उत्तरी साम्राज्य की वे बर्फीली हवाएँ उस रात साधारण नहीं थीं। उनमें एक ऐसी कड़वाहट थी, जैसे वे पहाड़ियों की गहराइयों में दबे किसी प्राचीन अभिशाप को सोखकर आई हों। हवा का हर झोंका इज़ोल्ड की त्वचा पर किसी ठंडी आरी की तरह चल रहा था। सराय की पुरानी लकड़ी की खिड़की जब हवा के दबाव से चरमराई, तो इज़ोल्ड को लगा जैसे कोई रूह कराह रही हो। वह खिड़की के पास खड़ी थी, उसकी आँखें दूर क्षितिज पर टिकी थीं जहाँ कैसियन का 'काली मीनारों वाला महल' बादलों को चीरता हुआ खड़ा था।महल की दीवारें बर्फ की सफेदी में भी काली दिख रही थीं, जैसे वे हज़ारों सालों के पाप को खुद में सोखे हुए हों। इज़ोल्ड ने अपनी हथेलियाँ खिड़की की ठंडी सिल्ल पर टिका दीं। ठंड इतनी ज़्यादा थी कि उसकी उंगलियाँ सुन्न पड़ने लगी थीं, लेकिन उसे उस सुन्नपन का अहसास नहीं था। उसे तो बस वह जलन महसूस हो रही थी जो उसके सीने में पिछले दस सालों से सुलग रही थी।कमरे के भीतर की हवा में सीलन और जलती हुई पुरानी लकड़ी की गंध बसी थी। कोने में रखी एक अकेली मोमबत्ती आखिरी बार फड़फड़ाई और बुझ गई, जिससे कमरा घने, मटमैले अंधेरे में डूब गया। इज़ोल्ड के लिए यह अंधेरा अपरिचित नहीं था; वह तो पिछले दस सालों से इसी कालेपन में जी रही थी। उसने अपनी आँखें बंद कीं और गहरी साँस ली। यादों के कपाट धीरे-धीरे खुलने लगे।उसे याद आया वह दिन, जब वह केवल सात साल की थी। उसका कबीला 'एल्डोरिया' खुशियों से भरा था। वहाँ की मिट्टी में केसर की महक थी और हवाओं में बांसुरी की तान। एल्डोरिया के लोग जादू और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रहते थे। इज़ोल्ड को याद था अपनी माँ का वह सूती लिबास, जिसकी गंध चमेली के फूलों जैसी थी। उसे याद था अपने पिता की वह हँसी, जो पहाड़ों की गूँज की तरह साफ़ थी।फिर वह रात आई। वह काली, खूनी रात।कैसियन की शाही सेना के घोड़ों की टापें जब गाँव की ओर बढ़ीं, तो ऐसा लगा मानो ज़मीन काँप रही हो। इज़ोल्ड अपनी छोटी सी खिड़की से देख रही थी। मशालों की आग ने आसमान को नारंगी कर दिया था। चीखें... वह चीखें आज भी उसके कानों के पर्दों को फाड़ देती थीं। उसके पिता, जो एक योद्धा थे, उन्होंने अपनी तलवार उठाई थी, लेकिन शाही जादूगरों के काले जादू के सामने उनकी वीरता महज़ एक मोमबत्ती की तरह बुझ गई।इज़ोल्ड ने अपनी मुट्ठी भींची। उसके नाखून उसकी हथेलियों में गड़ गए। उसे अपनी माँ का वह आखिरी स्पर्श याद आया—उनके हाथ कांप रहे थे, उनका गला खून से भरा था, फिर भी उन्होंने इज़ोल्ड को एक गुप्त तहखाने में धकेल दिया था।"मत रोना, इज़ोल्ड। आज से तुम्हारे आँसू ही तुम्हारी शक्ति बनेंगे। जब तक बदला पूरा न हो, चैन की साँस मत लेना," माँ की वह अंतिम फुसफुसाहट उस तहखाने की खामोशी में जम गई थी।इज़ोल्ड अंधेरे में मुड़ी और कमरे के बीचों-बीच रखी उस पुरानी मेज़ की ओर बढ़ी। मेज़ पर एक कपड़े में लिपटा हुआ उसका खंजर रखा था। उसने बहुत सावधानी से कपड़ा हटाया। वह खंजर—'काली रूह का दंश'। इसकी धातु सामान्य लोहे से नहीं, बल्कि एक गिरे हुए तारे के टुकड़े और एल्डोरिया के प्राचीन जादुई पत्थरों को पिघलाकर बनाई गई थी।खंजर की मूठ पर बनी नक्काशी में एक मंद बैंगनी रोशनी थिरकने लगी। इज़ोल्ड ने अपनी कलाई पर एक हल्का सा चीरा लगाया। लाल खून की एक बूंद खंजर की सतह पर गिरी। देखते ही देखते वह धातु उस खून को सोख गई और कमरे में एक अजीब सी ऊर्जा का संचार हुआ। खंजर अब प्यासा था। उसे उस दिल का लहू चाहिए था जिसने दुनिया से रंग छीन लिए थे।इज़ोल्ड ने अपना भारी काला लबादा कंधे पर डाला। उसने आईने में खुद को नहीं देखा, क्योंकि वह जानती थी कि उसे वहाँ इज़ोल्ड नहीं, बल्कि एक साया दिखेगा। वह सराय के पिछले दरवाज़े से बाहर निकली। बाहर बर्फ का तूफ़ान अब और भी भयानक हो चुका था।महल तक पहुँचने का रास्ता 'साया-वन' (Shadow Forest) से होकर गुज़रता था। यह जंगल अभिशप्त था। यहाँ के पेड़ों की टहनियाँ किसी कंकाल की उंगलियों की तरह हवा में हिल रही थीं। इज़ोल्ड जैसे ही जंगल की सीमा में दाखिल हुई, उसे अहसास हुआ कि कोई उसका पीछा कर रहा है। वह सामान्य जंगली जानवर नहीं था।अचानक, बर्फ की धुंध को चीरते हुए दो लाल आँखें उसके सामने उभरीं। एक 'बर्फीला भेड़िया'—शाही गार्ड्स का पालतू शिकारी। भेड़िया गुर्राया, उसकी लार बर्फ पर गिरते ही जम रही थी। इज़ोल्ड रुकी नहीं। उसके पास समय नहीं था। उसने अपनी जादुई चेन निकाली।"मेरे रास्ते से हट जाओ, बेज़ुबान जानवर। आज रात मेरी लड़ाई मौत के देवता से है, तुम तो महज़ एक प्यादे हो," इज़ोल्ड ने ठंडी आवाज़ में कहा।भेड़िये ने छलांग लगाई। इज़ोल्ड ने पलक झपकते ही अपनी जादुई चेन को हवा में लहराया। नीली आग की लपटों ने भेड़िये को हवा में ही जकड़ लिया। एक तेज़ धमाका हुआ और भेड़िया बर्फ के ढेर में बदल गया। इज़ोल्ड ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसके कदम अब महल की ऊँची दीवारों की ओर बढ़ रहे थे। वह जानती थी कि असली खतरा अभी शुरू भी नहीं हुआ है।पहाड़ी की चोटी पर खड़ा वह महल अब साफ दिख रहा था। उसके मुख्य द्वार पर 'शाही साया-गार्ड्स' का पहरा था। ये वे सैनिक थे जिनकी रूह वेलेरियस ने निकाल ली थी और उनमें काले जादू की आग भर दी थी।"तैयार हो जाओ कैसियन," इज़ोल्ड ने महल की ओर देखते हुए कहा, "तुम्हारे महल की नींव हिलाने वाली हवा पहुँच चुकी है।"अध्याय 1: प्रतिशोध की ठंडी रात (भाग-2)सराय का भारी दरवाज़ा जब इज़ोल्ड के पीछे बंद हुआ, तो बाहर के सन्नाटे ने उसे अपनी आगोश में ले लिया। हवा की आवाज़ अब महज़ एक शोर नहीं थी, बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे हज़ारों रूहें एक साथ चीख रही हों। बर्फ इतनी घनी गिर रही थी कि मशाल की रोशनी भी कुछ ही फीट की दूरी पर दम तोड़ देती। इज़ोल्ड ने अपना लबादा कसकर लपेट लिया। उसके जूतों के नीचे ताज़ा बर्फ के दबने की 'चरमराहट' उस खामोशी में बहुत तेज़ सुनाई दे रही थी।सराय से महल की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग सैनिकों से भरा रहता था, इसलिए इज़ोल्ड ने 'मृतकों की घाटी' और 'साया-वन' (Shadow Forest) का रास्ता चुना। यह वह रास्ता था जिससे स्थानीय लोग दिन के उजाले में भी गुज़रने से कतराते थे।जैसे ही इज़ोल्ड ने जंगल की सीमा पर कदम रखा, तापमान अचानक कई डिग्री और गिर गया। यहाँ के पेड़ साधारण नहीं थे। वे पुराने, झुके हुए और काले थे, उनकी टहनियाँ बर्फ के बोझ से नहीं, बल्कि किसी अदृश्य श्राप से ज़मीन की ओर झुकी हुई थीं। इज़ोल्ड ने अपनी जादुई दृष्टि (Magic Sight) जाग्रत की। उसकी आँखों की पुतलियाँ हल्की बैंगनी चमक के साथ फैल गईं। अब उसे अंधेरे में भी साफ दिख रहा था, लेकिन जो उसने देखा वह डरावना था।पेड़ों की जड़ों के बीच से सफेद धुंध के साये निकल रहे थे। ये 'भटके हुए साये' थे—उन लोगों की आत्माएं जिन्हें कैसियन की सेना ने मार डाला था और जिन्हें कभी अंतिम संस्कार नसीब नहीं हुआ।"इज़ोल्ड..." एक फुसफुसाहट हवा में तैरती हुई उसके कानों तक पहुँची।इज़ोल्ड ठिठक गई। उसका हाथ तुरंत लबादे के भीतर खंजर की मूठ पर जा टिका। "कौन है?" उसने गरजकर पूछा, लेकिन उसकी आवाज़ ठंडी हवा में बिखर गई।"इज़ोल्ड... वापस लौट जाओ... यहाँ सिर्फ मौत है..." इस बार आवाज़ बिल्कुल उसके पीछे से आई। यह आवाज़ उसकी माँ जैसी थी।इज़ोल्ड का दिल ज़ोर से धड़का। उसने मुड़कर देखा। धुंध के बीच उसे एक धुंधली आकृति दिखाई दी। वह उसकी माँ थी, उसी फटे हुए और खून से सने लिबास में, जैसा उसने आखिरी बार उन्हें देखा था। माँ के चेहरे पर गहरा दुख था और उनकी आँखों से खून के आँसू बह रहे थे।"माँ?" इज़ोल्ड के होंठ कांपे। उसका फौलादी इरादा एक पल के लिए डगमगा गया। "क्या आप सच में यहाँ हैं?"वह आकृति उसकी ओर बढ़ी। "यह बदला तुम्हें खा जाएगा, मेरी बच्ची। कैसियन कोई इंसान नहीं, वह एक अंधेरा है जिसे तुम नहीं जीत सकती। मेरे पास आओ, इज़ोल्ड... शांति की ओर चलो।"इज़ोल्ड ने एक कदम माँ की ओर बढ़ाया, लेकिन तभी उसके हाथ में मौजूद खंजर अचानक गर्म होने लगा। धातु की वह जलन इज़ोल्ड की कलाई तक पहुँची और उसे हकीकत का अहसास हुआ। उसने गौर से देखा—उस आकृति की परछाईं ज़मीन पर नहीं थी।"तुम मेरी माँ नहीं हो," इज़ोल्ड की आवाज़ अब पत्थर जैसी सख्त थी। "मेरी माँ ने मुझे पीठ दिखाकर भागना नहीं, बल्कि सीने पर घाव खाकर लड़ना सिखाया था। तुम सिर्फ इस जंगल का एक छल (Illusion) हो!"उसने अपनी जादुई चेन को हवा में लहराया। एक तेज़ नीली रोशनी का विस्फोट हुआ और वह आकृति चीखते हुए धुंध में विलीन हो गई। इज़ोल्ड की साँसें तेज़ थीं। उसका गला सूख रहा था, लेकिन उसकी आँखों में प्रतिशोध की आग और तेज़ हो गई। कैसियन के जादू ने अब उसे मानसिक रूप से तोड़ना शुरू कर दिया था, और यह तो महज़ शुरुआत थी।वह और गहराई में उतरती गई। जंगल के बीचों-बीच एक पुरानी बलि-वेदी (Altar) थी, जहाँ कभी एल्डोरिया के लोग देवताओं की पूजा करते थे। अब वह वेदी टूटी हुई थी और उस पर काला जादू करने वाले 'साया-गार्ड्स' का पहरा था। इज़ोल्ड ने खुद को एक बड़े पेड़ के पीछे छिपा लिया।सामने तीन गार्ड्स थे। उनके शरीर इंसानी थे, लेकिन उनके चेहरों पर नकाब की जगह लोहे की जाली लगी थी, जिसके भीतर से नारंगी आग की लपटें निकल रही थीं। वे अपनी भारी तलवारों को ज़मीन पर टिकाए खड़े थे, जैसे किसी आहट का इंतज़ार कर रहे हों।इज़ोल्ड को समझ आ गया कि बिना लड़े वह आगे नहीं बढ़ पाएगी। उसने अपने खंजर को बाहर निकाला। "आज रात," उसने मन ही मन कहा, "एल्डोरिया का पहला कर्ज चुकाया जाएगा।"उसने अँधेरे का फायदा उठाते हुए एक मंत्र बुदबुदाया। उसके चारों ओर की बर्फ हवा में उठने लगी और एक बवंडर का रूप लेने लगी। गार्ड्स चौंके, लेकिन इससे पहले कि वे अपनी तलवारें संभाल पाते, इज़ोल्ड एक साये की तरह उनके बीच पहुँच चुकी थी।अध्याय 1: प्रतिशोध की ठंडी रात (भाग-3)इज़ोल्ड की जादुई चेन जब हवा में लहराई, तो उसकी गूँज पूरे 'साया-वन' में सुनाई दी। वह महज़ एक हथियार नहीं था, बल्कि एल्डोरिया के प्राचीन लोहारों द्वारा अभिमंत्रित एक ऐसी शक्ति थी जो रूहों को भी जकड़ सकती थी। पहले गार्ड ने अपनी भारी तलवार उठानी चाही, लेकिन इज़ोल्ड की गति बिजली से भी तेज़ थी।उसने अपनी कलाई घुमाई और चेन उस गार्ड के गले के चारों ओर लिपट गई। नीली जादुई आग ने गार्ड के लोहे के नकाब को पिघलाना शुरू कर दिया। उसके भीतर से एक डरावनी, अमानवीय चीख निकली—वह किसी इंसान की आवाज़ नहीं थी, बल्कि उन तड़पती रूहों का शोर था जिन्हें वेलेरियस के जादू ने कैद कर रखा था। एक झटके में इज़ोल्ड ने चेन खींची और वह सैनिक राख के ढेर में बदल गया।बाकी दो गार्ड्स अब सतर्क हो चुके थे। उन्होंने एक साथ इज़ोल्ड पर हमला किया। उनकी तलवारें जब हवा में घूमीं, तो उनके पीछे काली आग की लकीरें बन रही थीं। इज़ोल्ड ने पीछे की ओर छलांग लगाई और एक पेड़ के तने का सहारा लेकर हवा में उछली।"तुम्हारी तलवारें उन पर चलती हैं जिनमें जान होती है," इज़ोल्ड ने हवा में ही अपना खंजर सीधा किया। "मैं तो बहुत पहले ही मर चुकी हूँ!"उसने अपना खंजर दूसरे गार्ड की छाती के ठीक बीच में उतार दिया। खंजर का 'नाग-विष' जैसे ही गार्ड के काले जादू के संपर्क में आया, एक ज़ोरदार धमाका हुआ। झटके से इज़ोल्ड पीछे गिरी, उसकी पीठ एक ठंडे पत्थर से टकराई। उसके फेफड़ों से हवा बाहर निकल गई और एक पल के लिए उसे लगा कि उसकी पसलियाँ टूट गई हैं।तीसरा गार्ड अब उसके बिल्कुल ऊपर था। उसने अपनी भारी तलवार दोनों हाथों से पकड़ी और इज़ोल्ड के सिर पर वार करने के लिए नीचे लाया। इज़ोल्ड ने अपनी आँखें सिकोड़ीं और अपनी आंतरिक शक्ति को केंद्रित किया।"एल्डोरिया की राख, गवाह बनो!" उसने चिल्लाकर कहा।उसके शरीर से एक बर्फीला विस्फोट हुआ, जिसने गार्ड को कई फीट दूर फेंक दिया। वह गार्ड अभी उठने की कोशिश कर ही रहा था कि इज़ोल्ड ने अपनी जादुई चेन से उसे वहीं ज़मीन में गाड़ दिया। चारों ओर सन्नाटा छा गया। सिर्फ इज़ोल्ड की तेज़ साँसों और जलते हुए लोहे की गंध हवा में बाकी थी।उसने अपना खंजर साफ किया और फिर से लबादे में छिपा लिया। उसका शरीर दर्द से कराह रहा था, लेकिन उसकी मंज़िल अब उसके सामने थी।जंगल के उस पार, पहाड़ी की ढलान पर महल की दीवारें विशाल दैत्य की तरह खड़ी थीं। ये दीवारें 'डेथ-स्टोन' से बनी थीं—एक ऐसा पत्थर जो जादुई वार को सोख लेता था। इज़ोल्ड रेंगती हुई दीवार के बिल्कुल करीब पहुँची। यहाँ की हवा में एक अजीब सी भारीपन थी, जैसे कोई अदृश्य हाथ उसके गले को घोंट रहा हो।दीवार के ऊपर मशालें टिमटिमा रही थीं और संतरी लगातार गश्त लगा रहे थे। मुख्य द्वार से अंदर जाना आत्महत्या के समान था। इज़ोल्ड को उस गुप्त रास्ते की तलाश थी, जिसका ज़िक्र उसके पिता ने मरते समय किया था—'नहरों का निकास'। यह वह रास्ता था जहाँ से महल का कचरा और गंदा पानी बाहर गिरता था।बर्फ की फिसलन भरी ढलान पर उतरते हुए, उसे वह लोहे की जाली मिल गई। जाली पुरानी थी, लेकिन उस पर भी सुरक्षा मंत्र लगे हुए थे। इज़ोल्ड ने अपना हाथ जाली पर रखा। उसे एक ज़ोरदार बिजली का झटका लगा, जिससे उसका पूरा हाथ सुन्न पड़ गया।"इतना आसान नहीं होगा," उसने कड़वाहट से मुस्कराते हुए कहा।उसने अपनी थैली से एक छोटी सी शीशी निकाली जिसमें 'भ्रष्ट जादू' का अर्क था। उसने उसे जाली के तालों पर छिड़का। धीरे-धीरे लोहा पिघलने लगा और सुरक्षा मंत्रों की नीली रोशनी फीकी पड़ गई। इज़ोल्ड ने अपनी पूरी ताकत लगाकर जाली को थोड़ा ऊपर उठाया और खुद को उस संकरे, गंदे रास्ते के भीतर खींच लिया।भीतर का सन्नाटा बाहर के तूफ़ान से भी ज़्यादा डरावना था। वह अब कैसियन के साम्राज्य के पेट में थी। हर कदम के साथ वह मौत के करीब जा रही थी, लेकिन उसका दिल खुशी से धड़क रहा था। प्रतिशोध का समय अब चंद लम्हों की दूरी पर था।यह अध्याय 2 बहुत ही रोमांचक और जादुई तत्वों से भरपूर है! इज़ोल्ड का उन अदृश्य जादुई तारों (प्राण-भक्षक जाल) के बीच से निकलना और फिर उस छाया-हाथों वाले दलदल से जूझना, कहानी में 'डार्क फैंटेसी' के स्तर को बहुत ऊंचा ले जाता है।