एक दिन का बॉयफ्रेंड
मुंबई की सुबह हमेशा की तरह तेज़ थी।
मेट्रो स्टेशन के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ रही थी। कोई ऑफिस के लिए भाग रहा था, कोई कॉलेज के लिए, तो कोई बस अपने सपनों के पीछे दौड़ रहा था।
आर्यन भी उन्हीं लोगों में से एक था।
उसकी उम्र करीब पच्चीस साल थी। एक छोटे से स्टार्टअप में ग्राफिक डिजाइनर की नौकरी करता था। जिंदगी बहुत साधारण थी—सुबह ऑफिस, शाम को घर, और रात को मोबाइल स्क्रॉल करते-करते नींद।
उस सुबह भी सब कुछ वैसा ही था।
वह मेट्रो स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़ा फोन में समय देख रहा था।
अचानक किसी ने उसके सामने आकर कहा—
“एक बात पूछूँ?”
आर्यन ने सिर उठाकर देखा।
सामने एक लड़की खड़ी थी।
लंबे बाल, हल्की नीली ड्रेस, और आँखों में अजीब सी चमक।
आर्यन थोड़ा हैरान हुआ।
“जी…?”
लड़की ने बिना हिचकिचाए कहा—
“क्या तुम मेरे बॉयफ्रेंड बन सकते हो?”
आर्यन का दिमाग एक सेकंड के लिए बिल्कुल खाली हो गया।
“क्या?”
लड़की हल्के से मुस्कुराई।
“बस आज के लिए… सिर्फ एक दिन के लिए।”
आर्यन को लगा शायद यह कोई मजाक है।
“लेकिन क्यों?”
लड़की कुछ पल चुप रही। फिर धीमे स्वर में बोली—
“क्योंकि आज मेरा आखिरी दिन है… इस शहर में भी… और शायद इस जिंदगी में भी।”
आर्यन को लगा जैसे समय एक पल के लिए रुक गया हो।
“क्या मतलब?”
लड़की ने जवाब नहीं दिया। बस हाथ आगे बढ़ाया।
“मेरा नाम सिया है।”
आर्यन ने भी हाथ मिलाया।
“आर्यन।”
सिया ने मुस्कुराकर कहा—
“तो आर्यन, क्या तुम आज के लिए मेरे बॉयफ्रेंड बनोगे?”
आर्यन कुछ सेकंड सोचता रहा।
फिर अचानक वह हंस पड़ा।
“ठीक है… लेकिन एक शर्त पर।”
सिया ने उत्सुकता से पूछा—
“क्या?”
“आज का दिन बोरिंग नहीं होना चाहिए।”
सिया की आँखों में चमक आ गई।
“पक्का नहीं होगा।”
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दोनों मेट्रो स्टेशन से बाहर निकल आए।
आर्यन अभी भी समझ नहीं पा रहा था कि वह एक अजनबी लड़की के साथ क्यों घूम रहा है।
लेकिन सिया की ऊर्जा इतनी अलग थी कि वह मना भी नहीं कर पाया।
सिया ने अचानक कहा—
“चलो सबसे पहले समुद्र देखते हैं।”
“समुद्र?”
“हाँ… मुझे लहरें बहुत पसंद हैं।”
दोनों टैक्सी पकड़कर मरीन ड्राइव पहुँच गए।
सुबह की हल्की धूप समुद्र के पानी पर चमक रही थी।
सिया पत्थरों पर बैठ गई और लहरों को देखने लगी।
वह बच्चों की तरह खुश लग रही थी।
“तुम हमेशा ऐसे ही अचानक लोगों से दोस्ती कर लेती हो?” आर्यन ने पूछा।
सिया हँस पड़ी।
“नहीं… तुम पहले हो।”
“तो फिर मैं इतना स्पेशल क्यों?”
सिया कुछ पल चुप रही।
फिर बोली—
“क्योंकि तुमने मुझे मना नहीं किया।”
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सिया ने अचानक कहा—
“चलो गोलगप्पे खाते हैं।”
आर्यन हँस पड़ा।
“तुम्हें पता है मैं तुम्हें जानता भी नहीं।”
“तो आज जान लो।”
दोनों सड़क किनारे गोलगप्पे खाने लगे।
सिया हर गोलगप्पे के बाद ऐसे खुश होती जैसे उसने कोई बड़ी जीत हासिल कर ली हो।
“तुम बहुत अजीब हो,” आर्यन ने कहा।
“अच्छी वाली अजीब?” सिया ने पूछा।
“हाँ।”
कुछ देर बाद सिया ने कहा—
“अब आइसक्रीम।”
“तुम्हें लगता है मैं आज ऑफिस नहीं जाऊँगा?”
“आज छुट्टी ले लो।”
आर्यन ने कुछ सेकंड सोचा।
फिर बॉस को मैसेज कर दिया—
“आज छुट्टी ले रहा हूँ।”
सिया ने ताली बजाई।
“देखा… तुम अच्छे बॉयफ्रेंड हो।”
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दिन धीरे-धीरे बीत रहा था।
दोनों कभी सड़क पर घूमते, कभी किसी कैफे में बैठते।
सिया हर छोटी चीज़ में खुश हो रही थी।
लेकिन आर्यन ने एक बात नोटिस की—
कभी-कभी सिया अचानक चुप हो जाती।
उसकी आँखों में एक गहरा सा दर्द दिखाई देता।
“सब ठीक है?” आर्यन ने पूछा।
सिया मुस्कुराने की कोशिश करती।
“हाँ।”
लेकिन उसकी मुस्कान पूरी नहीं होती।
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शाम होने लगी।
दोनों एक छोटे से कैफे में बैठे थे।
सिया खिड़की से बाहर डूबते सूरज को देख रही थी।
“तुम्हें पता है…” उसने धीरे से कहा।
“क्या?”
“आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा दिन है।”
आर्यन थोड़ा हैरान हुआ।
“सच?”
“हाँ… क्योंकि आज मैं सच में जी रही हूँ।”
आर्यन के मन में एक सवाल बार-बार घूम रहा था।
“सिया… तुमने सुबह जो कहा था… ‘आखिरी दिन’… उसका क्या मतलब था?”
सिया ने उसकी ओर देखा।
उसकी आँखें हल्की नम हो गईं।
“मैं तुम्हें बताऊँगी…”
“लेकिन पहले एक जगह चलना होगा।”
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To be Continued...