Shri Ramcharitmanas - 1 in Hindi Poems by Shivam Kumar Pandey books and stories PDF | श्रीरामचरितमानस - भाग 1

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श्रीरामचरितमानस - भाग 1

इस पुस्तक में 

मूल पाठ को छोड़कर सभी कुछ, 

Ai जेनरेटेड है ।

पुस्तक के अंतमें, 

लेखक की फोटो, original रहेगी 

पर Ai की सहायता से, जनरेट की हुई रहेगी ।

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॥ श्रीरामचरितमानस ॥


मूल पाठ : गोस्वामी तुलसीदास जी  

सरल हिन्दी अनुवाद : शिवम कुमार पाण्डेय  


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यह ग्रंथ श्रीरामचरितमानस के मूल अवधी पाठ के साथ  

सरल, स्पष्ट एवं भावानुकूल हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत करता है।


इस अनुवाद का उद्देश्य —

• मूल भाव को अक्षुण्ण रखना  

• आधुनिक पाठक के लिए सरल भाषा देना  


• अध्यात्म को जनसुलभ बनाना  


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समर्पण


यह ग्रंथ  

श्रीराम के चरणों में  

तथा  

सभी रामभक्तों को  

सादर समर्पित है।


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भूमिका


श्रीरामचरितमानस केवल काव्य रचना नहीं,  

अपितु मानव जीवन को मर्यादा, भक्ति और धर्म के पथ पर  

आगे बढ़ाने वाला एक जीवन-दर्शन है।


इस महान ग्रंथ में वर्णित आदर्श —

मर्यादा, करुणा, संयम, भक्ति और धर्म —  

मानव के आचरण, विचार और दृष्टि को  

संतुलित और पवित्र बनाते हैं।


इस हिन्दी प्रस्तुति में मूल अवधी पाठ के  

भाव, आशय और अंतर्निहित संदेश को  

सरल, सहज और प्रवाहपूर्ण हिन्दी भाषा में  

यथासंभव स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है,  

ताकि पाठक ग्रंथ के भाव से  

आंतरिक रूप से जुड़ सके।


यह प्रयास विशेष रूप से उन पाठकों के लिए है  

जो अवधी भाषा से पूर्णतः परिचित नहीं हैं,  

परंतु श्रीरामचरितमानस के  

आध्यात्मिक, नैतिक और जीवनोपयोगी संदेश को  

समझना और आत्मसात करना चाहते हैं।


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संपूर्ण श्रीरामचरितमानस,भाग 1 




वर्णानामर्थसंघानां  

रसानां छन्दसामपि ।  

मङ्गलानां च कर्त्तारौ  

वन्दे वाणीविनायकौ ॥


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एक-एक शब्द का अर्थ (सरल भाषा में)


वर्णानाम — वर्णों का, अर्थात् अक्षरों का।  

अर्थसंघानाम — अर्थों के समूहों का, या अर्थ की रचना का।  

रसानाम — रसों का, जैसे काव्य के भाव: श्रृंगार, वीर, करुण आदि।  

छन्दसामपि — छंदों का भी; 'अपि' का अर्थ है 'भी'।  

मङ्गलानां — शुभ कार्यों का, मंगलमय बातों का।  

च — और।  

कर्त्तारौ — कर्ता (रचयिता), यहाँ द्विवचन है — दो रचयिता।  

वन्दे — मैं वंदना करता हूँ, नमन करता हूँ।  

वाणीविनायकौ — वाणी अर्थात् देवी सरस्वती, और विनायक अर्थात् भगवान गणेश।


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 सरल हिंदी अनुवाद


जो अक्षरों, अर्थों, रसों, छंदों और शुभ कार्यों के रचयिता हैं — ऐसे वाणी (सरस्वती) और विनायक (गणेश) को मैं नमस्कार करता हूँ।

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संपूर्ण श्रीरामचरितमानस,भाग 1 

भवानिशङ्करौ वन्दे

श्रद्धाविश्वासरूपिणौ ।

याभ्यां विना न पश्यन्ति

सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम् ।।


शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):


भवानि – पार्वती देवी का नाम  

शङ्करौ – शिव और पार्वती (द्विवचन में)  

वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ  

श्रद्धा – आस्था, समर्पण  

विश्वास – भरोसा, निष्ठा  

रूपिणौ – जिनका स्वरूप है / जो रूपधारी हैं (द्विवचन)  

याभ्यां – जिन दोनों के द्वारा  

विना – बिना  

न – नहीं  

पश्यन्ति – देखते / अनुभव करते  

सिद्धाः – सिद्ध पुरुष / आत्मसाक्षात्कार प्राप्त योगी  

स्वान्तःस्थम् – अपने अंतःकरण में स्थित  

ईश्वरम् – परमात्मा / भगवान


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सरल हिंदी अनुवाद:


मैं शिव और पार्वती की वंदना करता हूँ, जो श्रद्धा और विश्वास के रूप में प्रकट होते हैं।  

जिनके बिना सिद्ध पुरुष भी अपने हृदय में स्थित ईश्वर का दर्शन नहीं कर सकते।

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वन्दे बोधमयं नित्यं

गुरुं शङ्कररूपिणम् ।

यमाश्रितो हि वक्रोऽपि

चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते ।।



शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):


वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ  

बोधमयं – ज्ञानस्वरूप / पूर्णतः चेतना से युक्त  

नित्यं – सदा / हमेशा  

गुरुं – गुरु को / आध्यात्मिक शिक्षक को  

शङ्कररूपिणम् – शंकर (भगवान शिव) के स्वरूप वाले  

यम् – जिसको / जिसे  

आश्रितः – आश्रय लिया / शरण लिया  

हि – निश्चय ही / वास्तव में  

वक्रः – टेढ़ा / टेढ़े स्वभाव वाला  

अपि – भी  

चन्द्रः – चंद्रमा  

सर्वत्र – हर जगह / सर्वत्र  

वन्द्यते – पूजित होता है / सम्मानित होता है


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सरल हिंदी अनुवाद:


मैं उस गुरु की वंदना करता हूँ, जो ज्ञानस्वरूप हैं, सदा विद्यमान हैं, और शंकर (भगवान शिव) के समान हैं।  

जिनका आश्रय लेकर टेढ़ा (दाग वाला) चंद्रमा भी सर्वत्र पूजनीय बन गया।

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सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ ।

वन्दे विशुद्धविज्ञानौ

कवीश्वरकपीश्वरौ ।।



शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):


सीताराम – सीता और राम (भगवान राम और माता सीता)  

गुणग्राम – गुणों का समूह / सद्गुणों की भीड़  

पुण्यारण्य – पुण्य से पवित्र हुआ वन / पावन वन  

विहारिणौ – विचरण करने वाले (द्विवचन – दो व्यक्तियों के लिए)  

वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ  

विशुद्ध – पूर्णतः शुद्ध / निर्मल  

विज्ञानौ – ज्ञानस्वरूप दोनों / दिव्य ज्ञान से युक्त (द्विवचन)  

कवीश्वर – श्रेष्ठ कवियों के ईश्वर / वाणी के अधिपति  

कपीश्वरौ – वानरों के स्वामी (श्रीराम और हनुमान के रूप में) / वानरराज


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सरल हिंदी अनुवाद:


मैं उन सीता और राम की वंदना करता हूँ, जो गुणों के समूह से युक्त हैं, पुण्य से पवित्र वनों में विचरण करते हैं,  

जो पूर्णतः शुद्ध ज्ञानस्वरूप हैं, श्रेष्ठ कवियों के अधिपति और वानरों के स्वामी हैं।

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उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं

क्लेशहारिणीम् ।

सर्वश्रेयस्करीं सीतां

नतोऽहं रामवल्लभाम् ।।



शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):


उद्भव – सृष्टि / उत्पत्ति  

स्थिति – पालन / स्थिति बनाए रखना  

संहार – संहार / विनाश  

कारिणीं – करने वाली / क्रियान्वित करने वाली  

क्लेश – दुःख / पीड़ा  

हारिणीम् – हरने वाली / समाप्त करने वाली  

सर्व – सभी / सम्पूर्ण  

श्रेयः – कल्याण / श्रेष्ठ फल  

करीं – करने वाली / प्रदान करने वाली  

सीतां – सीता को / माता सीता  

नतः – नतमस्तक / झुका हुआ  

अहम् – मैं  

रामवल्लभाम् – श्रीराम की प्रिय / श्रीराम की पत्नी


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सरल हिंदी अनुवाद:


मैं श्रीराम की प्रिय पत्नी, माता सीता को नमन करता हूँ,  

जो सृष्टि, पालन और संहार की अधिष्ठात्री हैं,  

जो समस्त क्लेशों को हरने वाली हैं,  

और जो सभी प्रकार के कल्याण को प्रदान करने वाली हैं।

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