The Memories we Shared in Hindi Love Stories by cat books and stories PDF | The Memories we Shared

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The Memories we Shared

Story Title Name :- The memories we shared.


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And what about your first love??? " सामने से एक आवाज आई।

जिसे देख आर्या मुस्कुरा दी.....।


कुछ साल पहले,


एक लाइब्रेरी, जिसमें एक लड़की किताबों को समेट कर रख रही थी। की तभी उसमें से एक किताब गिर गई। और जमीन पर गिरते ही उसमें से एक नोट बाहर गिरा....जिसे देख उस लड़की ने उसे उठा लिया।

उस नोट पर लिखा था " आप यूं ही...किताबें समेटती रहेंगी. आर्या..।
ये सवाल काफी बचकाना था। जिसके जवाब में आर्या ने लिखा " हां....अगर आपको परेशानी है तो आप मेरी मदद कर सकते है " उसने बिन सोचे ये लिख दिया और वापिस उस नोट को किताब में रख आई।

अगले दिन,

आर्या लाइब्रेरी में कुछ किताबों को समेट कर रख रही थी की न जाने उसे क्या सुझा... और वो फौरन लाइब्रेरी के एक बुक शेल्फ की तरफ बढ़ गई।
थोड़ा ढूंढने के बाद उसे वो किताब मिल गई जिसे उसने कल देखा था।

उसने फॉरन वो किताब खोल ली....जिसमे आज एक नया नोट था....
" मदद ... ऐसी बातों की आपको जरूरत नहीं....। आप खुद में ही बहुत काबिल है ...." ये पढ़ते ही आर्या के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान तैर गई।

उसने फॉरन उस किताब को लिया... और अपनी टेबल पर उसे रखते हुए पेन उठा लिया " आप है कौन....?? " ये इकलौता सवाल आर्या ने उस नोट पर लिख कर छोड़ दिया....। और वो वापिस अपने काम करने  लग गई।

आर्या पेशे से एक लाइब्रेरियन थी...वो रोजाना अपनी लाइब्रेरी में बच्चों की किताबों को समेटती और वहां की देखभाल करती थी...उसका कोई न तो दोस्त था और न वो खुद किसी से मिलती थी....। एक आम जिंदगी जीने वाली उस लड़की ने खुद को उस लाइब्रेरी की चार दीवारों में कैद किया हुआ था। जिसके डोर पर एक अंजान ने अपने सवालों के नोट्स अब छोड़ दिए थे....।

शाम को,

आर्या वापिस घर की तरफ बढ़ गई...रह रह कर उस शख्स का खयाल उसके दिमाग से जा नहीं रहा था...और अब उसे सिर्फ कल सुबह का इंतज़ार था,

अगले दिन,

आर्या फॉरन लाइब्रेरी आई। हर दिन की तरह आज भी काफी लोग लाइब्रेरी में थे....जिसे इग्नोर कर वो किताब की जगह पर आई और सीधे किताब खोल ली...जिसमें आज एक नया नोट था..." अरे...आप तो नाम पूछने लगी...इतनी जल्दी है आपको ...." ये इतना सा नोट पढ़ आर्या ने मुंह बनाते हुए खुद से कहा " अरे ...ये भी कोई बात हुई ...अजीब इंसान है नाम बता देता तो क्या चला जाता इसका..." कहते हुए वो उदास हो गई।

की अगले पल उसके दिमाग में कुछ अजीब आया। उसने फॉरन दोबारा पेन लिया और लिखना शुरू कर दिया " अब किताब मिल गई है तो...अपना नाम भी बता दीजिए...अंजान लोगो से बात करना, हुनर तो नहीं है आपका?? " ये नोट लिख उसने फॉरन उसे किताब में रखा और इस बार किताब की जगह बदल दी। अक्सर जिस जगह वो किताब रहती थी आज वहां से उस किताब को हटा कर आर्या ने कही और रख दिया था।

और वापिस अपनी जगह पर आकर  खुद में बड़बड़ाते हुए कहा " हम्मम अब देखती हूँ कि आप किताब कैसे ढूंढेंगे...." कहते हुए वो मंद मंद मुस्कुराने लगी।

दिन बीत गया। और एक और दिन की आस में आर्या फॉरन लाइब्रेरी के लिए घर से निकल गई...। और कुछ ही देर में...वो लाइब्रेरी आ गई।

उसने आज भी आते ही अपने सारा काम छोड़ दिया । और सीधा वहां गई जहां कल उसने वो किताब रखी थी..... आर्या को पूरी उम्मीद थी कि आज उनमें कोई नोट नहीं होगा...। और इसी सोच में उसने उदास मन से किताब उठाई। और उसे खोल लिया।

किताब खुलते ही उसकी आंखे हैरानी में बड़ी हो गई क्योंकि उसमें आज भी एक नोट था " किताब जब छिपाई गई थी तब मैं आपको ही देख रहा था और अंजान लोगो का तो पता नहीं मगर आपसे बात करने का हुनर मुझमें बखूबी है " ये पढ़ते ही आर्या के हाथ ठंडे पड़ गए। उसने फॉरन अपने चारो तरफ देखा। उसे अब लग रहा था कि वो शख्स इस वक्त वहां लाइब्रेरी में मौजूद है।

जिसे देख उसने फॉरन वहां एक अनाउंसमेंट करते हुए पूछा " ये बुक किसने ली थी....?? " उसका सवाल सुन सबने ना में जवाब दे दिया । जिसे देख आर्या ने मुंह बनाते हुए कहा " हम्मम कहीं ये लड़का कोई स्टॉकर तो नहीं है " सोचते हुए उसने दोबारा पेन लिया और एक नोट लिखा " आप है कौन...अपना नाम बताइए....। " ये लिख उसने नोट वापिस किताब में रखा और उसे वापिस उसकी पहले की जगह पर रख आई।

वो पूरा दिन इसके बारे में सोचती रही और आखिर में उसने ठान लिया कि वो खुद इस शख्स का पता लगाएगी जिसके लिए उसने पूरे वक्त लाइब्रेरी में रहने का मन बनाया। और किताब को खुद के नजदीक रख लिया।

आर्या की लाइब्रेरी रात को भी ओपन रहती थी उसका मानना था कि " चोर किताब पढ़ेगा नहीं तो चोरी क्यों करेगा, और पढ़ने वाला किताबों की एहमियत जानता है तो वो उसे नहीं लेगा...." इसीलिए उसकी लाइब्रेरी हमेशा खुली रहती थी।

रात को,

आर्या की आंखे बार बार झपक रही थी...क्योंकि अब उसे नींद आ रही थी...उसने बहुत कोशिश की ...की वो न सोए लेकिन पूरा दिन काम करने के बाद...वो थक चुकी थी इसीलिए देखते ही देखते उसकी आंख लग गई...

और रात बीत गई,

सुबह लोगों की आवाज के साथ आर्या की आंख खुली जिसके साथ ही वो फौरन खड़ी हो गई। उसने अपने साइड में देखा तो बुक अभी भी वही रखी हुई थी...लेकिन उसे देख साफ पता चल रहा था कि उसे किसी ने छुआ है। जिसे देख आर्या ने खुद को कोसते हुए कहा " अरे यार...मै सो कैसे सकती हूं...

कहते हुए उसकी आंखो में आंसू भर आए...उसे सच में जानना था कि आखिर ये शख्स कौन था....उसने एक हाथ से अपने आंसुओं को साफ करते हुए किताब उठाई...जिसमें हमेशा की तरह फिर एक नोट था..." आंखो को इतनी तकलीफ दोगी...तो वो भारी हो जाएंगी...। खैर मेरे नाम को जानने के लिए इतनी मेहनत की आपने....उसके लिए एक गिफ्ट तो बनता है....।

ये पढ़ आर्या ने वापिस अपने टेबल पर देखा वहां कुछ नहीं था। जिसे देख उसने खुद से कहा " कहां है गिफ्ट...मुझे दिख क्यों नहीं रहा..." कहते हुए उसने नजर वापिस नोट की तरफ की...कुछ सोच उसने वो नोट पलट दिया। जिसके पीछे कुछ लिखा था " अपने गले में देखो....।

ये पढ़ते ही आर्या ने अपने गले को देखा जहां एक पेंडेंट था...हल्के नीले रंग का वो सिल्वर पेंडेंट जिसमें एक मून के साथ " S  " का इनिशियल था।
उसे देख आर्या के चेहरे पर एक मुस्कान तैर गई ।

और उसने खुद से कहा " तो ...ये बात है " कहते हुए वो मुस्कुरा दी। और उसने फिर एक बार पेन उठा लिया। उसने जैसे ही कुछ लिखने की कोशिश की तभी उसके हाथ रुक गए...कुछ सोच उसने पेन रख दिया और किताब में बिन कुछ लिखे वो उसे वापिस वही रख आई....।

प्रेजेंट,

तो क्या हुआ....क्या आप उस शख्स से मिल पाई...क्या आपको पता चल कौन था वो....। हम्मम बोलो न मम्मा....कौन था वो...." क्या आर्या मिल पाई उनसे...." कहते हुए वो ( छोटा करीब 10 साल का) बच्चा आर्या से लिपट गया।

जिसे देख पीछे से एक शख्स ने आकर उसे अपनी गोद में बैठाते हुए कहा " शौर्य...बेटा मै बताता हूं...आगे क्या हुआ..." कहते हुए उस शख्स ने मुस्कुराकर आर्या को देखा...। जिसे देख आर्या भी मुस्कुरा दी।

फ्लैशबैक,

अगला दिन ,

आर्या नहीं आई...दिन बीतते गए और 1 हफ्ता बीत गया मगर आर्या नहीं आई..... ।

फिर एक दिन,

एक शख्स ने वो किताब हाथों में पकड़ रखी थी...उसमें लिखे वो 7 नोट्स अब भी वैसे ही रखे थे...जिसे देख उसने उदासी में वो किताब बंद कर दी।
की तभी किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। एक प्रेसेंस फील कर जैसे ही वो शख्स मुड़ा। तो उसके हाथों से वो किताब फिसल कर नीचे गिर गई।

जिसे देख सामने खड़ी उस लड़की ने वो किताब जमीन से उठाते हुए कहा " अरे...आप तो सिर्फ अंजान लोगो से घबराते है..मगर .मै तो आपको जानती हूं न....मिस्टर S " कहते हुए आर्या मुस्कुरा दी।
तो वही उस शख्स ने उसे देखते हुए कहा " तो आपने मुझे ढूंढ ही लिया....
" हा...क्योंकि मै जानने वालो से मिलकर रहती हूं " कहकर आर्या ने उसे देखा....।

प्रेजेंट,

हा...पापा तो फाइनली आर्या ने मिस्टर S को ढूंढ ही लिया..." कहते हुए वो खुशी से उस शख्स के गले लग गया।
जिसे देख आर्या ने मुस्कुराते हुए कहा " श्रेयांश .... आप ने ये कहानी कितनी बात सुनाई...है।

जिसे देख श्रेयांश ने कहा " जितने वक्त से तुमने मेरा दिया पेंडेंट पहन रखा है " कहते हुए श्रेयांश ने आर्या को देखा।

और वो दोनो मुस्कुरा दिए......।


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Arya :- A librarian 
Shreyansh :-  Main lead