Towards the Light – Memoirs in Hindi Moral Stories by Pranava Bharti books and stories PDF | उजाले की ओर –संस्मरण

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उजाले की ओर –संस्मरण

प्रिय मित्रो!

  हर बार की भाँति यह वर्ष भी चला गया। कितना खोया, कितना पाया, कोई हिसाब नहीं। जीवन गणित नहीं है जो दो दुनी चार कर दो और आगे बढ जाओ। जीवन को जीने के लिए उसके साथ चलना होता है, उसमें डूबना पड़ता है, उसके साथ रुकना पड़ता है फिर यात्रा शुरु करनी होती है। इसी प्रकार रुकते, चलते जीवन कगार पर आ लगता है।

बीती ताहि बिसार दे,आगे की सुध ले के अनुसार दुखद स्मृतियों को भुलाकर आगे बढना ही जीवन को जीने का स्वस्थ तरीका है।

मित्रो!इस  नव वर्ष में आपके जीवन में नई पहल हो,

पिछले वर्षों की कठिन ज़िंदगी और सरल हो।

अनसुलझी रह गई जीवन में जो समस्याएँ अब तक,

उन सभी समस्याओं का सरल और सुलभ हल हो।

जो भी  समय था जीवन का परेशानी भरा समय हो,वह पिछले वर्ष में निकल गया हो।

इस नए वर्ष में उगता नया सूरज,

आप सबके पूरे परिवार के लिए सुनहरा पल हो।

इस नये वर्ष में अपनों का साथ सदा रहे,सुख के सारे द्वार खुलें और सुखमय जीवन का हर पल हो।

इस नूतन नववर्ष पर आप सब ऊर्जा,विश्वास,धैर्य और प्रयासों के बेहिसाब सफर के साथ,

अपने आपको सफलता के नवीन शिखर पर पाएं।

 

इस नए साल में मैं ईश्वर से ये प्रार्थना है कि आप  सब न केवल इस वर्ष अपितु समस्त जीवन स्वस्थ, संतुष्ठ एवं आनंदित रहें।

     आज चारों ओर त्राहि त्राहि का वातावरण पसरा हुआ है, इंसान कहीं खो गया है, इंसानियत का ह्रास है।

इस नव वर्ष में माँ वीणा पाणि की अनुकंपा हम सभी व पूरे विश्व पर बनी रहे। हम सबको बुद्धि,विवेक शुद्वि का वरदान मिले। सब स्वस्थ, कर्मठ, आनंदित रहें। आमीन!

सस्नेह

आप सबकी मित्र

डॉ. प्रणव भारती