procession of fools in Hindi Moral Stories by prem chand hembram books and stories PDF | मूर्खों की बारात

Featured Books
Categories
Share

मूर्खों की बारात

मूर्खों की बारात(संस्कार, भक्ति और विवेक की कथा)किसी गांव में रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था।उसकी दो बेटियाँ थीं—गौरी और शालू।दोनों बेटियाँ अत्यंत सुंदर होने के साथ-साथ संस्कारवान, विनम्र और मधुर स्वभाव की थीं। बचपन से ही उन्हें भजन-कीर्तन का बहुत शौक था। रामू ने धन तो नहीं जोड़ा था, पर बेटियों को संस्कार और भक्ति का अमूल्य धन अवश्य दिया था।समय बीतते-बीतते दोनों बेटियाँ सयानी हो गईं।अब रामू की पत्नी को उनकी शादी की चिंता सताने लगी।एक दिन वह रामू से बोली—“सुनते हो, अब बेटियाँ बड़ी हो गई हैं। कब तक घर बैठी रहेंगी? लोगों के घरों में तो अच्छे-अच्छे रिश्ते आ रहे हैं।”रामू शांत स्वर में बोला—“चिंता मत करो। जिसने बेटियाँ दी हैं वही उनका अच्छा घर भी देगा। हम केवल सही घर की पहचान करेंगे।”गौरी और शालू जब भी किसी गांव में भजन-कीर्तन गातीं, तो लोग मंत्रमुग्ध हो जाते।उनकी मधुर आवाज और विनम्र व्यवहार से हर कोई प्रभावित होता।धीरे-धीरे उनकी ख्याति आसपास के गांवों से निकलकर दूर तक फैलने लगी।एक दिन पास के गांव में भजन संध्या का आयोजन था।रामू अपनी दोनों बेटियों को लेकर वहाँ पहुँचा।गौरी ने हारमोनियम संभाला और शालू ने मंजीरा।जैसे ही भक्ति गीत शुरू हुआ, पूरा वातावरण भक्ति से भर गया। लोग भावविभोर होकर सुनते रहे।कीर्तन समाप्त होने के बाद एक वृद्ध संत उठे और बोले—“रामू, तुम्हारी बेटियाँ केवल रूप में ही सुंदर नहीं हैं, बल्कि संस्कार और सद्गुणों से भी संपन्न हैं।याद रखो—शील, आचरण और मधुर वाणी ही स्त्री का सच्चा अलंकार हैं।जहाँ ऐसी कन्या जाएगी, वह घर स्वर्ग बन जाएगा।”रामू ने विनम्रता से हाथ जोड़कर कहा—“महाराज, मैं तो बस इतना चाहता हूँ कि इन्हें ऐसा घर मिले जहाँ इनका सम्मान हो। दहेज की लालच न हो।”झूठी प्रतिष्ठा का रिश्ताकुछ दिनों बाद एक बड़े जमींदार के घर से गौरी के लिए विवाह प्रस्ताव आया।रामू पहले तो खुश हुआ, पर जब उसने लड़के के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि वह शराब का आदी और मांसाहारी प्रवृत्ति का है।रामू ने गौरी से पूछा—“बेटी, बड़ा घर है। ऐशो-आराम की जिंदगी होगी… रानी बनकर राज करेगी… बस…”गौरी मुस्कुराकर बोली—“बस क्या बाबा?”रामू ने धीरे से कहा—“लड़का शराब का आदी है। अगर तुम अपनी सेवा से उसे बदल सको तो…”गौरी ने शांत स्वर में कहा—“बाबा, आप जैसा उचित समझें।”बात आगे बढ़ी, पर जमींदार की एक शर्त थी—“बारात बड़ी आएगी। बारातियों के स्वागत में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। हमारी प्रतिष्ठा का प्रश्न है।”रामू ने विनम्रता से कहा—“मैं गरीब आदमी हूँ। यदि बारात छोटी हो तो सेवा में कोई कमी नहीं रहेगी।”पर जमींदार नहीं माना।रामू चिंता में डूबा बैठा था कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।सामने वही वृद्ध संत खड़े थे।रामू ने तुरंत खटिया बिछाई और साष्टांग प्रणाम किया।संत ने पूछा—“रामू, तुम परेशान लग रहे हो। क्या बात है?”रामू ने सारी बात बता दी।संत मुस्कुराए और बोले—“रामू, विवाह का उद्देश्य बारातियों का दिखावा या दहेज नहीं होना चाहिए।हमें यह देखना चाहिए कि कन्या में संस्कार, अध्यात्म और सद्गुण कितने हैं।आज लोग केवल रूप देखते हैं, क्योंकि वासना को सुंदर साधन चाहिए।पर चरित्र ही जीवन की असली शोभा है।”रामू ने दृढ़ स्वर में कहा—“गुरुदेव, मेरी बेटियाँ कोई बोझ नहीं हैं कि मैं उन्हें पैसे देकर विदा करूँ।जो उन्हें सम्मान से स्वीकार करेगा वही उनका सच्चा घर होगा।”रामू ने जमींदार का रिश्ता ठुकरा दिया।समय का न्यायगांव के लोग रामू को समझाने लगे—“अरे रामू! इतना बड़ा रिश्ता ठुकरा दिया!”रामू मुस्कुराकर बोला—“अच्छा हुआ मैं समय रहते संभल गया। उन्हें मेरी बेटी का शरीर चाहिए था, गुण नहीं।”समय बीतता गया।गौरी और शालू की भक्ति अब शहर तक पहुँच चुकी थी।इसी दौरान संजीव कुमार, एक युवा वैज्ञानिक, भारत के प्राचीन वेदों और नाद-ध्वनि पर शोध कर रहे थे।उनका मानना था—“प्रवृत्ति का शमन ही मुक्ति है।अहिंसा केवल विचारों में नहीं, बल्कि जीवन के हर व्यवहार में होनी चाहिए।”संजीव और उनके मित्र राहुल कई बार गौरी और शालू का भजन सुनने आए।धीरे-धीरे विचार मिले, संवाद हुआ और एक दिन दोनों परिवार रामू के घर पहुँचे।संजीव के पिता ने कहा—“हमें दहेज नहीं चाहिए। हमें केवल संस्कारवान जीवनसंगिनी चाहिए।”रामू की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।अनोखी शादीकुछ समय बाद दोनों बेटियों का विवाह सादगी से तय हो गया।विवाह के दिन पूरे गांव के लोग देखने आए।न ढोल-नगाड़े,न दिखावा,न दहेज।बैंड-बाजे की जगह खोल-कीर्तन हुआ।वेद मंत्रों के साथ विवाह सम्पन्न हुआ।भोजन भी पूर्णतः शाकाहारी और सात्त्विक था।किसी पशु की हत्या नहीं हुई।लोग आश्चर्य से कह रहे थे—“ऐसा विवाह हमने आज तक नहीं देखा।”तभी गांव के एक बुजुर्ग बोले—“असल बारात तो यही है—संस्कार और समझदारी की बारात।”रामू मुस्कुराकर बोला—“जहाँ लालच और अहंकार की भीड़ हो, वही असली मूर्खों की बारात होती है।”कहानी की शिक्षाधन और दिखावे से नहीं,बल्कि संस्कार, सम्मान और विवेक से घर बसता है। 🙏✨