ग्रूमिंग या बाल उत्पीड़न
ग्रूमिंग वह प्रक्रिया या काम है जब कोई व्यक्ति किसी का ( खास कर बच्चा / बच्ची या किशोर/ किशोरी के ) छल से विश्वास जीतकर यौन संबंध बनाने के लिए फुसला कर राजी कर लेता है या उसे धोखा देता है . हालांकि ग्रूमिंग शब्द का अर्थ संवारना होता है पर व्यावहारिक तौर पर इस शब्द का दुरुपयोग होता है . इसे चाइल्ड सेक्स का मामला भी कहा जा सकता है . कुछ समय पहले U.K में ग्रूमिंग की ख़बरें काफी चर्चा में थीं और कहा जाता है कि हजारों किशोरियां इसकी शिकार हुई थीं . हालांकि भारत में भी चाइल्ड सेक्स की शिकार टीन्स होती हैं पर यहाँ इसे ग्रूमिंग नहीं कहा जाता है .
ग्रूमिंग क्या है - पहले भोले भाले बच्चों या टीन्स को बहला-फुसला कर कोई चालबाज व्यक्ति उनका भरोसा जीत लेता है . जब बच्चा या किशोर आँख मूँद कर उस पर विश्वास करने लगता है तब उस मासूम को सेक्स के लिए तैयार कर लेता है . खास कर नाबालिग लड़कियां ग्रूमिंग का शिकार आसानी से हो सकती हैं . ग्रूमिंग का काम वह धूर्त आमने सामने रह कर भी कर सकता है या ऑनलाइन भी कर सकता है . अक्सर ग्रूमिंग किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है जिसे वह मासूम बच्चा जानता हो या कभी नहीं भी जानता हो . अक्सर यह काम कोई वयस्क करता है या कभी कोई टीन एजर का भी हो सकता है . यह एक संवेदनशील विषय है . शिकारी ग्रूमर और ग्रूमिंग का शिकार किसी भी लिंग का हो सकता है .
ऑनलाइन ग्रूमिंग - कभी ग्रूमर आमने सामने न हो कर ऑनलाइन ग्रूमिंग भी करता है - ग्रूमर सोशल मीडिया या अन्य साइटों पर शिकार से दोस्ती करने की कोशिश करता है . अक्सर चैट रूम में किसी और का रूप धारण करता है – शायद कोई युवा, बुजुर्ग, अलग लिंग या अलग यौन वाला व्यक्ति बन कर . वह अक्सर अपनी पहचान छिपाने के लिए किसी और की प्रोफ़ाइल तस्वीर का इस्तेमाल करता है और शिकार से इस तरह बात करता है जैसे वह हमउम्र हो, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं होता है .
भले ही वह शिकार से मिलने की कोशिश न करे पर जो व्यक्ति अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहा है वह मासूम शिकार को मिलने के लिए प्रोत्साहित करता है . वह अश्लील बातें करेगा या अश्लील वेबसाइट पर ले जायेगा , यौन अनुभवों के बारे में बात कर सकता है या टीन्स को उन्हें तस्वीरें भेजने या अपना वेबकैम चालू करने के लिए कह सकता है . वह ऐसी चीजें करने के लिए कहे जिनसे बच्चे को असहजता महसूस हो - ये सभी चीजें यौन शोषण के दायरे में ही आती हैं .
ग्रूमिंग अचानक या रातों रात नहीं होती है . यह एक सुनियोजित प्रक्रिया है जिसके कई स्टेज होते हैं . अक्सर लोग इस बात को तुरंत स्वीकार नहीं करेंगे लेकिन जितना अधिक हम ऐसे धूर्त अपराधियों को समझेंगे उतना ही ज्यादा जल्दी से हम इन्हें आगे बढ़ने से रोकने में कामयाब होंगे .
1 . ग्रूमिंग का पहला चरण - शिकार का चयन करना - ग्रूमर्स बहुत सोच समझ कर चाल चलते हैं और अक्सर बार-बार इसे दोहराते रहते हैं . वे कभी नहीं पकड़े जाना चाहते हैं इसलिए सब से पहले अपने शिकार का चयन करते हैं .अक्सर संभावित 'उम्मीदवारों' की तलाश करते हैं और उन तक आसानी से पहुँचने या उनकी कथित कमजोरी के आधार पर उनका चयन करते हैं . ऐसे टीन्स जिनके कोई खास करीबी दोस्त नहीं होते हैं, दोस्तों में अप्रिय होते हैं, जिनके परिवार में समस्याएं होती हैं, जो बहुत सारा समय अकेले या बिना निगरानी के बिताते हैं, जिनमें आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की कमी होती है, शारीरिक या बौद्धिक कमी होती हैं, या जो पहले से ही दुर्व्यवहार के शिकार होते हैं, उन्हें निशाना बनाए जाने की संभावना सबसे ज्यादा होती है .
2 . शिकार का विश्वास जीतना - ग्रूमर के लिए, शिकार का उच्च स्तर पर विश्वास स्थापित करना जरूरी होता है . वे बहलाने फुसलाने का काम करते हैं - गिफ्ट या ट्रीट देना, शिकार का अत्यधिक ख्याल रखना , पर्सनल सीक्रेट साझा करना , पार्टियों में बुलाना एवं अन्य तरीकों ( शराब या ड्रग देना ) से उन्हें यह महसूस कराते हैं कि ग्रूमर से उनका एक भरोसेमंद और स्नेहपूर्ण रिश्ता है .बच्चे को शायद इस बात का एहसास न हो कि उसके साथ आगे कुछ गलत होने वाला है . क्योंकि ग्रूमर भोले भाले शिकार का फायदा उठाने के लिए अलग-अलग तरीके आजमाता है , शायद वह यह भी कहे कि वह आपका प्रेमी या प्रेमिका है . शिकार को गलतफहमी हो जाती है कि ग्रूमर ही उसका एकमात्र भला चाहने वाला व्यक्ति है और उसका सच्चा प्रेमी / प्रेमिका है . इसी मौके पर वह यौन संबंध बनाने की शुरुआत करता है . इसके साथ वह बच्चे को आपसी रिश्ते को गुप्त रखने के लिए भी ट्रेन करता है . अक्सर ग्रूमर उम्र में बड़ा, धनी या अधिक प्रभावशाली होता है , यह अंतर रिश्ते के उन पहलुओं में से एक है जो पीड़ित को भयभीत करता है और उसकी असुरक्षा को बढ़ाता है . अगर शिकार अनुचित रिश्ते की गोपनीयता नहीं रखना चाहता है तब उसे हिंसा , धमकाने की बात करता है , जैसे खुद बच्चे को या उसके निकट संबंधियों को अत्यधिक नुकसान पहुँचाने या जान जाने का खतरा .
3 . शिकार को अलग थलग करना - अलगाव धूर्त ग्रूमर की एक प्रचलित तकनीक है . ग्रूमर बच्चे और उनके प्रियजनों या देखभाल करने वालों के बीच खुद को एक अति आकर्षक और आदर्श व्यक्तित्व वाला बन कर के ऐसा पेश करता है कि परिणामस्वरूप शिकार अपने दोस्तों या परिवार के सदस्यों को उसकी तुलना में कम समझता है . बच्चे को उस पर इतना भरोसा हो जाता है कि उसे लगता है कि वही चालबाज शिकारी दुनिया में उसका एकमात्र हितैषी है . कभी शिकारी ग्रूमर मासूम को ड्रग का स्वाद चखा कर उसका आदि बना देता है और बच्चा ड्रग के लिए ग्रूमर के पास दोबारा / बार बार जाने के लिए मजबूर हो जाता है . यदि बच्चा उसके व्यवहार के प्रति कभी चिंता व्यक्त करता है तब ग्रूमर उसका मजाक उड़ाता है और लोगों के सामने नीचा दिखाता है .
4. यौन शोषण - इस स्टेज में ग्रूमर का पीड़ित ( अक्सर पीड़िता ) के प्रति दुर्व्यवहार का स्तर बहुत बढ़ जाता है - यौन शोषण या बलात्कार तक . कभी बच्चे को जबरन आपराधिक गतिविधि में भी शामिल होना पड़ता है , जैसे स्वयं या औरों के लिए ड्रग तस्करी . सम्भव है कि शिकार को लगे कि वह जो कर रहा है उसमें कोई दोष नजर नहीं आये या भविष्य में उसे इसका ज्यादा लाभ हो .
5. लास्ट स्टेज ग्रूमर का कंट्रोल कायम रखना - इतना कुछ होने के बाद ग्रूमर शिकार पर अपना नियंत्रण खोना नहीं चाहेगा . एक बार जब दुर्व्यवहार करने वाला मासूम पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तो उसका लक्ष्य उस नियंत्रण के स्तर को बनाए रखना होता है . ग्रूमर अपने दुष्कर्मों की गोपनीयता खोने के बदले भयंकर 'परिणामों का झांसा' देता है, बच्चे उसके करीबी और प्रियजनों या अन्य किसी को भी नुकसान पहुँचाने की धमकी देता है . कभी वह ऐसी स्थिति भी पैदा कर देता है जैसे कि मासूम शिकार के बिना वह जी नहीं सकता है और वह शराब या ड्रग लेने लगा है . भावनात्मक धमकियां जब नहीं काम करतीं हैं तब ग्रूमर अंतरंग फोटो वायरल करने की या हिंसा तक की धमकी देता है .
कैसे पता चलेगा कि उसकी ग्रूमिंग हो रही है - यह पता लगाना बहुत मुश्किल है कि कोई बहलाने-फुसलाने की कोशिश कर रहा है या नहीं . कुछ शुरुआती संकेत होते हैं – ऐसी बातें जिनसे यह समझने में मदद मिल सकती है कि उसके साथ गलत तरीके से व्यवहार हो रहा है सावधान रहना है जब - .
1 . कोई चाहता है कि तुम अपने 'रिश्ते' को दूसरों से गुप्त रखो .
2 . कोई रिश्ते' की शुरुआत में तुम्हारी बहुत ही निजी जानकारी रहा हो .
3 . कोई तुम से अकेले या गुप्त रूप से मिलना चाहता है
4 कोई अनजान कीमती गिफ्ट दे ,शराब या ड्रग आदि नशीली चीजों की बातें करे .
5 . कोई तुम को ऐसी बातें करने या कहने के लिए कहता है जिनसे तुम को शर्मिंदगी /असहजता महसूस हो , जैसे तुम्हारा निजी यौन क्रिया / अनुभव पूछे , अश्लील फोटो शेयर करना चाहता है .
6 . कोई तुम से कैमरा ऑन करवा के गुप्त चीजें देखना / दिखाना चाहता है
7 . कभी ऐसा लगता है कि कोई तुम्हारी कुछ ऐसी बातें पहले से ही जानता है जो तुमने उसे कभी नहीं बताई है .
उपरोक्त से पता चलता है कि कोई तुम्हें बहलाने-फुसलाने की कोशिश कर रहा है, भले ही तुम उन्हें अपना प्रेमी/प्रेमिका मानते हो . यदि इनमें से किसी भी प्रश्न का उत्तर हाँ है, तो यह जरूरी है कि तुम घर में किसी बड़ों से / भरोसेमंद दोस्त से बात करो . अगर तुमको ठीक नहीं लग रहा है तो उसकी नीयत ठीक नहीं है और तुम्हें तत्काल उसे ना कहना चाहिए . यदि कोई यौन संबंध बनाने के लिए तुम्हें मजबूर करने का प्रयास करता है तो वह गलत कर रहा है और उसे पकड़वा कर पुलिस के हवाले करना चाहिए .
यदि बच्चा / किशोर किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने का निर्णय लेता हैं जिसे वह ऑनलाइन जानता है तो भी कुछ जरूरी बातें हैं जिनका पालन करना चाहिए -
किसी ऐसे वयस्क व्यक्ति को बताओ जिस पर तुम भरोसा हो हैं ( कोई शिक्षक, परिवार का सदस्य, दोस्त , कुलीग आदि ) . अपने भरोसेमंद को बताओ कि तुम जिस व्यक्ति से मिल रहे हो , वह कौन है और कब और कहाँ मिल रहे हो . किसी सार्वजनिक स्थान पर मिलने की व्यवस्था करो और अपने साथ दो या दो से अधिक मित्र या एक भरोसेमंद वयस्क व्यक्ति अवश्य लाओ . अगर ऑनलाइन माध्यम से यौन शोषण हुआ है तो आपको पुलिस की वेबसाइट या अन्य साइबर फोरम पर भी इसकी रिपोर्ट करनी चाहिए .
भारत में नियम - The Journal of Indian Law and Society के अनुसार फिलहाल, किसी भी कानून में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण को मान्यता देता हो और उस पर रोक लगाता हो . भारत में, बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण से बचाने के लिए प्रमुख कानून बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम, पीओसीएसओ अधिनियम भारतीय दंड संहिता ( POCSO )और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, आईटी अधिनियम मामले ( डिजिटल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट ) और सोशल मीडिया के कानूनों के आधार पर व अन्य पूरक कानूनों के रूप में इनका उपयोग किया जाता है . इन नियमों को स्पष्ट और कठोर बनाने की दिशा में प्रयास जारी है .
निष्कर्ष
बच्चों का ऑनलाइन शोषण एक गंभीर समस्या है जिस पर विधायकों और आम जनता दोनों का ध्यान देना आवश्यक है . इस समस्या से निपटने के लिए, राज्यसभा समिति की रिपोर्ट के सुझावों को अपनाना और कानून में संशोधन करके ऑनलाइन शोषण को एक स्पष्ट प्रावधान के रूप में शामिल करना आवश्यक है . इसके साथ ही, डिजिटल साक्षरता, बच्चों और अन्य हितधारकों को ऑनलाइन शोषण के बारे में शिक्षित करना भी जरूरी है ताकि बच्चे ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित रूप से रह सकें। इसके अलावा, उचित विधायी हस्तक्षेप के साथ-साथ, शिक्षकों और पुलिस अधिकारियों के लिए लैंगिक संवेदनशीलता प्रशिक्षण और बच्चों के ऑनलाइन शोषण को पहचानने के लिए जागरूकता अभियान जैसी सहायक नीतियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए .
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