When Stranger Fall in love - 2 in Hindi Love Stories by silent Shivani books and stories PDF | When Stranger Fall in love - 2

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When Stranger Fall in love - 2

टाइम 12:15 रात,

लोकेशन: मुंबई… कबीर का कमरा
मोबाइल की हल्की रोशनी में कबीर छत को घूर रहा था।

नींद आँखों से कोसों दूर थी।
फोन हाथ में था…
पर उंगलियाँ बार-बार उसी चैट पर जा रही थीं  Shivika Deshmukh

तीन घंटे हो चुके थे,

और आखिरी मैसेज उसी का था।
कबीर (मन में):
इतनी देर तक कोई अनजान लड़की क्यों याद आ रही है…
 
फिर अचानक फोन बजा...

Notification
Shivika sent a message

कबीर लगभग झटके से सीधा बैठ गया।

शिविका:
“तुम हमेशा इतनी देर तक जागते रहते हो क्या?”
कबीर मुस्कुराया।
टाइप करता है 

कबीर:
“ऑफिस वाले दिन में सोने नहीं देते… रात को आदत पड़ गई है जागने की 😅
और तुम?”

शिविका:
“मेरी नींद किताबों में अटक जाती है…”

कबीर:
“किताबें या कविताएँ?”

शिविका:
“दोनों… कभी पढ़ती हूँ, कभी लिखती हूँ…”
कुछ पल साइलेंस।
फिर कबीर हिम्मत करता है 

कबीर:
“तुम जो लिखती हो… वो किसी के लिए होता है?”
शिविका कुछ देर टाइप करती रहती है…
फिर रुक जाती है…
और आखिर में लिखती है 

शिविका:
“ज़्यादातर खुद के लिए…
क्योंकि कुछ बातें किसी से कही नहीं जाती…”
कबीर स्क्रीन को देखता रह जाता है।

कबीर (मन में):
ये लड़की अपनी बातों में बहुत कुछ छुपाए बैठी है…
वो लिखता है 

कबीर:
“शायद इसीलिए तुम्हारी लाइन्स सच्ची लगती हैं…”

उधर,
पुणे के हॉस्टल में…
खिड़की के बाहर हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी।
शिविका कुर्सी पर बैठी,
मोबाइल और डायरी के बीच उलझी हुई…

शिविका (मन में):
ये अजनबी इतना आराम से क्यों समझ रहा है…
वो मुस्कुराकर लिखती है 

शिविका:
“वैसे तुम हमेशा इतने सीरियस टाइप हो या आज स्पेशल मूड है?”
कबीर हँसता है 

कबीर:
“ऑफिस में दिन भर बॉस के सामने सीरियस…
रात को थोड़ा नॉर्मल बनने की कोशिश…” वैसे मैं बहुत Funny बंदा हूं, बस ये जाॅब के चक्कर मे थोडा सिरियस हो गया हूं।

शिविका:
अच्छा तो तुम्हे अपनी जाॅब बिल्कुल पसंद नही है? 

 कबीर: शायद! तुम नही समझोगी, अभी तुम्हारी लाइफ चिल चल रही है।सिर्फ पढ़ाई  करो  एग्जाम दो और मजे करो।

शिविका: इतना भी आसान नही है, लाइफ मे ओर भी प्रोब्लम हो सकती है। 

कबीर: अरे तुम्हारी लाइफ मे कैसे प्रोब्लम,तुम तो बच्ची हो अभी। "वो हंसता है"

शिविका: तुम्हे मजाक लग रहा है, "वो गुस्से मे बोली" 

कबीर: अरे ये तो ऑफलाइन हो गई, उसने जल्दी से मैसेज टाइप किया,
Hey Shivika मैं मजाक कर रहा था, अगर तुम्हे बुरा लगा हो तो साॅरी...

कुछ देर बाद 

इट्स ओके। शिविका ने रिप्लाई किया।

कबीर: थैंक गॉड मुझे लगा तुम बुरा मान गई। 
ओके बताओ तुम्हे क्या प्रोब्लम है? 

शिविका: कुछ नही, मैने ऐसे ही कहा था। 

कबीर: तुम शेयर कर सकती हो ! 

शिविका: अपने सीक्रेट Stranger से शेयर नही करते है, क्या तुम्हे ये बात पता है? 

कबीर: अच्छा फिर Stranger से बात क्यूं कर रही हो? 

शिविका: ओके अब मैसेज नही करूंगी। 

कबीर: अरे तुम इतनी जल्दी डिसिजन कैसे ले लेती हो? 

शिविका: तुमने ही तो कहा। 
कबीर: ओके साॅरी बाबा। 
 
शिविका: तुम बताओ, तुम्हे
 अपनी जाॅब क्यूं नही पसंद? 

कबीर:“पता नहीं…
कभी लगता है सही जगह हूँ…
कभी लगता है कहीं और होना चाहिए था…”
शिविका धीरे से मुस्कुराती है।

शिविका:
“कभी-कभी सही जगह वही होती है…
जहाँ हमें खुद को ढूंढने का मौका मिले…”
कबीर उस लाइन को दो बार पढ़ता है।

कबीर (मन में):
ये लड़की सिर्फ लिखती नहीं… सोचती भी बहुत गहरा है…
घड़ी में 1:38 बज चुके थे।

कबीर:
“इतनी रात तक जागना हॉस्टल में अलाउड है?”

शिविका:
“आज वार्डन भी सो गई है 😜
वैसे तुम्हें कल ऑफिस नहीं जाना?”

कबीर:
“जाना तो है…
पर आज बात अधूरी छोड़ने का मन नहीं…”
कुछ सेकंड का साइलेंस…
फिर 

शिविका:
“तो कल फिर बात करेंगे…
ये हमारी पहली लंबी चैट थी…”
कबीर मुस्कुराया।

कबीर:
“और उम्मीद है आख़िरी नहीं…”

शिविका:
“देखते हैं…”
दोनों ने फोन साइड में रखा…
लेकिन नींद…
अब भी दोनों की आँखों से दूर थी।
क्योंकि
कुछ अजनबी…
धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहे थे दिल में…