शहर की हलचल से दूर, अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में बसा 'सुर-सदन' अपनी भव्यता और रहस्यमयी शांति के लिए जाना जाता था। यह बंगला सफेद संगमरमर से बना था, जो चांदनी रात में किसी भूतिया महल जैसा प्रतीत होता था। लेकिन आज की रात अलग थी। आज यहाँ संगीत नहीं, बल्कि मृत्यु का सन्नाटा पसरा था।
रात के ठीक तीन बजकर पंद्रह मिनट पर, जब पूरा शहर गहरी नींद में था, सुर-सदन के 'रियाज़ कक्ष' से एक ऐसी आवाज़ निकली जिसने आसपास के पेड़ों पर सो रहे पक्षियों को भी डराकर उड़ा दिया। वह कोई चीख नहीं थी, बल्कि एक बहुत ही ऊँची पिच वाली 'ध्वनि' थी—तीखी, चीरती हुई और असहनीय।
जब इंस्पेक्टर इशांक अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे, तो नजारा रूह कंपा देने वाला था। उस्ताद अलाउद्दीन खान, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत के जीवित स्तंभ माने जाते थे, अपने तानपुरे के बगल में गिरे हुए थे।
इशांक ने कमरे में कदम रखा और ठिठक गए। कमरा भीतर से पूरी तरह लॉक था। खिड़कियां तक सील थीं ताकि बाहर का शोर अंदर न आ सके। "यह एक परफेक्ट 'मर्डर इन ए क्लोज्ड रूम' (बंद कमरे का कत्ल) है," इशांक ने अपने सहायक को बताया।
उस्ताद के शव की स्थिति बहुत अजीब थी। उनके कानों से गाढ़ा खून बहकर उनके सफेद कुर्ते पर गिर चुका था। उनकी आँखें पूरी तरह खुली थीं, जैसे उन्होंने मौत के आखिरी क्षण में कुछ ऐसा देखा या सुना हो जो तर्क से परे था। मेज पर रखा पानी का गिलास आधा खाली था, लेकिन इशांक ने गौर किया कि पानी की सतह अब भी कंपन कर रही थी, जबकि कमरे में कोई पंखा या एसी चालू नहीं था।
"साहब, कोई संघर्ष के निशान नहीं हैं। कीमती सामान सब अपनी जगह पर है। अलमारी में रखे सोने के मेडल और कैश भी सुरक्षित हैं," हवलदार ने रिपोर्ट दी।
इशांक ने गहरी सांस ली। "यह चोरी के इरादे से किया गया कत्ल नहीं है। यह नफरत या किसी गहरे मकसद का नतीजा है।"
तभी दरवाजे पर एक छड़ी की 'टैप-टैप' सुनाई दी। विक्रमादित्य, शहर का सबसे मशहूर साउंड इंजीनियर, अंदर दाखिल हुआ। विक्रम जन्म से अंधा था, लेकिन उसके सुनने की क्षमता (Hearing Power) किसी राडार से कम नहीं थी। वह हवा के दबाव में आए मामूली बदलाव को भी महसूस कर सकता था।
"इशांक, रुक जाओ! वहां कदम मत रखना," विक्रम की भारी आवाज गूँजी।
"क्यों विक्रम? क्या तुम्हें कुछ मिला?" इशांक ने उत्सुकता से पूछा।
विक्रम ने अपनी छड़ी रोकी और सिर को थोड़ा तिरछा किया, जैसे वह कमरे की दीवारों से बातें कर रहा हो। "इस कमरे की ऊर्जा पूरी तरह बदल चुकी है। यहाँ 'सन्नाटा' नहीं है, बल्कि एक 'स्थिर गूँज' (Standing Wave) फंसी हुई है। उस्ताद की हत्या किसी हथियार से नहीं की गई है।"
विक्रम रेंगते हुए उस्ताद के शव के करीब गया। उसने अपनी उंगलियां उस्ताद के कान के पास रखीं और फिर फर्श को छुआ। "हृदय गति रुकने से मौत हुई है, लेकिन इसका कारण 'सोनिक शॉक' है। इशांक, यहाँ कोई ऐसी फ्रीक्वेंसी पैदा की गई थी जो मानव मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को तहस-नहस कर देती है। यह ध्वनि विज्ञान का क्रूरतम प्रयोग है।"
इशांक ने घर के सभी सदस्यों को हॉल में इकट्ठा किया। माहौल में भारी तनाव था।
दानिश खान: उस्ताद का इकलौता बेटा। वह आधुनिक पॉप संगीत का शौकीन था और अक्सर उस्ताद के साथ उसकी बहस होती थी। वह कर्ज में डूबा हुआ था और उसे उस्ताद की करोड़ों की संपत्ति और रॉयल्टी की सख्त जरूरत थी। उसकी आँखों में दुख कम और बेचैनी ज्यादा थी।
मीरा: उस्ताद की सबसे होनहार शिष्या। शहर में चर्चा थी कि वह उस्ताद के बाद उनके घराने की वारिस बनेगी। लेकिन हाल ही में उस्ताद ने उसे एक प्रतिष्ठित संगीत सभा में गाने से मना कर दिया था। मीरा के हाथ कांप रहे थे, और वह बार-बार अपनी तर्जनी उंगली को अंगूठे से रगड़ रही थी।
रहमत: उस्ताद का वफादार नौकर। वह पिछले ४० वर्षों से उस्ताद की छाया की तरह रहता था। उसके पास घर की हर चाबी थी। वह कोने में बैठकर रो रहा था, लेकिन उसकी रोने की आवाज़ में एक लय थी जो विक्रम को खटक रही थी।
इशांक ने सबसे पहले दानिश को घेरा। "दानिश, कल रात तुम कहाँ थे? गवाहों का कहना है कि शाम को तुम्हारी अपने पिता से तीखी बहस हुई थी।"
दानिश ने चिढ़कर जवाब दिया, "बहस तो रोज होती थी। वे पुराने खयालात के थे। वे मेरे म्यूजिक करियर को बर्बाद कर रहे थे। लेकिन मैं उन्हें मारूँगा नहीं, क्योंकि उनके मरने से मुझे वो 'संगीत सूत्र' कभी नहीं मिलेंगे जो उन्होंने तिजोरी में छुपा रखे हैं।"
विक्रम ने बीच में हस्तक्षेप किया। "दानिश, क्या तुमने कल रात कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस या एम्पलीफायर इस्तेमाल किया था? मैंने तुम्हारे कमरे से एक खास तरह की 'हिसिंग साउंड' (Hissing Sound) सुनी है।"
दानिश चुप हो गया। उसका चेहरा पसीने से भीग गया।
तभी मीरा बोली, "गुरुजी अपनी साधना में थे। वे 'राग भैरवी' के उस खोए हुए स्वर की तलाश कर रहे थे, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह इंसान को मोक्ष दिला सकता है। लेकिन कल रात उनकी साधना भंग हुई थी।"
विक्रम वापस रियाज़ कक्ष में गया। उसने दीवार के एक छोटे से छेद (Ventilation) को गौर से सुना। वहां से एक बहुत ही धीमी सीटी जैसी आवाज़ आ रही थी। उसने अपनी छड़ी से वहां चोट की, और एक छोटा सा 'अल्ट्रासोनिक ट्रांसड्यूसर' नीचे गिरा।
"यह रहा कातिल का हथियार," विक्रम ने गंभीर स्वर में कहा। "इशांक, यह कोई साधारण संगीत घराना नहीं है। यहाँ कला की आड़ में मौत का खेल खेला गया है। इस मशीन ने उस्ताद के रियाज़ के दौरान उस स्वर को 'एम्पलीफाई' (Amplified) किया जिसने उनकी नसों को फाड़ दिया।"
जैसे ही विक्रम ने उस यंत्र को छुआ, घर की लाइटें अचानक बंद हो गईं। अँधेरे में एक परछाईं तेजी से विक्रम की ओर झपटी। इशांक चिल्लाया—"विक्रम, हटो!"
अंधेरे में एक संघर्ष हुआ। जब इशांक ने अपनी टॉर्च जलाई, तो वह हमलावर गायब था, लेकिन फर्श पर एक 'संगीत का घुँघरू' गिरा हुआ था। क्या वह मीरा का था? या रहमत का? या दानिश उसे फंसाने के लिए वहां छोड़ गया था?
रहस्य की पहली परत खुल चुकी थी। उस्ताद की मौत महज एक हादसा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित 'सोनिक मर्डर' था।
यह कहानी का दूसरा अध्याय है, जहाँ इंस्पेक्टर इशांक और विक्रमादित्य उस अदृश्य कातिल के पदचिह्नों का पीछा करते हैं, जो आवाजों के पीछे छिपा है।
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सुर-सदन की बिजली वापस आ चुकी थी, लेकिन उस चंद मिनटों के अंधेरे ने सबके दिलों में खौफ भर दिया था। फर्श पर गिरा वह पीतल का घुँघरू अब पुलिस की साक्ष्य थैली में बंद था। इंस्पेक्टर इशांक ने उस छोटे से 'अल्ट्रासोनिक ट्रांसड्यूसर' को हाथ में लिया, जो किसी भविष्य के हथियार जैसा लग रहा था।
"विक्रम, तुमने कहा था कि यह यंत्र उस्ताद की मौत की वजह है," इशांक ने कमरे की ओर देखते हुए पूछा। "पर इसे यहाँ लगाया किसने? और सबसे महत्वपूर्ण बात, इसे चलाया किसने?"
विक्रम कमरे के उस कोने में खड़ा था जहाँ से दीवार की गूँज सबसे साफ सुनाई देती थी। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। "इशांक, यह यंत्र अपने आप में कुछ नहीं है। इसे एक खास 'सिग्नल' की जरूरत होती है। किसी ने उस्ताद के तानपुरे की फ्रीक्वेंसी को इस मशीन के साथ सिंक (Sync) किया था। जैसे ही उस्ताद ने राग भैरवी का वह 'खास कोमल ऋषभ' छेड़ा, कमरे के अंदर की ध्वनि एक चक्रवात में बदल गई।"
मयूर ने सबसे पहले मीरा को पूछताछ के कमरे में बुलाया। मीरा का चेहरा पीला पड़ चुका था और उसकी नज़रें बार-बार फर्श की ओर झुक रही थीं।
"मीरा, यह घुँघरू जो हमें मिला, यह काफी पुराना है। सुर-सदन में केवल तुम ही हो जो शास्त्रीय नृत्य और गायन दोनों का रियाज़ करती हो। क्या यह तुम्हारा है?" इशांक ने कड़ाई से पूछा।
मीरा के होंठ कांपे। "साहब... वह मेरा हो सकता है, लेकिन मैं कल रात वहां नहीं थी। मैं... मैं लाइब्रेरी में थी।"
"पुस्तकालय में रात के तीन बजे?" विक्रम ने बीच में टोकते हुए कहा। "तुम्हारी चाल में एक थकावट है मीरा, जैसे तुम घंटों से कुछ ढूंढ रही हो। क्या वह 'गंधार-विनाश' नाम का प्राचीन ग्रंथ है?"
मीरा ने चौंककर विक्रम की ओर देखा। "आपको कैसे पता?"
"तुम्हारे हाथों से पुरानी पांडुलिपियों की और चमेली के तेल की खुशबू आ रही है," विक्रम ने अपनी तीक्ष्ण घ्राण शक्ति का प्रमाण दिया। "वह ग्रंथ कहता है कि संगीत के कुछ स्वर अगर गलत तरीके से दोहराए जाएं, तो वे शरीर के अंगों को भीतर से गला सकते हैं। क्या उस्ताद तुम्हें वह ग्रंथ नहीं छूने दे रहे थे?"
मीरा फूट-फूट कर रोने लगी। उसने बताया कि उस्ताद उस ग्रंथ के प्रयोगों से डरे हुए थे। वे जानते थे कि रागों का गलत इस्तेमाल विनाशकारी हो सकता है। "कल रात मैंने लाइब्रेरी में देखा कि उस ग्रंथ के कुछ पन्ने फटे हुए थे। किसी ने उस 'विनाशकारी फ्रीक्वेंसी' की गणना चुरा ली थी।"
इशांक ने अगला निशाना दानिश को बनाया। दानिश के कमरे की तलाशी में कई हाई-एंड ऑडियो सॉफ्टवेयर और साउंड सिंथेसाइज़र मिले।
"दानिश, तुम पॉप म्यूजिक बनाते हो, लेकिन तुम्हारे कंप्यूटर में 'सोनिक वेपनरी' के फोल्डर क्या कर रहे हैं?" इशांक ने उसके कंप्यूटर की स्क्रीन दिखाते हुए पूछा।
दानिश ने हकलाते हुए कहा, "वो... वो बस मेरी रिसर्च थी। मैं म्यूजिक में नए साउंड्स इस्तेमाल करना चाहता था। मुझे कर्ज चुकाना है, इंस्पेक्टर! अगर मैं कोई ऐसा नया साउंड पैटर्न खोज लेता जो पूरी दुनिया में हिट हो जाता, तो मेरी सारी मुश्किलें हल हो जातीं। पर मैंने पिता जी को नहीं मारा!"
विक्रम दानिश के स्टूडियो के स्पीकर के पास गया। उसने स्पीकर पर हल्का हाथ फेरा। "इशांक, दानिश के पास तकनीक है, लेकिन संगीत की वह बारीक समझ नहीं है जो इस कत्ल के लिए चाहिए। इस कत्ल को करने वाले को यह पता होना चाहिए था कि उस्ताद किस क्षण, किस पिच पर अपना स्वर लगाएंगे।"
तभी हवलदार ने अंदर आकर एक और चौंकाने वाली खबर दी। उस्ताद का वफादार नौकर रहमत गायब था। उसके कमरे की तलाशी ली गई तो वहां एक पुराना ट्रांजिस्टर रेडियो मिला, जो एक खास स्टेशन पर ट्यून था, जहाँ से केवल स्थिर शोर (Static Noise) आ रहा था।
विक्रम ने उस शोर को सुना और उसका चेहरा गंभीर हो गया। "यह शोर नहीं है, इशांक। यह एक 'कोडेड सिग्नल' है। किसी ने रहमत को एक डमी (Dummy) की तरह इस्तेमाल किया है।"
वे तुरंत रहमत की तलाश में घर के पिछले हिस्से में स्थित बगीचे की ओर भागे। वहां पुराने कुएं के पास रहमत की लाश मिली। उसकी मौत भी ठीक उसी तरह हुई थी जैसे उस्ताद की—कानों से खून और चेहरे पर खौफ।
"हत्यारा गवाहों को खत्म कर रहा है," इशांक ने अपनी रिवॉल्वर निकालते हुए कहा। "रहमत ने शायद कातिल को वह यंत्र लगाते हुए देख लिया था।"
विक्रम ने रहमत के पास गिरे हुए ट्रांजिस्टर को उठाया। अचानक, वह ट्रांजिस्टर अपने आप बजने लगा। उसमें से एक बहुत ही पतली और तीखी सीटी जैसी आवाज निकलने लगी।
"इशांक! सबको यहाँ से हटाओ!" विक्रम चिल्लाया। "यह एक 'ट्रिगर' है!"
जैसे ही वे पीछे हटे, वह ट्रांजिस्टर एक छोटे धमाके के साथ फट गया। विक्रम को धक्का लगा और वह गिर पड़ा। अंधेरे में झाड़ियों के पीछे से किसी के भागने की आहट सुनाई दी। इशांक ने पीछा किया, लेकिन वह साया एक बार फिर अंधेरे में विलीन हो गया।
विक्रम फर्श पर बैठा अपनी सांसें काबू कर रहा था। "इशांक, कातिल कोई बाहरी नहीं है। वह संगीत की बारीकियों को विज्ञान की क्रूरता के साथ मिला रहा है। उसने राग भैरवी के उस कोमल स्वर को एक 'मौत की चाबी' बना दिया है।"
"लेकिन वह कौन है?" इशांक ने हताशा में पूछा।
विक्रम ने हाथ बढ़ाकर फर्श से एक छोटा सा टुकड़ा उठाया जो धमाके के बाद वहां गिरा था। वह एक 'ट्यूनिंग फोर्किंग' (Tuning Fork) का हिस्सा था, जिस पर एक विशेष संगीत अकादमी का निशान बना था।
"अगला सुराग उस अकादमी में छिपा है," विक्रम ने कहा। "कातिल ने अपनी अगली फ्रीक्वेंसी सेट कर दी है, और अगला निशाना शायद मैं या तुम हो।"
रहस्य अब गहरा चुका था। संगीत की पावन दुनिया में एक ऐसा हत्यारा घूम रहा था जो अदृश्य था, जिसकी आवाज ही उसका हथियार थी।
यह कहानी का तीसरा अध्याय है, जहाँ रहस्यों की प्रतिध्वनि और भी डरावनी हो जाती है और विक्रमादित्य को समझ आता है कि यह लड़ाई केवल सबूतों की नहीं, बल्कि सुनने की क्षमता की भी है।
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'सुर-सदन' अब एक अभिशप्त महल जैसा लगने लगा था। रहमत की मौत ने इस केस को और भी पेचीदा बना दिया था। इंस्पेक्टर इशांक ने बगीचे को चारों तरफ से सील कर दिया था, लेकिन विक्रमादित्य अभी भी उस फटे हुए ट्रांजिस्टर के अवशेषों के पास बैठा था। उसकी उंगलियाँ जमीन पर बिखरे कांच और धातु के टुकड़ों को टटोल रही थीं।
"साहब, रहमत की जेब से यह मिला है," हवलदार शिंदे ने एक छोटा सा भीगा हुआ कागज इशांक को थमाया। उस पर केवल एक अंक लिखा था: "440Hz"।
इशांक ने विक्रम की ओर देखा। "440 हर्ट्ज़? इसका क्या मतलब है विक्रम?"
विक्रम ने उस 'ट्यूनिंग फोर्क' के टुकड़े को अपने कान के पास लाकर हल्के से थपथपाया। "यह संगीत की दुनिया का मानक 'पिच' है, इशांक। इसे 'A4' नोट कहते हैं। पूरी दुनिया का संगीत इसी फ्रीक्वेंसी पर टिका है। लेकिन उस्ताद अलाउद्दीन खान इस मानक के विरोधी थे। वे प्राचीन भारतीय पद्धति के अनुसार 432Hz पर रियाज़ करते थे। उनका मानना था कि 432 हर्ट्ज़ ब्रह्मांड की प्राकृतिक लय है, जबकि 440 हर्ट्ज़ इंसानी दिमाग में तनाव और आक्रामकता पैदा करती है।"
विक्रम के सुझाव पर इशांक उसे शहर की सबसे प्रतिष्ठित 'नाद-ब्रह्म अकादमी' ले गया। यह वही जगह थी जिसका निशान उस ट्यूनिंग फोर्क पर मिला था। अकादमी की इमारत आधुनिक थी, जहाँ साउंड-प्रूफिंग के लिए दुनिया की सबसे महँगी तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।
अकादमी के डायरेक्टर, डॉक्टर आर्यन, एक ठंडे स्वभाव के व्यक्ति थे। जब इशांक ने उन्हें उस्ताद की मौत की खबर दी, तो उनके चेहरे पर दुख के बजाय एक अजीब सी उत्सुकता थी।
"डॉक्टर आर्यन," इशांक ने तीखे स्वर में कहा, "हमें आपकी अकादमी का एक उपकरण घटनास्थल पर मिला है। उस्ताद की हत्या 'सोनिक वेपन' से हुई है। क्या आपकी अकादमी में ऐसी किसी तकनीक पर शोध हो रहा है?"
आर्यन ने एक फीकी मुस्कान दी। "इंस्पेक्टर, हम यहाँ ध्वनि से उपचार (Sound Healing) पर शोध करते हैं। लेकिन हाँ, ध्वनि का एक काला पक्ष भी है। अगर आप 'इनफ्रासाउंड' (Infrasound) का इस्तेमाल करें—ऐसी आवाजें जिन्हें कान सुन नहीं सकते लेकिन शरीर महसूस करता है—तो आप किसी भी इंसान के अंगों को फेल कर सकते हैं। पर हमारे यहाँ से कोई भी उपकरण बाहर नहीं गया है।"
विक्रम, जो अब तक खामोश था, अचानक खड़ा हो गया। वह दीवार की ओर बढ़ा और अपना कान दीवार से सटा दिया। "डॉक्टर, आपके इस केबिन के पीछे एक गुप्त कक्ष है, है ना? वहां से एक बहुत ही धीमी 'पल्स' (Pulse) आ रही है।"
डॉक्टर आर्यन के माथे पर पसीना आ गया। "वह... वह बस हमारा सर्वर रूम है।"
"झूठ!" विक्रम चिल्लाया। "वह सर्वर की आवाज नहीं है। वह एक 'अल्ट्रासोनिक ऑसिलेटर' है जिसे बहुत ही सावधानी से छिपाया गया है।"
इशांक ने बिना देर किए उस दीवार को धक्का दिया। वहां एक छोटा सा दरवाजा था जो एक अत्याधुनिक लैब में खुलता था। लैब के अंदर दर्जनों स्क्रीन पर मानव मस्तिष्क की तरंगें (Brain Waves) चल रही थीं। वहां एक डेटा फाइल खुली थी जिसका शीर्षक था: "प्रोजेक्ट भैरवी: द किलर फ्रीक्वेंसी"।
उस फाइल में उस्ताद के रियाज़ की गुप्त रिकॉर्डिंग्स थीं। किसी ने वर्षों तक उस्ताद की हर सांस, उनके हर स्वर की तीव्रता और उनके दिल की धड़कन का डेटा इकट्ठा किया था।
"यह किसने किया?" इशांक ने डॉक्टर आर्यन का कॉलर पकड़ते हुए पूछा।
"मैंने नहीं किया!" आर्यन कांपते हुए बोला। "यह डेटा मीरा और दानिश ने हमें बेचा था। दानिश को पैसे चाहिए थे और मीरा को वह 'परफेक्ट पिच' जिसे उस्ताद ने कभी उसे नहीं सिखाया। वे दोनों यहाँ अक्सर आते थे।"
विक्रम ने हेडफोन लगाए और उस डेटा को सुनने लगा। अचानक उसने हेडफोन फेंक दिए। "इशांक, यहाँ से निकलो! अभी!"
"क्या हुआ?"
"कातिल ने इस पूरी लैब को एक 'एकॉस्टिक बम' (Acoustic Bomb) में बदल दिया है। वह हमें यहीं खत्म करना चाहता है!"
जैसे ही वे लैब से बाहर भागे, पूरी इमारत में एक असहनीय चीख जैसी आवाज गूँजने लगी। कांच के झूमर टूटने लगे और इशांक को महसूस हुआ जैसे उसका सिर फटने वाला है। यह वही आवाज थी जिसने उस्ताद की जान ली थी।
अंधेरे गलियारे में भागते हुए, विक्रम ने इशांक का हाथ पकड़ा। "दीवार के सहारे चलो! अपनी आँखें और कान बंद मत करो, वरना तुम्हारा संतुलन बिगड़ जाएगा!"
तभी सीढ़ियों के पास उन्हें मीरा मिली। वह फर्श पर तड़प रही थी। उसके कान और नाक से खून बह रहा था।
"मीरा!" इशांक उसकी ओर झपटा।
मीरा ने मरते हुए इशांक का हाथ पकड़ा और लड़खड़ाती आवाज में कहा, "वह... वह संगीत नहीं चाहता था... उसे 'सत्ता' चाहिए थी... उसने सबको धोखा दिया... अलमारी के पीछे... असली रिकॉर्डिंग..."
मीरा की सांसें थम गईं। वह इस खूनी राग की दूसरी गवाह थी जो अब हमेशा के लिए खामोश हो गई थी।
विक्रम और इशांक किसी तरह अकादमी से बाहर निकले। बाहर की ठंडी हवा ने उन्हें थोड़ी राहत दी।
"दानिश कहाँ है?" इशांक ने अपनी टीम को वायरलेस पर संदेश भेजा।
"साहब, दानिश अपनी कार लेकर 'सुर-सदन' की ओर भागा है," जवाब आया।
विक्रम ने अपना सिर पकड़ा। "इशांक, दानिश कातिल नहीं है। वह केवल एक मोहरा है। कातिल वह है जो उस्ताद की उस 'अंतिम राग' को हासिल करना चाहता है जिससे वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों को अपने वश में कर सके। वह राग एक हथियार है।"
"तो फिर कातिल कौन है?" इशांक ने पूछा।
विक्रम ने अपनी छड़ी को जोर से जमीन पर पटका। "कातिल वह है जिसने कल रात मेरे ऊपर हमला किया था। उसकी चाल में एक खास लय थी... एक ऐसी लय जो केवल एक मंझा हुआ 'तबलची' या 'साउंड मास्टर' ही रख सकता है। और मीरा ने मरते वक्त जिस 'अलमारी' का जिक्र किया, वह उस्ताद के उसी कमरे में है जहाँ कत्ल हुआ था।"
रहस्य अब अपने आखिरी पड़ाव पर था। कातिल ने अपनी अंतिम फ्रीक्वेंसी सेट कर दी थी। वह उस्ताद के घर में उस आखिरी राज को मिटाने जा रहा था।
यह इस कहानी का अंतिम और निर्णायक अध्याय है, जहाँ सुरों का न्याय होगा और विज्ञान की क्रूरता परास्त होगी।
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'सुर-सदन' अब एक अभिशप्त किले जैसा लग रहा था। आसमान में बिजली कड़क रही थी, जिसकी रोशनी में सफेद संगमरमर का वह बंगला कभी चमक उठता तो कभी अंधेरे में डूब जाता। इंस्पेक्टर इशांक और विक्रमादित्य अपनी जीप से उतरे। पुलिस की गाड़ियाँ पीछे रह गई थीं क्योंकि सड़क पर बड़े पेड़ गिर जाने से रास्ता बंद हो गया था।
"साहब, अंदर से संगीत की आवाज आ रही है," इशांक ने अपनी रिवॉल्वर निकालते हुए फुसफुसाकर कहा।
विक्रम ने हवा में हाथ उठाकर उसे रुकने का इशारा किया। उसने अपना सिर थोड़ा टेढ़ा किया। "यह संगीत नहीं है, इशांक। यह 'राग भैरवी' का वह वर्जित स्वर है जिसे उस्ताद ने कभी किसी को नहीं सिखाया। कातिल ने उस्ताद की पुरानी रिकॉर्डिंग्स को सॉफ्टवेयर की मदद से जोड़कर वह 'किलर फ्रीक्वेंसी' (Killer Frequency) तैयार कर ली है। अगर हम अंदर गए, तो हमारे दिल की धड़कनें उस आवाज के साथ तालमेल बिठा लेंगी और हमारा शरीर जवाब दे देगा।"
जैसे ही वे रियाज़ कक्ष के पास पहुँचे, दरवाजा पहले से ही खुला था। अंदर दानिश फर्श पर बेहोश पड़ा था, उसके कान से हल्का खून बह रहा था। कमरे के बीचों-बीच रखे ऊँचे स्टैंड पर एक आधुनिक साउंड एम्पलीफायर और एक बड़ा स्पीकर रखा था, जिससे वह घातक आवाज़ गूँज रही थी।
स्पीकर के पीछे एक शख्स खड़ा था, जिसका चेहरा अभी भी अंधेरे में था।
"बहुत देर कर दी, इंस्पेक्टर," एक ठंडी और परिचित आवाज़ गूँजी। वह शख्स रोशनी में आया। वह कोई और नहीं, बल्कि डॉक्टर आर्यन था, लेकिन उसके हाथ में एक छोटा रिमोट कंट्रोल था।
इशांक चौंक गया। "डॉक्टर आर्यन? लेकिन आपने तो कहा था कि आप केवल शोध कर रहे हैं!"
"शोध?" आर्यन पागलों की तरह हंसा। "उस्ताद अलाउद्दीन खान के पास वह प्राचीन विद्या थी जो ध्वनियों से इंसान के दिमाग को कंट्रोल कर सकती थी। वे इसे 'ब्रह्म-नाद' कहते थे। मैंने सालों तक उनके पास बैठकर इसे सीखने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मुझे हमेशा ठुकरा दिया। उन्हें लगता था कि मैं इसका गलत इस्तेमाल करूँगा। और उन्होंने सही सोचा था!"
विक्रम ने दीवार का सहारा लिया। उसकी साँसें तेज हो रही थीं। "डॉक्टर, तुमने रहमत और मीरा को क्यों मारा? वे तो निर्दोष थे।"
"रहमत ने मुझे वह डिवाइस लगाते देख लिया था," आर्यन ने नफरत से कहा। "और मीरा? वह उस ग्रंथ को डिकोड करने के करीब पहुँच गई थी। मुझे वह 'अंतिम स्वर' चाहिए था जिसे पाकर मैं किसी भी व्यक्ति को, किसी भी सेना को, बिना हथियार उठाए घुटनों पर ला सकता हूँ। और अब, वह मेरे पास है।"
अचानक आर्यन ने रिमोट का बटन दबाया। कमरे में गूँज रही आवाज़ की पिच (Pitch) अचानक बढ़ गई। इशांक को लगा जैसे उसकी हड्डियों के अंदर कोई ड्रिल मशीन चल रही हो। वह घुटनों के बल गिर पड़ा और उसकी रिवॉल्वर हाथ से छूट गई।
"विक्रम!" इशांक चिल्लाया, लेकिन उसकी आवाज़ उसके गले में ही दब गई।
विक्रम, जो अंधा था, उसका मस्तिष्क आवाज़ों के प्रति अधिक अनुकूलित था। उसने अपने कान बंद करने के बजाय अपनी जेब से वही 'ट्यूनिंग फोर्क' (Tuning Fork) निकाला जो उसे अकादमी में मिला था।
"आर्यन!" विक्रम दहाड़ा। "तुमने विज्ञान सीखा है, लेकिन तुमने संगीत की आत्मा को नहीं समझा। हर आवाज़ का एक 'एंटी-डॉट' (Anti-dote) होता है। अगर मैं इस कमरे की फ्रीक्वेंसी को बदल दूँ, तो तुम्हारा यह घातक यंत्र सिर्फ एक खिलौना रह जाएगा!"
विक्रम ने अपनी छड़ी से फर्श पर एक खास लय में प्रहार करना शुरू किया— ठक, ठक-ठक, ठक...। साथ ही उसने उस ट्यूनिंग फोर्क को एक तांबे के बर्तन पर मारा।
कमरे में दो आवाज़ों के बीच युद्ध शुरू हो गया। एक तरफ आर्यन की कृत्रिम और घातक डिजिटल आवाज़ थी, और दूसरी तरफ विक्रम का प्राकृतिक और सटीक कंपन।
"असंभव!" आर्यन चिल्लाया। "तुम मेरी फ्रीक्वेंसी को नहीं काट सकते!"
"मैं इसे काट नहीं रहा हूँ," विक्रम ने पसीने से लथपथ होते हुए कहा, "मैं इसे 'कैंसल' (Phase Cancellation) कर रहा हूँ!"
विक्रम ने एक ऊँचा स्वर लगाया—एक ऐसा स्वर जो सीधा उस्ताद की शिक्षाओं से आया था। अचानक, कमरे के कांच के झरोखे एक साथ टूटकर बिखर गए। वह एम्पलीफायर धुएं के साथ जल उठा और स्पीकर से आने वाली आवाज़ एक भयानक चीख के साथ शांत हो गई।
सन्नाटा छा गया। डॉक्टर आर्यन उस जले हुए यंत्र को देख रहा था, जैसे उसकी पूरी दुनिया उजड़ गई हो। इशांक ने फुर्ती से उठकर उसे दबोच लिया और हथकड़ी पहना दी।
"तुम्हारा खेल खत्म हुआ, डॉक्टर," इशांक ने हाँफते हुए कहा। "संगीत जीवन देने के लिए होता है, जान लेने के लिए नहीं।"
दानिश धीरे-धीरे होश में आ रहा था। उसने विक्रम की ओर देखा और उसकी आँखों में पश्चाताप था। "मुझे माफ कर दीजिये... मैंने पैसे के लालच में डॉक्टर आर्यन को पिता जी की गुप्त रिकॉर्डिंग्स दी थीं। मुझे नहीं पता था कि वह कातिल है।"
विक्रम ने अपना हाथ दानिश के कंधे पर रखा। "तुमने अपने पिता की कला को नहीं समझा, दानिश। लेकिन आज उनके ही सिखाए एक छोटे से सुर ने तुम्हारी और हमारी जान बचाई है।"
अगली सुबह, जब पुलिस आर्यन को ले जा रही थी, विक्रम उस्ताद के रियाज़ वाले कमरे की दहलीज पर खड़ा था। कमरे की हवा अब शुद्ध और शांत थी।
"इशांक," विक्रम ने कहा, "उस्ताद की वह प्राचीन डायरी और ग्रंथ सुरक्षित हैं। उन्हें अब किसी म्यूजियम में नहीं, बल्कि ऐसी जगह होना चाहिए जहाँ कोई उन्हें फिर से हथियार न बना सके।"
इशांक ने सिर हिलाया। "मैं समझ गया, मित्र। यह केस आज बंद होता है, लेकिन राग भैरवी की वह गूँज हमेशा याद रहेगी।"
विक्रम अपनी सफेद छड़ी के साथ 'सुर-सदन' से बाहर निकला। बारिश थम चुकी थी और पक्षियों का चहचहाना फिर से सुनाई दे रहा था—एक ऐसी ध्वनि, जिसमें कोई मौत नहीं, सिर्फ जीवन था।