Positron–orbit–energy stability theory in Hindi Science by Prabhjot Singh Nagra books and stories PDF | पॉज़िट्रॉन–कक्षा–ऊर्जा स्थायित्व सिद्धांत

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पॉज़िट्रॉन–कक्षा–ऊर्जा स्थायित्व सिद्धांत

पॉज़िट्रॉन–कक्षा–ऊर्जा स्थायित्व सिद्धांत

(Positron Orbital–Energy Persistence Theory)

1. प्रस्तावना

आधुनिक भौतिकी में इलेक्ट्रॉन–पॉज़िट्रॉन टक्कर को प्रायः annihilation कहा जाता है। इस सिद्धांत में एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है, जिसके अनुसार पॉज़िट्रॉन का वास्तविक नाश नहीं होता, बल्कि वह अपनी कक्षा (orbital/अवस्था-स्थान) बदलता है और उसकी ऊर्जा तरंग (wave) के रूप में प्रकट होती है। इस प्रकार ऊर्जा संरक्षण नियम पूर्ण रूप से बना रहता है और कण का अस्तित्व स्थिर माना जाता है।

2. सिद्धांत के मूल कथन (Core Statements)

पॉज़िट्रॉन न तो उत्पन्न होता है और न ही नष्ट होता है।

पॉज़िट्रॉन की कुल ऊर्जा समय के साथ स्थिर रहती है।

इलेक्ट्रॉन से टकराव पर पॉज़िट्रॉन केवल कक्षा बदलता है।

देखी जाने वाली gamma rays कण नहीं, बल्कि ऊर्जा तरंगें हैं।

परमाणु तथा निर्वात—दोनों स्थितियों में यह नियम लागू होता है।

3. मूल मान्यताएँ (Postulates)

3.1 अस्तित्व स्थायित्व मान्यता

यदि किसी समय t पर पॉज़िट्रॉन P मौजूद है, तो:

P(t) = P₀

अर्थात् पॉज़िट्रॉन का अस्तित्व अपरिवर्तित रहता है।

3.2 ऊर्जा संरक्षण मान्यता

Eₚ = स्थिर (constant)

पॉज़िट्रॉन की कुल ऊर्जा नष्ट नहीं होती, केवल रूप बदलती है।

4. कक्षा परिवर्तन मॉडल (Orbital Transition Model)

मान लें परमाणु या क्षेत्र में पॉज़िट्रॉन की दो कक्षाएँ हैं:

पहली कक्षा: K₁

दूसरी कक्षा: K₂

इलेक्ट्रॉन से टकराव पर:

P(K₁) + e⁻ → P(K₂) + γ

यहाँ γ ऊर्जा तरंग (gamma ray) है।

इस प्रक्रिया में:

पॉज़िट्रॉन K₁ से हटकर K₂ में चला जाता है।

ऊर्जा तरंग बाहर निकलती है।

इस कारण प्रेक्षक को लगता है कि पॉज़िट्रॉन समाप्त हो गया।

5. कक्षाओं की ऊर्जा समानता

इस सिद्धांत के अनुसार:

E(K₁) = E(K₂)

अर्थात् कक्षा बदलने पर ऊर्जा स्तर में कोई शुद्ध अंतर नहीं आता। केवल स्थानिक अवस्था बदलती है।

6. सतत कक्षा-दोलन (Orbital Oscillation)

लगातार इलेक्ट्रॉन–पॉज़िट्रॉन टकराव होने पर:

P(K₁) ⇌ P(K₂)

यह दोलन बहुत अल्प समय में होता है:

Δt ≈ 10⁻⁴ से 10⁻³ सेकंड

इस तीव्र परिवर्तन के कारण पॉज़िट्रॉन प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देता।

6A. पथ-परिवर्तन एवं अवशेष पथ (Trajectory Change & Residual Track)

इस सिद्धांत के अनुसार पॉज़िट्रॉन टक्कर के बाद दिशा/पथ (trajectory) बदलता है और पहले पथ का एक अवशेष संकेत (residual track) छोड़ सकता है।

टक्कर के क्षण पर:

P(v₁) + e⁻ → P(v₂) + γ

जहाँ v₁ ≠ v₂

पथ-वक्रता (curvature) का परिवर्तन:

κ ∝ qB / p

यहाँ q आवेश, B चुंबकीय क्षेत्र और p संवेग है। कक्षा/दिशा बदलने से p की दिशा बदलती है, जिससे वक्रता बदलती दिखती है।

डिटेक्टर में दिखने वाला संकेत:

दिखी हुई gamma तरंगें ऊर्जा उत्सर्जन का संकेत हैं, जबकि अचानक पथ-मोड़ पॉज़िट्रॉन के कक्षा/दिशा परिवर्तन का अप्रत्यक्ष प्रमाण माना जाता है।

7. Gamma Rays का निर्माण

टक्कर के समय ऊर्जा तरंगें उत्पन्न होती हैं:

Eₑ + Eₚ → γ⁻ + γ⁺

जहाँ:

γ⁻ इलेक्ट्रॉन से संबद्ध ऊर्जा तरंग है।

γ⁺ पॉज़िट्रॉन से संबद्ध ऊर्जा तरंग है।

दोनों तरंगें विपरीत phase में हो सकती हैं।

8. ऊर्जा का सूक्ष्म अंतर

यद्यपि इलेक्ट्रॉन और पॉज़िट्रॉन की ऊर्जा लगभग समान है, फिर भी सूक्ष्म अंतर माना गया है:

Eₚ = Eₑ − ΔE

जहाँ:

ΔE ≈ 10⁻⁶

उदाहरणार्थ: 1 किलोग्राम में 1 ग्राम का अंतर।

9. निर्वात में सिद्धांत का प्रयोग

निर्वात (vacuum) में भी:

P + e⁻ → कक्षा परिवर्तन + ऊर्जा तरंग

अर्थात् पदार्थ की अनुपस्थिति में भी पॉज़िट्रॉन नष्ट नहीं होता।

10. प्रेक्षण सीमा (Observation Limit)

आधुनिक उपकरण केवल ऊर्जा तरंगों (gamma rays) को पकड़ते हैं। कक्षा परिवर्तन को प्रत्यक्ष नहीं माप पाते। इसलिए प्रेक्षण में पॉज़िट्रॉन का नाश प्रतीत होता है।

11. निष्कर्ष

यह सिद्धांत प्रस्तावित करता है कि:

पॉज़िट्रॉन एक स्थायी ऊर्जा–कण है।

इलेक्ट्रॉन से टकराव पर उसका अस्तित्व समाप्त नहीं होता।

तथाकथित annihilation वास्तव में कक्षा परिवर्तन और ऊर्जा उत्सर्जन है।

यह मॉडल ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत के अनुरूप एक वैकल्पिक व्याख्या प्रस्तुत करता है।

12. वैज्ञानिक आपत्तियाँ और उनके उत्तर

नीचे इस सिद्धांत पर संभावित वैज्ञानिक आपत्तियाँ और उनके उत्तर प्रस्तुत किए गए हैं:

आपत्ति 1: प्रचलित भौतिकी के अनुसार इलेक्ट्रॉन–पॉज़िट्रॉन टक्कर में दोनों नष्ट हो जाते हैं।

उत्तर:
यह निष्कर्ष gamma rays के प्रेक्षण पर आधारित है। यह सिद्धांत मानता है कि जो देखा जाता है वह कणों का नाश नहीं, बल्कि ऊर्जा तरंगों का उत्सर्जन है। पॉज़िट्रॉन स्वयं कक्षा बदलकर प्रेक्षण सीमा से बाहर चला जाता है। अतः नाश का निष्कर्ष प्रेक्षण-सीमा की व्याख्या है, अनिवार्य सत्य नहीं।

आपत्ति 2: यदि पॉज़िट्रॉन नष्ट नहीं होता, तो टक्कर के बाद वह दिखाई क्यों नहीं देता?

उत्तर:
कक्षा-दोलन बहुत अल्प समय (Δt ≈ 10⁻⁴–10⁻³ सेकंड) में होता है। आधुनिक उपकरण इस सूक्ष्म कक्षा परिवर्तन को प्रत्यक्ष रूप से नहीं पकड़ पाते, वे केवल gamma तरंगों को दर्ज करते हैं। इसलिए पॉज़िट्रॉन अदृश्य प्रतीत होता है।

आपत्ति 3: दो gamma rays बनने का क्या प्रमाण है?

उत्तर:
प्रेक्षण में प्रायः विपरीत दिशाओं में gamma rays दर्ज की जाती हैं। यह सिद्धांत उन्हें इलेक्ट्रॉन और पॉज़िट्रॉन से संबद्ध दो अलग ऊर्जा तरंगों (γ⁻ और γ⁺) के रूप में व्याख्यायित करता है, जो phase में भिन्न हो सकती हैं।

आपत्ति 4: कक्षा बदलने पर ऊर्जा समान कैसे रह सकती है?

उत्तर:
इस मॉडल में कक्षाएँ ऊर्जा-स्तर नहीं बल्कि अवस्था-स्थान (state-position) हैं। इसलिए:

E(K₁) = E(K₂)

ऊर्जा का कोई शुद्ध ह्रास नहीं होता, केवल वितरण बदलता है।

आपत्ति 5: QED सिद्धांत इस मॉडल से भिन्न परिणाम देता है।

उत्तर:
यह सिद्धांत QED का खंडन नहीं करता, बल्कि gamma उत्सर्जन की वैकल्पिक व्याख्या प्रस्तुत करता है। जहाँ QED annihilation कहता है, यह मॉडल उसे कक्षा परिवर्तन + ऊर्जा तरंग उत्सर्जन मानता है।

आपत्ति 6: यदि पॉज़िट्रॉन पहले से मौजूद है, तो उसका स्रोत क्या है?

उत्तर:
यह सिद्धांत पॉज़िट्रॉन को मूल ऊर्जा-कण मानता है, जो सृजन–नाश के बजाय स्थान और कक्षा परिवर्तन करता है। अतः स्रोत की समस्या उत्पत्ति की नहीं, बल्कि अवस्था की है।

13. निष्कर्षात्मक टिप्पणी

प्रस्तुत आपत्तियाँ यह दर्शाती हैं कि यह सिद्धांत प्रचलित व्याख्याओं से भिन्न है, किंतु ऊर्जा संरक्षण और प्रेक्षण सीमाओं के आधार पर एक संगत वैकल्पिक ढाँचा देता है। आगे के प्रयोग और गणनाएँ इसकी जाँच का मार्ग खोलती हैं।