I will come quietly - Part 2 in Hindi Love Stories by Std Maurya books and stories PDF | चुपके-चुपके आऊँगा - भाग 2

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चुपके-चुपके आऊँगा - भाग 2

लेखक - एसटीडी मौर्य ✍️

चुपके-चुपके आऊँगा – भाग 2

जैसा कि मैंने पिछले भाग में बताया था कि जब मैं लिख रहा था, तभी एक बिल्ली आई थी। उसी बिल्ली की वजह से मेरी मुलाकात प्रियांशी नाम की एक लड़की से हुई थी।
मेरी छोटी बहन अंकिता जब यह बात जान गई, तो वह जिद करने लगी कि उसे भी प्रियांशी से मिलना है।
अब कहानी आगे शुरू होती है…
मैं और मेरी बहन बाइक से निकल पड़े और प्रियांशी के घर पहुँच गए। लेकिन जब हम वहाँ पहुँचे तो देखा कि दरवाजे पर ताला लगा हुआ था।
अंकिता बोली —
“भैया, यही घर है? इसमें तो ताला लगा है।”
मैंने कहा —
“हाँ अंकिता, यही घर है… लेकिन सच में ताला लगा हुआ है।”
अंकिता फिर बोली —
“क्या आपको मालूम है कि वह कहाँ गई होंगी?”
मैंने कहा —
“मुझे तो बस इस घर के बारे में ही पता है।”
हम दोनों थोड़ी देर तक उदास होकर दरवाजे के पास ही बैठ गए।
कुछ देर बाद पास वाले घर से एक आदमी बाहर आया। मैं उनके पास गया और उनसे पूछने लगा —
“अंकल जी, जो लोग इस घर में रहते थे, वह सुबह-सुबह कहाँ चले गए?”
अंकल जी बोले —
“बेटा, मुझे ज्यादा तो नहीं पता। लेकिन सुबह मैंने देखा था कि एक कार आई थी और वह सब उसी कार में बैठकर कहीं चले गए।”
इतना कहकर वह भी अपने घर चले गए।
अब मैं और मेरी बहन और भी उदास हो गए। हम सोचने लगे कि आखिर प्रियांशी कहाँ चली गई।
कुछ देर बाद हम दोनों भाई-बहन वापस लौटने लगे।
तभी एक और आदमी वहाँ आया और हमसे पूछने लगा —
“बेटा, तुम दोनों इतने उदास क्यों हो?”
अंकिता बोली —
“कुछ नहीं अंकल जी… यहाँ पर एक लड़की रहती थी, जिसका नाम प्रियांशी था। वह सुबह-सुबह कहीं चली गई। मैं उसकी सहेली हूँ, उससे मिलने आई थी।”
यह सुनकर अंकल जी बोले —
“अरे बेटा, इसमें उदास होने की क्या बात है। मैं बता देता हूँ कि वह कहाँ गई है।”
हम दोनों ने उत्सुकता से उनकी ओर देखा।
अंकल जी बोले —
“आज से वह लोग यहाँ नहीं रहेंगे। वह लोग अब जबलपुर में रहने चले गए हैं, क्योंकि प्रियांशी के भाई की वहाँ नौकरी लग गई है।”
यह सुनते ही हमारे चेहरे पर फिर से मुस्कान आ गई।
हम दोनों तुरंत घर लौट आए।
घर पहुँचकर मैं और अंकिता कटनी से जबलपुर जाने की योजना बनाने लगे।
अंकिता ने पापा से कहा —
“पापा, मेरी एक सहेली जबलपुर में रहती है। वह बहुत बीमार है। मैं और भैया उससे मिलने जाना चाहते हैं।”
पापा बोले —
“तो एक दिन बाद चले जाना।”
अंकिता बोली —
“नहीं पापा! वह बहुत बीमार है। अगर आज नहीं गए तो फिर जाने का क्या मतलब रहेगा?”
पापा कुछ देर सोचकर बोले —
“ठीक है, अगर ऐसा है तो आज ही चले जाओ… लेकिन वहाँ पहुँचकर फोन जरूर करना।”
मैं और अंकिता दोनों एक साथ बोले —
“जी पापा, जरूर करेंगे।”
और फिर…
हम दोनों भाई-बहन जबलपुर जाने की तैयारी करने लगे।
ज्यादा सामान बैग में भरकर घर लौटे ही थे कि बाहर ऑटो आ गई। हमने उसे रोककर उसमें बैठ लिया और कटनी रेलवे स्टेशन की ओर चल पड़े। ट्रेन का समय 12:30 था, लेकिन हम 11 बजे ही पहुँच गए। ट्रेन का इंतज़ार करते हुए थोड़ी देर बाद पता चला कि ट्रेन आधा घंटे लेट हो गई है।
हमने सोचा कि चलो दूसरी ट्रेन पकड़ लेते हैं। 12:10 की ट्रेन सुपरफास्ट थी, लेकिन हमारे पास केवल लोकल टिकट थी। जैसे ही ट्रेन आई, हम बैठे ही थे कि TT आया और हमारी ओर देखा।
“अपनी टिकट दिखाओ,” उसने कहा।
मैंने झट से कहा, “सर, टिकट तो… चोरी हो गई।”
TT बोला, “ये क्या बेहूदगी कर रहे हो?”
मैं हँसते हुए बोला, “सर, आपको तो समझ ही गया 😂, फिर पूछ क्यों रहे हैं?”
TT ने हमें पाइन भरने की चेतावनी दी, लेकिन हम उसे उलझा कर रखते रहे। जैसे ही स्टेशन आया, हमने लोकल टिकट मोड़कर TT को दे दिया और अंकिता ने बैग उठाकर हम ट्रेन से भाग निकले। TT हमारे पीछे दौड़ पड़ा, लेकिन भीड़ में हम उससे बच निकले।
रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही हमें पुलिस मिल गई। थकावट से हम उनके बगल में बैठ गए। पुलिस वालों ने हमारी तरफ देखते ही कहा, “तुम दोनों कौन हो?”
हमने साफ-साफ कहा, “यह मेरी छोटी बहन है।”
लेकिन पुलिस वाले मानने को तैयार नहीं थे।
“कोई सबूत दो कि तुम दोनों भाई-बहन हो,” उन्होंने कहा।
अंकिता बिना डरे बोली, “तुमसे हमें क्या मतलब! हम 18+ हैं, और साथ रह सकते हैं। अनुच्छेद 21 पढ़ लो।”
पुलिस वाले थोड़े डर गए और आधा घंटा बहस होती रही। मैंने उस पूरा दृश्य वीडियो में रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो सोशल मीडिया पर गया और लोग पुलिस के गलत व्यवहार को देख सकते थे। हमने अपना आधार कार्ड भी दिखा दिया।
आख़िरकार, पुलिस वाले मान गए और हम ऑटो में बैठकर शहर की ओर चल दिए। गली नंबर 8 में उतरते ही हमें पता चला कि वह लड़की उसी गली में रहती है। हमने कमरा नंबर 4 लिया, और वह लोग 10 में रहती थीं। यह देखकर मैं बहुत खुश हुआ।