Suhaagraat ka Kamra
कमरे में हल्की गुलाब की खुश्बू है, पर माहौल बहुत भारी।
एक बड़ा सा बेड… जिस पर तीनों बैठे हैं— करन, कबीर, और श्रेया।
तीनों बिल्कुल चुप।
करन बेड के एक कोने पर सहमे हुए बैठा है, कबीर दूसरे कोने पर टेढ़ा होकर।
श्रेया बीच में, हाथ अपनी चुन्नी में कसकर फँसाए हुए।
Kabir breaks the silence
अचानक कबीर अपनी जगह से चिढ़कर उठ जाता है।
Kabir (गुस्से में) बोला -
मेरा मन कर रहा है।
मैं उस पंडित की बत्तीसी बाहर करके आऊं।
उसने ही सब गड़बड़ किया है।
वह पगड़ी उतार फेंकता है।
Kabir बोला -
एक लड़की की दो पतियों के साथ शादी?
पागल बना दिया सबको।
करन हल्के लेकिन दृढ़ स्वर में बोलता है।
Karan बोला -
Kabir… शांत हो जा।
Kabir (चिल्लाकर) बोला -
भैया आप कैसे चुप हो!?
देखो श्रेया को… हालत देखो इस लड़की की!
ये वही लड़की है जो पूरे दिन मुस्कुराती रहती थी।
क्या हालत हो गई है बेचारी की?
Shreya’s Breakdown
करन कबीर को रोकता है और नज़रें श्रेया की ओर जाती हैं।
वह काँप रही है। और फिर अचानक फूट-फूटकर रोने लगती है।
Shreya (रोते-रोते हिचकियाँ लेते हुए) बोली -
मुझे… यहां नहीं रहना।
मैं ये सब नहीं झेल पाऊंगी।
वह अपना चेहरा दोनों हाथों में छुपा लेती है।
Shreya बोली -
मुझे…मम्मी के पास जाना है।
मैं ये रिश्ता नहीं निभा पाऊंगी।
उसकी आवाज इतनी टूटी हुई कि कमरे की हवा भी भारी हो गई।
Brothers get worried
कबीर एकदम परेशान होता है और श्रेया की तरफ बढ़ता है।
Kabir (घबराहट में) बोला -
श्रेया! Shhhhhhh..... चुप......
Please मत रो यार श्रेया।
हम लोग तुम्हे कभी force नहीं करेंगे पक्का।
करन उसके पास बैठता है, उसके कांपते हाथों पर हल्के से अपने हाथ रखता है।
Karan (शांत और संयमित होकर) बोला -
Shreya…हम समझ सकते हैं।
आपकी जगह कोई और होता...वो भी टूट जाता।
श्रेया और जोर से रो पड़ती है।
Comforting Shreya
कबीर पानी का गिलास लाता है। करन चुन्नी ठीक करता है।
दोनों भाई बारी-बारी उसे शांत करने की कोशिश करते हैं।
Kabir (धीरे से) बोला -
Shreya…हम दोनों तुम्हें दुखी नही करना चाहते। हम इस रिश्ते का बोझ तुम पर नहीं डालेंगे।
Karan बोला -
हां। अगर आप चाहो तो हम अलग room में रह लेंगे। आपको कोई हाथ भी नहीं लगाएगा।
आपकी safety, comfort...सब हमारी जिम्मेदारी है।
श्रेया आँसू पोंछती है, पर उसकी सांसें अभी भी थरथरा रही हैं।
Shreya (थोड़ा संभलकर) बोली -
पर ये रिश्ता कैसे चलेगा?
दो पति....एक घर.....एक बेड.....और ये समाज।
कब तक आप लोग मुझसे अलग room में रहोगे।
ये दुनिया क्या बोलेगी?
उसके कहने पर कबीर और करन एक-दूसरे की तरफ देखते हैं— जैसे उनपर पहाड़ गिर गया हो।
Harsh Reality
Kabir (थोड़ा bitter हँसी में ) बोला -
मुझे नहीं पता ये सब कैसे चलेगा।
मैं तो अभी तक ये सोच रहा हूं ये शादी हो ही कैसे गई?
करन कबीर को घूरकर चुप कराता है।
Karan (संयम से) बोला -
“इस वक्त ये बात नहीं।
फिलहाल हम श्रेया को stable करते हैं।
Decision of the Night
करन गहरी सांस लेता है।
Karan बोला -
Shreya… आप अभी अपने parents के पास जाना चाहती हो?
श्रेया सिर हिलाती है — 'हाँ'
Kabir (तुरंत उठकर) बोला -
मैं गाड़ी निकलता हूं।
चलो अभी चलते हैं।
लेकिन करन उसे रोक देता है।
Karan बोला -
नहीं Kabir… अभी रात के 2 बज रहे हैं।
मोहल्ले वाले 100 बातें करेंगे।
करण रुककर, सीधे श्रेया की तरफ देखता है।
करण बोला -
कल सुबह आपको हम खुद घर ले चलेंगे।
आप यहां safe हो।
आप पर कोई दबाव नहीं।
श्रेया धीरे-धीरे शांत होती है… उसकी हिचकियाँ कम होने लगती हैं।
Tension
तीनों फिर उसी बेड पर बैठ जाते हैं— पर इस बार दूरी बनाकर।
कमरा फिर से चुप।
बस घड़ी की टिक-टिक और श्रेया की हल्की सिसकियाँ।
Kabir (धीरे से) बोला -
कब तक चलेगा ये?
Karan बोला -
जब तक हम कोई solution नहीं निकाल लेते।
Shreya (धीरे से) बोली -
पर… अगर कोई solution मिला ही नहीं तो?
करन और कबीर एक साथ उसकी तरफ देखते हैं।
Karan बोला -
फिर हम तीनों मिलके नई दुनिया बनाएंगे।
अपने नियम और अपनी मर्यादाओं के साथ।
Kabir (हल्की मुस्कान के साथ) बोला -
हां… पर सबसे पहले,
श्रेया का comfort....उसकी खुशी।
श्रेया पहली बार हल्के से सिर हिलाती है।
अगली सुबह का हंगामा
बाहर मोहल्ले की गलियों में भीड़ जमा है। औरतें कानाफूसी कर रही हैं। मर्द टोपी टेढ़ी कर के तमाशा देख रहे हैं।
औरत 1 (हँसते हुए फुसफुसा कर) बोली -
“देखा? दुल्हन तो पहले दिन ही भाग गई।
लगता है रात भर दोनों दूल्हों ने दुल्हन को सोने ही नहीं दिया।
औरत 2 बोली -
अरे और क्या, दो - दो पति...कोई भी लड़की होती तो भाग ही जाती ना।
दूर से करन और कबीर आते दिखते हैं। दोनों के चेहरे पर नींद भी नहीं और शर्म भी।
आदमी 1 बोला -
अरे ठाकुर साहब! शादी की नौटंकी तो जबरदस्त हुई। ऐसी हुई कि अगले दिन दुल्हन ही भाग गई।
कबीर (गुस्सा दबाते हुए) बोला -
भैया…एक जोर का घूंसा दिन क्या इन सबको।
करन बोला -
चुप! और मत लगा आग को और हवा।
दोनों चुपचाप अंदर घर में चले जाते हैं।
शश्रेया का मायका
श्रेया रोते हुए अपने कमरे में बैठी है। उसकी मां उसके पास बैठी है। पिता पैर पटकते हुए आते–जाते हैं।
मां (पल्लू से आंसू पोंछते हुए) बोली -
“बिटिया, पगली! ऐसा कौन करता है? पता भी है वहां उन दोनों को क्या क्या सुनना पड़ रहा होगा। अगर वो दोनों लड़के अच्छे हैं तुझे परेशान नहीं कर रहे। तेरी हर बात पे राजी हैं तो क्यों भाग आई घर?
पिता (कठोर आवाज में) बोले -
हमने मना किया था बेटा।
हम अंधविश्वास नहीं मानते।
हमने मना किया था मत कर शादी।
पर तुमने जबरदस्ती कसम दिला के शादी कर ली।
देख सब क्या बोल रहे हैं।
श्रेया (सिसकते हुए) बोली -
Papa… मैं सच में uncomfortable feel कर रही थी… मैं डर गई थी। मेरे सामने दो दो लड़के बैठे थे।
पिता बोला -
डर? उस time क्यों नहीं डरी जब तेरी शादी हो रही थी उस time मना कर देती तो ये दिन तो ना देखते हम लोग।
अब हम समाज से डरे हुए हैं!
बिरादरी वाले बोल रहे थे बिटिया भाग आई ससुराल से। लगता है दूल्हे भी अपने बेटों जैसे देखे।
क्या नाम रह गया है हमारा और तुम्हारे भाई का।न
मां बोली -
बेटा क्यों किया तूने ऐसा? क्यूं कि ये शादी?
अंतिम फैसला
दूसरे कमरे में रिश्तेदार, चाचा, चाची, ताऊ सब बैठे हैं।
ताऊ बोले -
हमने कहा था ना… कुंडली का दोष हल्के में मत लो।
पर तुम लोग modern बनते हो।
ताई बोली -
अब दोगुनी बदनामी हो रही है!
एक नहीं, दो-दो घरों में!
पिता (थके स्वर में) बोले -
पहले ही काफ़ी तमाशा हो चुका है।
क्या करें?
श्रेया को हम उसकी बिना मर्जी के वहां नहीं भेजेंगे।
श्रेया (धीरे से) बोली -
Papa…
मां (धीमे पर दृढ़ स्वर में) बोली -
हां! जब तक हमारी बेटी नहीं चाहेगी वो वहां नहीं जाएगी। हमारी बेटी बोझ नहीं। हम अपनी बेटी के साथ हैं।
लंबी चुप्पी… श्रेया सिर झुका देती है।
श्रेया अपने दोनों पतियों के बारे में सोचती है कि यहां उसे इतना सुनने को मिल रहा है। वहां उनके मोहल्ले वाले उन दोनों को कितना सुना रहे होंगे।
उसे बुरा लगने लगा। की उन दोनों ने तो उसकी help करने की सोची। और वो उन्हीं की बदनामी कर आई।
श्रेया वापस जाने का फैसला करती है।
श्रेया की घर वापसी
दोपहर के समय ऑटो रूकता है। श्रेया उतरने लगती है। करन और कबीर दरवाजे पर खड़े हैं।
कबीर (धीमे से, guilt mixed with tenderness में ) बोला -
Shreya… तुम सच में वापस आ गईं?
श्रेया (बहुत धीमे से) बोली -
समाज के आगे हारना पड़ा।
करन (एक कदम आगे बढ़ाते हुए, गंभीर और gentle होकर) बोला -
Shreya, हमने आपको force नहीं किया था।
और ना ही कभी करेंगे।
Uncomfortable ho… हम समझते हैं।
कबीर बोला -
पर society तो बस तमाशा चाहती है।
वो तो कभी नहीं समझेंगे।
करन बोला -
पर हम तीनों अगर साथ रहें। तो शायद समझ जाएंगे। की रिश्तों की कैसे चलना है।
श्रेया आंखें नीचे किए खड़ी रहती है। tears silently fall.
कबीर (धीरे से) बोला -
Come inside… हम तुम्हारे against नहीं हैं श्रेया।
तीनों बिना कुछ कहे अंदर चले आते हैं।
— तीनों का एक साथ बैठना
(मरे में वही बड़ा सा डबल बेड है। तीनों awkwardly बैठते हैं, distance बना कर।
कबीर (धीरी सी खिल्ली उड़ते हुए) बोला -
बस… एक दिन में सारी दुनिया हिल गई।
हम तीनों को देख कर लग रहा है जैसे कोई court का decision हुआ हो।
करन (धीमे, thoughtful होकर) बोला -
Shreya… आप जरूरत से ज्यादा डर गईं थीं।
लेकिन… हम आपको समझाएंगे।
पहला कदम trust का होता है… forced marriage का नहीं m
श्रेया (धीमे से) बोली -
मैं पूरी कोशिश करूँगी।
पर आप लोगों की वजह से नहीं।
अपनी life बचाने के लिए।
करन और कबीर एक–दूसरे को देखते हैं। पहली बार दोनों को एहसास होता है—यह रिश्ता आसान नहीं होगा।
नया फैसला, एक नयी शुरुआत
तीनों कमरे में बैठे हैं। माहौल शांत है। डर भी है, शर्म भी, पर सबसे ज़्यादा — अनजानी जिम्मेदारी।
करन (गंभीर, शांत आवाज में) बोला -
Shreya… हम दोनों ने बात की है।
शादी का form भले अजीब है…
पर रिश्ते को हम normal बना सकते हैं।
कबीर (हल्की मुस्कान के साथ) बोला -
हां… husband-wife वाला pressure हम तुम पर नहीं डालेंगे।
ना तुम हमारी हो… ना हम तुम्हारे हैं।
फिलहाल हम तीन दोस्त हैं… सबसे अच्छे दोस्त।
श्रेया (हैरानी से) बोली -
Friends? पर… एक हीbed? एक ही room?
करन:
Friendship में कोई डर नहीं होता।
और हम promise करते हैं—
कोई line cross नहीं होगी।
जब तक आपकी मर्जी नहीं होगी।
Sorry....
मतलब अब हम friends हैं ना।
जब तक तुम्हारी मर्ज़ी नहीं होगी।
कबीर (खिलखिलाते हुए) बोला -
बिल्कुल ! हम तीनों एक साथ रहेंगे, एक साथ खाएंगे, एक साथ सोएंगे।
जैसे hostel के roommates… बस थोड़े intelligent वाले!
श्रेया पहली बार हल्के से मुस्कुराती है।
रात का awkward dinner
रात का खाना तीनों एक छोटे से table पर बैठे हैं। बीच में चावल, दाल, सब्ज़ी।
कबीर (सब्ज़ी डालते हुए) बोला -
Shreya, थोड़ा और लो.. वरना mummy बोलेगी तुम्हारी की हम तुम्हे भूखा रखते हैं।
श्रेया (धीरे से) बोली -
मैं खुद ले लूंगी।
करन (ध्यान से उसे देखते हुए) बोला -
Shreya… हम तुम्हारी सोच समझते हैं।
आराम से खाओ… कोई जल्दी नहीं है।
तीनों चोरी–छुपे एक–दूसरे को देखते हैं। हँसी दबाते हैं।
पहला night as ‘friends’
कमरे में तीनों awkwardly खड़े हैं। एक ही बड़ा bed है।
कबीर (dramatic अंदाज़ में) बोला -
तो… कौन सा side लूं?
Right, left, बीच, बालकनी, छत…?
करन बोला -
Kabir… behave.
कबीर बोला -
अरे भैया, comfort की बात कर रहा हूँ!
श्रेया center में रहेगी।
हम दोनों side. Safe zone!
श्रेया (चौंककर) बोली -
नहीं! मैं side में सो जाऊँगी।
करन (softly) बोला -
ठीक है. तुम right side.
Kabir left. मैं बीच में।ताकि तुम दोनो safe feel करो।
वैसे भी ये कबीर मेरे पास ही अच्छा रहेगा, रात में इंसान का ही pillow बना देता है ये। पूरे हाथ पैर अपने side में सोने वाले इन्सान के ऊपर रख देता है।
कबीर बोला -
भैया.........।
करण और श्रेय दोनों हंस पड़ते हैं। कबीर की भी हंसी छूट गयी।
कबीर (हंसकर) बोला -
हां, karan भैया तो mode on कर लेते हैं रात को। फिर मुझे mummy की तरह ही सुलाते हैं।
सो जा बेटा नहीं तो गब्बर आ जायेगा।
तीनों हंस पड़ते हैं। पहली बार माहौल हल्का होता है।
Bed पर तीनों लेटे हैं। बीच–बीच में gap है।Kabir अचानक whisper करता है
कबीर बोला -
Shreya… एक बात बोलूं?
श्रेया बोली -
क्या?
कबीर बोला -
मुझे लग रहा है हम दोनों एक ही weird web series के characters हैं।”
करन बोला -
Kabir… सो जा।
कबीर बोला -
जी भैया।
Kabir ने करण के ऊपर हाथ रखा और करण के ऊपर अपनी एक टांग रखकर सो सो गया।
कबीर बोला - बोलो करण भैया की जय....
करण बोला - अब चुप भी हो जा। पूरी रात तो हिलता रहता है ।
श्रेया (हंसते हुए, पहली बार खुले मन से) बोली -
मैं भी अपनी बहन के साथ ऐसे ही सोती थी। मुझे भी रात भर हिलने की आदत थी। वैसे web series वाला example अच्छा था। पर उसमें भी chemistry चाहिए होती है।
कबीर बोला -
हां…
और हम friends बनकर शुरू करेंगे…
बाकी जो जिंदगी लिखेगी…वो देख लेंगे।
तब तक हम frineds मिलकर धूम मचाले..... धूम मचाले करेंगे।
करण बोला -
अरे शांत हो जा मेरे भाई। मुझे भी सोने दे और उसे भी सोने दे।
धीरे–धीरे तीनों आंखें बंद कर लेते हैं। पहली बार किसी को डर नहीं लगता।
आखिर श्रेया निभा पाएगी इस रिश्ते को ? क्या को दो पतियों के साथ रह पाएगी? क्या करन और कबीर अपनी जिम्मेदारी निभा पाएंगे?