Railway service: Some memories, some stories – five in Hindi Anything by Kishanlal Sharma books and stories PDF | रेल सेवा कुछ यादें, कुछ किस्से--पांच

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रेल सेवा कुछ यादें, कुछ किस्से--पांच

और 
तीन दिन मैं रिटायरिंग रुम में रुका।फिर मैंने चौबेजी से कहा,"किराए पर कमरा दिला दो
और फिर उन्होंने राम करण से कहा। उसने मेरे लिए रावली में कमरा देखा। उस समय उसका किराया पच्चीस रुपए महीना था। और यह कमरा रावली में था। यहां से आगरा फोर्ट मैं ड्यूटी परपैदल आ जा सकता था।
उस मकान में वैसे तो कई किरायेदार थे।लेकिन मेरे वाले पोर्शन में एक कमरे में एक बंगाली परिवार, एक में दलवीर सिंह रहते थे जो यू पी पुलिस में इंटेलिजेंस में सब इंस्पेक्टर थे और सामने रमेश जो पुलिस में सिपाही था। हम सब अकेले ही रहते थे। जब हम तीनों  शाम को घर पर होते तो बाते करते और देर तक बैठे रहते।
रमेश और में कई बार पिक्चर भी ह गए।
छोटी लाइन पार्सल में उस समय एक दलाल सक्सेनाएभी बैठते थे। वह मॉल बुक करने आने वाले व्यापारी का फॉर्म भरकर मॉल बुक कराते। उस समय में सबसे युवा था।
उन दिनों दिन में छोटी लाइन के क्लॉक रूम और पार्सल दोनों चलते थे। पर रात को एक ही बाबू दोनों जगह देखता।
छोटी लाइन पर रात दस बजे बाद कोई ट्रेन नहीं थी। बड़ी लाइन पर भी रात में सभी स्टाल बंद हो जाते थे। छोटी लाइन पर तारा की चाय की ट्रॉली थी। यह चौबीस घंटे खुलती थी। रात ड्यूटी में आगरा फोर्ट पर जो भी ⚕️ रहता अगर उसे चाय पीनी होती तो वह इसी स्टॉल पर आता। तारा दिन में स्टाल पर रहता था। रात को उसका नौकर स्टाल को समाहलता था। तारा देश के बटवारा के समय पाकिस्तान से भारत आया और फिर आगरा फोर्ट स्टेशन पर रेलवे टी स्टाल का ठेका ले लिया।
उन दिनों जब मैं इस स्टेशन पर आया स्टेशन अधीक्षक आर के वर्मा थे। मैने छोटी लाइन के पार्सल ऑफिस में काम किया था। और फिर जे एस सक्सेना का ट्रांसफर कोटा हो गया। और मुझे मीटर गेज बुकिंग भेज दिया गया।। उस समय छोटी लाइन बुकिंग में ओम दत्त मेहता इंचार्ज थे। वह मंझला कद काठी के तंदरुस्त इंसान थे। वह अंग्रेजी शासन में ब्रिटिश सरकार की तरफ से सेकंड वर्ल्ड वार में मिश्र गय थे। वहां से लौटने के बाद वह रेलवे में भर्ती हो गय और उनकी पोस्टिंग मुंबई में हुई थी। उनके पिताजी उस समय आगरा फोर्ट पर छोटी लाइन बुकिंग में इंचार्ज थे। बाद में ओम दत्त मेहता मुंबई से ट्रांसफर होकर ईदगाह स्टेशन आ गए। और पिता के रिटायर होने पर आगरा फोर्ट आ गए।
ओम दत्त मेहता मजदूर संघ के आगरा ब्रांच के सचिव भी थे।
उनकटस्वभाव सख्त था और उनको देखते ही अच्छे अच्छे घबरा जाते और उनके पास काम करने से लोग कतराते थे। और मुझे भी लोगो ने डरा दिया था। लेकिन नौकरी करनी थी तो जाना तो था ही। और मैं छोटी लाइन बुकिंग में चला गया।
उन दिनों वहां पर तीन खिड़की चलती थी। मेहताजी के अलावा वहां पर बाबू लाल झा, सरदार सिंह डोगरा, ओम प्रकाश मंगला, शांति लाल, धर्म पाल वर्मा, जगदीश शर्मा थे।
और उन दिनों यात्रा के साधन में ट्रेन महत्वपूर्ण थी और टिकट खूब बिकते थे । उन दिनों छोटी लाइन से छ ट्रेन चलती थी