Waah kya Thappad hai - 2 in Hindi Drama by Std Maurya books and stories PDF | वाह! क्या थप्पड़ हैं - 2

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वाह! क्या थप्पड़ हैं - 2

लेखक -एसटीडी मौर्य ✍️



समाज में लव मैरिज को बढ़ावा देना क्यों ज़रूरी है

ऐसा प्रश्न सुनकर हर व्यक्ति के मन में अलग-अलग विचार उत्पन्न होते हैं। लोग सोचने लगते हैं कि वह लड़का और लड़की किस समाज के होंगे? क्या वे अपने ही वर्ग के होंगे या किसी दूसरे समाज से होंगे? अधिकतर लोगों की सोच इसी दिशा में चली जाती है।
किन्तु जो लोग जाति-पाति के बंधनों को नहीं मानते, उन्हें इन बातों से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि उनके बच्चे खुशहाल रहें और एक-दूसरे को समझते हुए अपना जीवन बिताएँ। इसके अलावा उन्हें किसी और बात की अधिक चिंता नहीं होती।
वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो लव मैरिज के खिलाफ होते हैं। कई बार इसका कारण उनकी परंपरागत सोच होती है। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में रिश्तों के नाम पर मोटी रकम भी माँगी जाती है, जिसे समाज दहेज के रूप में जानता है।
लव मैरिज में आमतौर पर दहेज या दिखावे का महत्व नहीं होता। इसमें लड़का और लड़की अपनी पसंद से एक-दूसरे को जीवनसाथी चुनते हैं। शायद यही कारण है कि समाज के कुछ लोगों को लव मैरिज से असहजता महसूस होती है।
यदि सही दृष्टिकोण से देखा जाए, तो लव मैरिज समाज को जोड़ने का एक माध्यम भी बन सकती है। जब दो अलग-अलग समाजों या परिवारों के लोग एक रिश्ते में बंधते हैं, तो उनके बीच की दूरियाँ कम होने लगती हैं। इससे आपसी समझ और सहयोग की भावना भी बढ़ती है।
आज के समय में यह देखा जा रहा है कि लव मैरिज धीरे-धीरे बढ़ रही है। वहीं दूसरी ओर अरेंज मैरिज के सामने भी कई प्रकार की चुनौतियाँ देखने को मिलती हैं। अरेंज मैरिज में शादी तो हो जाती है, किन्तु कई बार लड़का और लड़की अपने मन की बात खुलकर नहीं कह पाते।
कभी ऐसा भी होता है कि लड़की किसी और को पसंद करती है और लड़का किसी और को। ऐसे में मजबूरी में बने रिश्ते आगे चलकर टूट भी सकते हैं। इसलिए इस विषय पर समाज को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
आजकल बच्चे पढ़ाई के दौरान ही एक-दूसरे को समझने लगते हैं और कई बार उनके बीच भावनात्मक संबंध भी बन जाते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि समाज उनकी भावनाओं को समझे और उन्हें सही दिशा देने का प्रयास करे।
समाज में परिवर्तन क्यों ज़रूरी है
समाज में परिवर्तन करना अनिवार्य तो नहीं होता, किन्तु यह आवश्यक अवश्य है। यदि समय के साथ समाज में परिवर्तन न किया जाए, तो समाज में अनेक प्रकार की बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं। परिवर्तन प्रकृति का नियम है, इसलिए समय-समय पर समाज में सकारात्मक बदलाव होना स्वाभाविक है।
यदि हम कुछ वर्ष पहले के समाज को देखें तो पाएँगे कि उस समय जाति के आधार पर कार्य विभाजित थे। जैसे नाई (सेन जाति) का काम केवल बाल काटना माना जाता था, अहीर का कार्य दूध निकालना और बेचना, तथा कोइरी जाति का काम सब्ज़ी उगाना समझा जाता था। लगभग हर जाति के लिए एक निश्चित कार्य तय माना जाता था।
किन्तु आज के समय में परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। अब लोग अपनी पसंद और योग्यता के अनुसार कार्य चुनने लगे हैं। जातिगत सीमाएँ धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही हैं और लोग अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं। यह बदलाव समाज के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
जब लोग पुरानी सीमाओं को छोड़कर नई राह अपनाते हैं, तब समाज आगे बढ़ता है। इसलिए समय के अनुसार समाज में सकारात्मक परिवर्तन होना आवश्यक है।