा को अपने पास बुलाया। 

सीमा ने उर्मी से कहा- उर्मी तुम बड़े दिन बाद दिखाई दी, कहो क्या बात है? 

उर्मी- क्या तुम्हारे पिता जमींदार के घर काम करते हैं? 

सीमा- हाँ, क्या बात है? 

उर्मी- क्या तुम उनके किसी काले धंधे के बारे में जानती हो? 

सीमा- तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो? 

उर्मी- तुम मुझे बस बताओ। 

सीमा- यह बात मैं तुम्हें बता रही हूँ, किसी और को मत बताना। 

उर्मी- ठीक है। 

सीमा- जमींदार का बेटा शैलेश सुबह और रात को छुप कर कोठी के दूसरे दरवाजे से शराब् बेचता है। जो की कानून के अनुसार अवैध है।

इस के बाद सीमा वहाँ से चली गई। इस बात को सही साबित करने के लिए उस रात उर्मी ने खुद जाकर पता लगाने का फैसला किया। उर्मी वहाँ गई। जो चीजें सीमा ने उर्मी को बताई थी, वो सब सच थी। अगली रात उर्मी पुलिस के साथ वहाँ आई, और उसका पर्दाफ़ाश कर दिया। इस तरह उर्मी ने उससे अपना बदला भी लिया, और उसके काले कारनामों पर से पर्दा हटाया।