Jaadui Duniya - 2 in Hindi Adventure Stories by Ram Make books and stories PDF | जादुई दुनियां - 2

Featured Books
  • पंछी का पिंजरा - भाग 4

    मुझे दो दिन बाद होश आया था। डाक्टर नर्सस और जान पहचान के सभी...

  • हैरानी - Ateet ki Yaadein - 14

    Episode -14 (डर दहशत और धोखा)अस्पताल के गलियारों में आज सन्न...

  • Ghost hunters - 14

    कुछ  भी सामान्य नहीं था पैर उल्टी दिशा में मुड़े हुए और शरीर...

  • त्रिशा... - 48

    त्रिशा ने एक बार गाड़ी में बैठे राजन को देखा और देखती रह गई।...

  • तेरी चाहत में - 2

    छोटेपन से ही अयन कुछ अलग था। सोनाई किसके साथ घूम रही है, किस...

Categories
Share

जादुई दुनियां - 2




वीर के कॉल उठाते ही। अचानक एक इंसान की राक्षसों की तरह हस्ती हुई image सामने आ गई। वीर तो उन्हें देखकर गिरते-गिरते बचता है।  screen पर वीर के बचपन के दोस्त अनुराग के पिता प्रकाश मित्तल थे।

प्रकाश शिंदे वीर को अपने बेटे जैसा ही मानते थे। वीर के पिता, कार्तिक और वह बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे, वीर के पिता ने बुरे वक्त में प्रकाश अंकल की बहुत मदद की थी और अब वीर के पिता के गुजर जाने के बाद वह वीर और उसकी फैमिली का ध्यान रखना अपनी जिम्मेदारी समझते थे।

वीर , प्रकाश अंकल को स्क्रीन पर देखते हुए बोला,  "आपको मेरा नंबर कैसे मिला" ।

प्रकाश अंकल तुरंत बोले, "तुम्हारा नंबर कोई VIP नंबर तो है नहीं जो मुझे नहीं मिलेगा, बस थोड़ा search किया और थोड़ी बहुत hacking , तुम तो जानते ही हो कि मैं एक scientist हूँ "।

प्रकाश अंकल ने मुस्कुराते हुए थोड़ा pause लिया और फिर अपनी बात को continue करते हुए बोले, " बेटा तुम्हारे पापा और मैं बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे , उनके मुझ पर बहुत सारे अहसान है और मुझे खुशी होगी अगर मैं तुम्हारे किसी काम आ सकूं इसीलिए मैंने तुम्हारे लिए मेरी lab में ही एक जॉब देख रखी है । तुम चाहो तो कल से ही join कर सकते हो"।

वीर प्रकाश अंकल कि वही पकाऊ बाते फिर से सुनकर बोर होते हुए पहले अपने फोन की स्क्रीन की तरफ देखता है और फिर अपने कमरे में चारों तरफ नजर घुमाते हुए उसकी नजर उसके रूम में रखे fish एक्वेरियम पर पड़ती और वह बिना समय गवाएं अपना फोन उसे एक्वेरियम में डाल देता है।

"जान छूटी" , वीर लंबी सांस लेते हुए अपने आप से करता है और फिर fresh होने के लिए चला जाता है।

कुछ देर बाद नाश्ता करके वीर जैसे ही बाहर जाने लगा तभी उसकी माँ उससे बोली, " बेटा अब कहां जा रहा आज तो sunday है ना, school भी बंद है"।

अपनी मां की बात सुनकर वीर गहरी सांस लेता है और फिर करता है ,"garage जा रहा हूं माँ"।

उसकी मां फीक्र जताते हुए बोली, "बेटा माना कि तू अपने पापा की car ठीक करना चाहता है , पर कब तक तू उसी car में लगा रहेगा । 3 साल हो गए हैं, पर अब तक वह ठीक नहीं हो पाई है"।

वीर अपनी मां की बात को बीच में ही काटते हुए बोला, "माँ... तुम तो जानती ही हो कि पापा को cars से कितना लगाव था और इस car को पापा और मैं मिलकर बनाया करते थे और आज मैं चाहता हूं कि यह car मैं ठीक करु और देखना एक दिन यह car जरूर ठीक होगी"।

"लेकिन बेटा..." वीर की मां वीर से कहते हुए थोड़ा pause लेती है और अपनी बात को continue करते हुए बोली, " तू भी जानता है कि अब अपने घर के हालात पहले जैसे नहीं हैं, अगर अब हमने कर्ज के पैसे जल्दी नहीं लौटये तो वह लोग तुम्हारे पापा की आखिरी निशानी... इस हवेली को भी हमसे छीन लेंगे, हमे कुछ तो करना होगा "।

वीर अपनी मां को दिलासा देते हुए बोला, " आप चिंता मत करो माँ.. मैं कुछ करता हूं"।

इतना कह कर वीर अपने घर के garage के सामने पहुंच गया। वह shutter खोलता है तो सामने एक आधी बनी हुई car खड़ी थी , जिस पर वीर काम करने लगा।

वीर के पापा को cars का बहुत शौक था और यह शौक वीर को भी उन्हीं से विरासत में मिला था। वीर जितना स्कूल में पढ़ाई के बारे में जानता था , उससे कहीं ज्यादा तो वह cars के बारे में जानता था । उसने driving भी अपने पापा से ही सीखी थी । आज वीर का मन car ठीक करने में नहीं लग रहा था , उसके मन में अपनी मां की सुबह कहीं बातें ही आ रही थी, वह यही सोच रहा था कि वह पैसों के का इंतजाम कैसे करें...  यही सोचते हुए वीर के दिमाग में प्रकाश अंकल की सुबह कहीं हुई बात आती है कि, " किसी भी चीज की जरूरत हो तो उन्हें कहे" ।

इसीलिए फिर वो फटाफट से अपने रूम में गया और जाते ही उसने अपना फोन उठाया, जो अब तक सूख चुका था। वीर फोन उठाकर बड़बड़ाने लगा, "प्रकाश अंकल को फोन लगाऊं या नहीं " ।

तभी वीर का फोन बज उठा , एक बार फिर वीर को डराते हुए प्रकाश अंकल call पर आ गये। वह एक video call थी, वीर के कॉल उठाते ही। अचानक एक इंसान की राक्षसों की तरह हस्ती हुई image प्रकट हो जाती है , । वीर तो उन्हें देखकर गिरते-गिरते बचता है। screen पर वीर के बचपन के दोस्त अनुराग के पिता प्रकाश मित्तल होते है।

वीर तुरंत उनसे बोला, " अंकल मैं जब भी आपको याद करता हूं... तब आप यह अचानक से जिन्न की तरह कैसे प्रकट हो जाते हैं" ।

तब प्रकाश अंकल हंसते हुए वीर से बोले, " वह मैंने तुम्हारे फोन में वॉइस कमांड ऑपरेट किया हुआ है , ताकि जब भी तुम्हें मेरी जरूरत हो तब मुझे इस बात का पता चल जाए"।

" दूसरों की जिंदगी में टांग अड़ाना तो कोई आपसे सीखे" वीर फिर से बड़बड़ाने लगा।

तभी प्रकाश uncle बोले, "कुछ कहा क्या तुमने "।

"नहीं नहीं कुछ भी तो नहीं कहा मेने " वीर हाड़बढ़ाते हुए बोला ।

फिर प्रकाश अंकल इधर-उधर की बातें छोड़कर पॉइंट पर आते हुए बोले, "वैसे वीर पुत्तर तुमने आज मुझे कैसे याद किया "।

थोड़ा awkward होते हुए वीर उनसे बोला, "अंकल मुझे ना आपकी मदद चाहिए थी"।

प्रकाश अंकल यह बात सुनकर बहुत खुश हो गये, आखिर पहली बार वीर उनसे हेल्प मांग रहा था। उन्हें तो लगने लगा था कि वह मरते दम तक वो वीर के पिता के अहसानो का कर्ज नहीं चुका पाएंगे, उनकी आंखों से तो बस आंसू ही निकलने वाले थे ।

लेकिन खुद पर कंट्रोल करते हुए वह पानी पीते हुए उससे पूछते हैं , "कैसी हेल्प वीर बेटा--"।

वीर खुश होते हुए बोला, " वो... कुछ पैसे चाहिए थे "।

यह बात सुनकर प्रकाश अंकल वीर से पानी पीते हुए पूछते हैं , "कितने पैसे चाहिए वीर "।

अचानक से प्रकाश अंकल को हार्टअटैक देते हुए वीर बोला, " वो.. ज्यादा नहीं बस 6 crore चाहिए मुझे " ।

अचानक इतना बड़ा अमाउंट सुनकर प्रकाश अंकल जो पानी पी रहे थे , वह अपने फोन पर उड़ेल देते हैं और खाँसते हुए बोले, " क्या कहा तुमने " ।

तब वीर अपनी बात रिपीट करते हुए बोला, "बस 6 करोड़.. ..., इतने पैसे तो होंगे ही ना आपके पास, आखिर आप तो इतने बड़े साइंटिस्ट है" ।

वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल पूछने लगे, "वैसे कब तक चाहिए तुम्हें यह पैसे " ।

तब वीर खुशी-खुशी बोला, "2 साल में "।

तब प्रकाश अंकल वीर से बोले, "वीर बेटा अभी तो मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं और शायद पूरी जिंदगी में भी मैं इतने पैसे नहीं कमा पाऊंगा"।

यह बात सुनकर वीर का मुंह उतर गया और वह प्रकाश अंकल कोई इमोशनल ब्लैकमेल करते हुए बोला, "आप हमेशा मुझे फोन करके परेशान करते हुए कहते हो कि अगर मुझे किसी भी तरह की ... हेल्प चाहिए हो तो मैं आपसे कहु और आज जब पहली बार मैंने आप से हेल्प मांगी तो आप मना रहे हैं , यह मैंने आपसे एक्सपेक्ट नहीं किया था चलिए अब फोन रखिए और अब आज के बाद मुझे कॉल करने के बारे में सोचियेगा भी मत "।

वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल थोड़ा सोचते हुए वीर से बोले, "वैसे मैं तुम्हारी हेल्प करना चाहता हूं पर इस तरह नहीं... लेकिन अब मेरे पास कोई और ऑप्शन नहीं है इसीलिए मैं तुम्हारी हेल्प करूंगा"

अपनी बात में थोड़ा रुक कर वो वीर से बोले, "वीर बेटा एक रास्ता है ...लेकिन वह बहुत खतरनाक है"।वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल थोड़ा सोचते हुए वीर से कहते हैं , "वैसे मैं तुम्हारी हेल्प करना चाहता हूं पर इस तरह नहीं... लेकिन अब मेरे पास कोई और ऑप्शन नहीं है इसीलिए मैं तुम्हारी हेल्प करूंगा" अपनी बात में थोड़ा रुक कर वो वीर से कहते हैं, "वीर बेटा एक रास्ता है ...लेकिन वह बहुत खतरनाक है"।प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर अचानक एक्इसाटेड होते हुए बोला, "कौन सा रास्ता अंकल"।तब प्रकाश अंकल अपनी दबी आवाज में बोले, "मैं तुम्हें ऐसे सब नहीं बता सकता वीर"।इस बात पर वीर अपनी आंखें सिकुड़ते हुए बोला,  "आप कहना क्या चाहते हो"।तब प्रकाश अंकल वीर से बोले, "मैं तुम्हारे फोन पर अपनी लैब के coordinates भेजता हूं हम कल वहां मिलकर सब बात करते हैं , इसी बहाने तुम मेरी लैब को भी देख लेना"।अभी प्रकाश अंकल ने अपनी बात खत्म ही की थी कि वीर के फोन जोर से रिंग करता है और वह देखता है कि coordinates ईतनी जल्दी आ भी गए हैं ।प्रकाश अंकल से बात खत्म करने के बाद वीर को लगा कि उसकी सारी प्रॉब्लम सब खत्म हो जाएंगी यही बात सोचकर वीर अपने बेड पर सोने के लिए चला जाता है।अगले दिन वीर सुबह जल्दी प्रकाश अंकल से मिलने के लिए तैयार हो जाता है और जल्दी से अपने रूम से बाहर निकलता है। वीर को इतनी सुबह - सुबह तैयार हुआ देखकर वीर की छोटी बहन कृतिका का मुंह तो जैसे खुला का खुला ही रह जाता है ।वीर अपनी बहन कृतिका की तरफ बिना ध्यान दिए अपनी मां के पास गया और अपने चेहरे पर स्माइल लाते हुए बोला, "मां जल्दी से नाश्ता लगा दो मुझे बाहर जाना है "।वीर की आवाज सुनकर वीर की माँ ने वीर की तरफ अचानक देखा और वह उसे देख कर बस गिरते-गिरते बची।अपनी मां को देखकर वीर आंखों और चेहरे पर कन्फ्यूजन के लुक्स के साथ अपनी मां को देखता है ।  वीर की मां अपनी आंखें मलते हुए कभी उसे तो कभी घड़ी की तरफ देखती है , आखिर में जब वह समझ जाती है कि जो कुछ भी वह देख रही है वह सच है ।  तब वह वीर के पास जाकर उसके सर पर हाथ रखते हुए बोली, " वीर , बेटा तू बीमार तो नहीं है या कहीं तेरे सिर पर चोट तो नहीं लगी।"अपनी मां की ऐसी अजीब सी बाते सुनकर वीर अपनी माँ से बोला , " माँ यह क्या कह रही हो मैं बिलकुल ठीक हूँ "।तभी वीर की मां वीर को जवाब देते हुए बोली, "मैं सही तो कह रही हूं, अभी 6:00 बजे हैं और आज से पहले तो तूने 8:00 या 9:00 बजे तक अपनी करवट भी नहीं बदली , तो आज तुझे ऐसा क्या हो गया जो इतनी जल्दी जाग गया है"।अपनी मां की हां में हां मिलाते हुए थोड़े मजाकिया अंदाज में वीर की छोटी बहन कृतिका भी बोली , "हां भैया आज आप को क्या हो गया...,  कहीं किसी लड़की का चक्कर तो नहीं है " ।अपनी मां और बहन की बात सुनकर वीर को थोड़ी देर तो समझ नहीं आता कि, वह उन दोनों को क्या जवाब दें और थोड़ी देर तक वह अपने चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन लिए उन्हें एकटक देखता रहता है और सोचता है , उसका थोड़ा सा बदल जाना क्या उसकी फैमिली को हार्टअटैक दे सकता है।फिर अगले ही पल अपने सारे ख्यालों को एक तरफ करते हुए वीर जवाब देते हुए उन दोनों से बोला, "वो दरअसल मै आज अनुराग के पापा प्रकाश अंकल से मिलने जा रहा हूं , उनसे मेरी उनकी लैब में नॉकरी की बात हुई है । बस इसीलिए मैं आज थोड़ा जल्दी तैयार होकर जा रहा हूं "।वीर की यह बात सुनकर वीर की मां और छोटी बहन की सांस में सांस आई । तब वीर की मां भी वीर से बोली, " नॉकरी मैं कोई खतरा तो नहीं है ना बेटा "।तब वीर भी अपने चेहरे पर मुस्कान लेकर अपनी मां की परेशानी को दूर करते हुए बोला, "नहीं माँ ...नहीं...  नॉकरी में कोई खतरा नहीं है"।" तू मुझे मत बना... मैं प्रकाश भाई साहब से खुद बात करूंगी, कि वह हर वक्त तेरे साथ रहे" अपनी आवाज में टेंशन के साथ में वीर की मां वीर से बोली ।तब अपनी मां की बात सुनकर वीर को समझ नहीं आता कि वो react कैसे करें , आखिर वह भी अपनी मां की परेशानी को अच्छे से जानता था ,  वह नहीं चाहती हैं कि जिस तरह वीर के पिता कार्तिक रंधावा की मौत हुई उसी तरह वीर भी किसी खतरे में पड़े ।तब वीर अपनी मां से बोला, "मां अब मुझे खाना भी दे दो मैं लेट हो रहा हूं"।वीर की बात सुनकर वीर की मां वीर से बोलीं, "बस 2 मिनट... में अभी किचन में से तेरे लिए खाना लेकर आती हूं"।इतना कह कर वीर की मां वहां से वीर के लिए खाना लेने के लिए चली जाती है, खाना खत्म करने के बाद वीर जल्दी से प्रकाश अंकल की लैब की तरफ निकल पड़ता है ।रास्ते भर वीर बस यही सोच रहा था कि प्रकाश अंकल इतने बड़े साइंटिस्ट हैं तो उनकी लैब कितनी बड़ी होगी। इतना सोच कर वीर की आंखों में तो जैसे चमक से आ जाती है, लेब का यह टूर उसके लिए एक बहुत ही अच्छा और इंटरेस्टिंग  होने वाला था और जितना जल्दी हो सके वो वहां उतना जल्दी पहुंचना चाहता था ।जब वह प्रकाश अंकल के दिए coordinates पर पहुंचता है तो वीर देखता है कि वहां बहुत ही बड़ी बड़ी बिल्डिंग थी , वीर कन्फ्यूजन में मन ही मन बड़बड़ाता है , "अब मैं इन सब में से प्रकाश अंकल की लैब कौन सी होगी " ।उसी वक्त वीर की नजर एक राह चलते आदमी पर पड़ती है , उसने वॉचमैन की यूनिफॉर्म पहनी हुई थी । वीर ने उसे रोकते हुए पूछा , " excuse me"।तब वह आदमी वीर की तरफ कंफ्यूजन में देखता है और बोला , "जी कहिए" । वीर पूछता है, " क्या आप इस एड्रेस के बारे में बता सकते हैं...? "।वह आदमी वीर के हाथ में उस एड्रेस पर एक नजर मारता है और अजीब सा मुंह बना लेता है और थोड़ी दूर पर अपने हाथ से एक बिल्डिंग की तरफ इशारा करते हुए बोला, "वह ...वहां ...उस तरफ"उस आदमी की बात सुनकर वीर उसके बताएं डायरेक्शन की तरफ excited होते हुए देखता है , लेकिन जैसे ही उसकी नजर बिल्डिंग पर पड़ती है तब उसके मुंह से एक्साइटिंग लुक गायब हो जाता है और उसकी जगह वह कन्फ्यूज्ड होकर उस बिल्डिंग को देखता रहता है।वह बिल्डिंग दिखने में बाबा आदम के जमाने की लग रही थी। हर तरफ से प्लास्टर नीचे गिर रहा था और चारों तरफ से उस बिल्डिंग को जंगली बेलो ने और हरे रंग की काई ने जकड़ रखा था । वह जगह देखने में किसी भूत बंगले से भी ज्यादा खतरनाक लग रही था। उस बिल्डिंग के सामने एक बड़ा सा लोहे का जंग लगा हुआ टूटा गेट लगा था ।वीर को प्रकाश अंकल की बातों से लगा था कि वह बहुत बड़े साइंटिस्ट होंगे और उनकी लैब भी उतनी ही एडवांस्ड होगी , लेकिन इस जगह को देखकर तो लग रहा था , कि यहां भूतों के अलावा आज तक कोई आया ही नहीं होग

वह बिल्डिंग दिखने में बाबा आदम के जमाने की लग रही थी। हर तरफ से प्लास्टर नीचे गिर रहा था और चारों तरफ से उस बिल्डिंग को जंगली बेलो ने और हरे रंग की काई ने जकड़ रखा था। वह जगह देखने में किसी भूत बंगले से भी ज्यादा खतरनाक लग रही था। उस बिल्डिंग के सामने एक बड़ा सा लोहे का जंग लगा हुआ टूटा गेट लगा था ।वीर को प्रकाश अंकल की बातों से लगा था कि वह बहुत बड़े साइंटिस्ट होंगे और उनकी लैब भी उतनी ही एडवांस्ड होगी , लेकिन इस जगह को देखकर तो लग रहा था , कि यहां भूतों के अलावा आज तक कोई आया ही नहीं होगा ।"खोदा पहाड़ और निकली चुहिया " वीर ने उस बिल्डिंग को देखते हुए मन ही मन सोचा । उसके बाद वीर उस बिल्डिंग की तरफ चल दिया, उस बिल्डिंग के सामने पहुंचकर वीर ने उस बड़े से लोहे के बने गेट को धक्का दिया ।"क..क् .. क्. क्.. र ...!!! " गेट एक कान को फाड़ देने वाली कर्कश की आवाज के साथ खुल गया।वीर अपने कान पर हाथ रखते हुए बोला, "बहुत ही एडवांस टेक्नोलॉजी है , door bell की भी जरूरत नहीं है। गेट की आवाज ही काफी है "  इतना कह कर वीर अंदर चला गया ।अंदर जाकर वीर देखता है, वहां बड़े-बड़े बुक सेल्फ पर धूल से सनी हुई किताबें रखी हुई है। पूरे घर में से बहुत ही ज्यादा स्मेल आ रही थी। यह सब देखकर वीर ने सोचा , यहां आकर मैं कहां फंस गया मैं तो घर पर ही ठीक था ।उसके बाद में वीर प्रकाश अंकल को आवाज लगाने के लिए पीछे मुडते हुए अपना मुंह खोला ही था , कि तभी वीर के मुंह से चीख निकल गई।पीछे प्रकाश अंकल उसके पास ही खड़े थे। उन्हें देखकर वीर अपनी तेज हो चुकी धड़कनों को शांत करते हुए बोला, "अंकल मेरी जान लोगे क्या "।वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल बोले, "अब मैंने क्या किया "।उनकी बात सुनकर वीर  झल्लाते हुए बोला, "तो इस भूत बंगले में मेरे पीछे ऐसे भूतों की तरह आकर आप क्या करना चाहते थे"।वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल हंसते हुए बोले, "चलो कोई बात नहीं बेटा , मुझे नहीं पता था कि तुम इतने कमजोर दिल के हो... "।प्रकाश अंकल की यह बात सुनकर वीर को समझ नहीं आता कि वह रिएक्ट कैसे करें , वह अपने चेहरे पर अजीब से भाव के साथ थोड़ी देर तक प्रकाश अंकल को घूरता रहा, फिर प्रकाश अंकल से बोला, " क्या आपने मुझे यहां पर डराने के लिए ही बुलाया है "।वीर की बात सुनकर प्रकाशन अपनी बढ़ाई करते हुए बोले, "तू चिंता मत कर वीर पुत्तर, तेरी हर परेशानी का हल है इस प्रकाश के पास"।प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर भी बोला ,  "ठीक है , अंकल अब मेरी परेशानी का उपाय भी बता दीजिए" ।"ऐसे नहीं वीर लैब में घूमते हुए बात करते हैं " वीर की बात सुन का प्रकाश अंकल वीर से बोले और फिर वह आगे बढ़कर वीर के पीछे की तरफ रखी हुई है धूल भरी लाल रंग  की बुक को अपनी जगह से हल्का सा बाहर की तरफ खींच देते हैं।उनके ऐसे करते ही अचानक वह बुक सेल्फ साइड में हट जाती है और वहां उस बुक सेल्फ के पीछ एक लिफ्ट का दरवाजा दिखाई देता है ।वीर इसे देख कर तो जैसे एक ही जगह पर खड़े खड़े जम जाता है । वीर ने तो यह सोचा भी नहीं था कि इस पुरानी से बिल्डिंग में ऐसी कोई अजीब सी जगह भी होगी।बस उसी वक्त प्रकाश अंकल एक बटन दबाते हैं और लिफ्ट का दरवाजा खुल जाता है। लिफ्ट का गेट खुलते ही प्रकाश  अंकल लिफ्ट पर चढ़ जाते हैं , उन्हें लिफ्ट में चढ़ा देखकर फिर वीर भी उनके पीछे पीछे लिफ्ट में चड़ जाता है ।लिफ्ट का दरवाजा बंद होते हैं लिफ्ट तेजी से जमीन में नीचे की तरफ जाने लगती है। कुछ देर के बाद लिफ्ट का दरवाजा फिर से खुलता है , तब वीर अपने सामने की चीजों को देखकर जैसे जम सा जाता है। कुछ देर के लिए तो वह सांस लेना भी भूल कर जाता है।वीर के सामने एक बड़ी सी लैब थी। जिसके अंदर कई ऑटोमेटिक मशीन लगी हुई थी , साथ ही वहां कई रोबोट्स भी काम कर रहे थे । वहां कई तरह के chemicals रखे हुए थे । जिनमें से कुछ में से तो वाइट रंग का धूंआ भी निकल रहा था । दीवारों पर बड़े-बड़े टीवी लगे हुए थे, पास ही में और भी कई बड़े-बड़े कंप्यूटर्स रखे हुए थे ।वीर ने अपनी आंखें मली और एक बार लेब को ध्यान से देखा और फिर उसने अपनी आँखो से घूरते हुए प्रकाश अंकल की तरफ देखा , अपनी तरफ वीर को एसे देखते हुए देखकर प्रकाश अंकल थोड़ा असहज होते हुए वीर से बोले, "क्या हुआ वीर तुम मुझे ऐसे क्यो घूर रहे हो "।तब वीर एक बार फिर पूरी लेब को एक नजर देखते हुए पूछता है , "आपके पास इतनी बड़ी लेब है , पर फिर भी इसे उस भूत बंगले के नीचे इस तरह छुपा कर रखा है और साथ में मैंने जब आप से पैसे मांगे तब आपने पैसे भी देने से मना कर दिया ...! आपने ऐसा क्यों किया " ।तब वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल बोले, " "यह लैब मुझे दरअसल सरकार की तरफ से एक्सपेरिमेंट्स करने के लिए मिली है और यह सारी जो करोड़ों के एडवांस्ड इक्विपमेंट्स तुम देख रहे हो यह सब भी सरकार की तरफ से नहीं मिले हैं । मैं तुम्हारे लिए ज्यादा कुछ नहीं बस इस लैब में एक जॉब ही दिलवा सकता हूं ।तभी प्रकाश अंकल को एक मशीन के बीप... करने की आवाज आती है । प्रकाश अंकल जल्दी से बोले, " तुम लैब देखो मैं अभी आया " ।इतना कहकर प्रकाश अंकल वहां से तेजी से भागते हुए एक कंप्यूटर की तरफ निकल जाते हैं । वीर प्रकाश अंकल को जाते देख थोड़ा कंफ्यूज होते हुए देखता है, लेकिन वह फिर इस बात पर ज्यादा ध्यान ना देते हुए वह लैब में घूमने लगता है ।थोड़ी देर बाद वीर को प्रकाश अंकल की आवाज सुनाई दी , "तो फिर मुझे बताओ ,तुम्हें मेरी लैब कैसी लगी ?" ।प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर उन्हे अपने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए जवाब देते हुए बोला, "यह तो बहुत ही एडवांस्ड है और अच्छी भी है"।"वैसे मैंने तुम्हें यहां जॉब करने के लिए बुलाया था, मैंने अपने सीनियर से बात करके सैलरी भी ₹1 lack करवा दी है तुम चाहो तो अभी से ज्वाइन कर सकते हो" प्रकाश अंकल वीर से बोले ......


"वैसे मैंने तुम्हें यहां जॉब करने के लिए बुलाया था, मैंने अपने सीनियर से बात करके सैलरी भी ₹1 lack करवा दी है तुम चाहो तो अभी से ज्वाइन कर सकते हो" प्रकाश अंकल वीर से बोले।वीर प्रकाश अंकल की बात सुनकर उन्हें अजीब तरीके से देखते हुए बोला, "आप जानते हैं ना कि मेरे पास  ज्यादा समय नहीं है, आपकी इस जॉब से मुझे अपना कर्ज चुकाने में पूरे 41 साल और 8 महीने लग जाएंगे... अगर मैं कोई खर्च नहीं करूं तो...! "वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल वीर से बोले , "मैं जानता हूं लेकिन इस वक्त मैं तुम्हारे लिए बस यही कर सकता हूं "।यह सुनकर वीर उनसे बोला, " कोई तो रास्ता होगा "।वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल थोड़ा सोचते हुए एक गहरी सांस लेते हैं और फिर वीर से बोले, "वैसे एक रास्ता तो है...  लेकिन उसमें खतरा भी बहुत है।"प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ जाता है और फिर कुछ देर सोचने के बाद वीर प्रकाश अंकल से बोला, "मैं तैयार हूं... इस काम के लिए , जितना भी खतरा हो मैं करूंगा , बस आप यह बात माँ को मत बताइएगा , वह यूं ही बेवजह परेशान होगी।"वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल बोले , "आज तुम्हारे पिता कार्तिक जिंदा होते तो तुम पर बहुत गर्व करते, मैंने तुम्हारे पिता से वादा किया था कि तुम्हारी और तुम्हारी फैमिली का मैं हमेशा ध्यान रखूंगा..  लेकिन आज तुम्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है, उम्मीद करता हूं कि वह भी यही चाहते होंगे..। "प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर भावुक हो गया और वो प्रकाश अंकल को गले से लगाते हुए बोला , " शायद आप ठीक ही कह रहे हैं वैसे काम क्या है।"प्रकाश अंकल तुरंत बोले, "हां... मैं तो यह भूल ही गया था , अब मेरी बात ध्यान से सुनना ।"वीर भी प्रकाश अंकल की बात पर अपना सर में हिलाता है फिर प्रकाश अंकल अपनी बात को जारी रखते हुए बोले , "असल मे हमारी सरकार ने हमसे कुछ बहुत ही जरूरी बातें छुपाई है, हमारे प्लेनेट पर कई जगहों पर मिशन चलाए जाते हैं।"प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर उनसे हैरानी के साथ पूछने लगा, "लेकिन वह मिशंस होते किस तरह के हैं। "वीर की बात सुनकर प्रकाश अकल एक गहरी सांस लेते हैं और वीर को बताते हुए बोले , "यह बात करीब 200 साल पुरानी है, जब हमारी आकाशगंगा के सभी नौ ग्रहों से एस्ट्रॉयड टकराए थे , तब जनशंख्या के ज्यादा नहीं होने से यह बात सरकार की तरफ से दबा दी गई थी । इन एस्ट्रॉयड की बारिश को हम एस्ट्रॉयड अटैक बोले।"प्रकाश अंकल की यह सब बातें सुनकर वीर कंफ्यूजन में प्रकाश अंकल से बोला, "अंकल यह तो में जनता हु पर, आप मुझे मिशन के बारे में बता रहे थे और अब क्या एस्ट्रॉयड की बातों को लेकर बैठ गए ..., सीधे पॉइंट पर आइए ना।"वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल उसे जवाब देते हुए बोले, "वीर बेटा वही सब बता रहा हूं इन्हीं बातों की वजह से यह सभी मिशन की शुरुआत हुई थी।""प्रकाश अंकल पर वह कैसे" वीर क्यूरियस होते हुए प्रकाश अंकल से पूछता है।तब प्रकाश अंकल उसकी बात का जवाब देते हुए बोले, "जो एस्ट्रॉयड अपने प्लेनेट से टकराए थे , वह वैसे रेडियो एक्टिव और नॉन रेडियोएक्टिव सब्सटेंस से मिलकर बने थे..., जब वह हमारे प्लेनेट से टकराए थे तब उन सभी substances में heat और प्रेशर के चेंज होने से reactions होने लगी , उन reactions की वजह से बहुत ही ज्यादा मात्रा में रेडिएशन निकली थी , जिस वजह से वहां के एनिमल्स और प्लांट्स के DNA में म्यूटेशन आ गया था ।वहां के प्लांट और एनिमल्स की शारिरिक मानसिक और बाकी लाइफ फंक्शंस में काफी ज्यादा बदलाव आया...।  इस mutation की वजह से कुछ एनिमल्स बहुत ही ज्यादा पावरफुल बन गए तो वहीं कुछ बहुत ही ज्यादा कमजोर।"प्रकश अंकल की आँखों में ये सारी बातें बताते हुए एक अलग ही चमक थी मनो उन्होंने कोई चमत्कार देखा हो वो थोडा रुकने के बाद फिर बोले, " यह mutated एनिमल्स जिस जोन में रहते हैं, उन्हें हमने अलग-अलग नाम दिए हैं... सबसे पहले जहां सबसे वीक एनिमल रहते हैं ... उस जॉन को हम कंट्री जॉन बोलते है , वही कंट्री जोन में 100 किलोमीटर आगे जहां थोड़े ज्यादा पावरफुल एनिमल से मिलते हैं । उनको हम प्राइमरी जोन बोलते है। ऐसे ही कई  जोन है जहां पावरफुल एनिमल्स मिलते हैं "उसके बाद प्रकाश अंकल वीर की तरफ देखते हैं जो उनकी बातों को ध्यान से सुन रहा था और समझने की कोशिश कर रहा था। प्रकाश अंकल ने फिर से बोलना शुरू किया, " वीर  यह मिशंस इसीलिए चलाए जाते हैं, ताकि हम उन mutated एनिमल्स का शिकार कर सके और उन्हें रेजिडेंशियल इलाके में आने से रोक सकें , अगर वह रेजिडेंशियल एरियाज में आ जाते हैं तो बहुत ही ज्यादा  जान - माल की  हानि होगी , बहुत से लोगों की जान चली जाएगी।"वीर प्रकाश अंकल से बोला, " हम उन जानवरों का मुकाबला कैसे कर सकते हैं।"तब प्रकाश अंकल मुस्कुराते  हुए बोले , "मैजिकल पावर से।"वीर प्रकाश अकल की बात सुनकर हैरानी से बोला, "मैजिकल पावर...!!! कैसी मैजिकल पावर..."प्रकाश अंकल बताते हैं , "वीर अगर तुम्हारी लैंग्वेज में समझाऊं तो यह मैजिकल पावर पूरी तरह से फिल्मों के जैसा है और उनसे थोड़ा अलग "।प्रकाश अंकल कन्फ्यूजन के साथ खड़े वीर की तरफ देखते है और वीर के चेहरे के एक्सप्रेशन को देख कर प्रकाश अंकल वीर को समझाते हुए बोले, " वीर असल मे हमारे पास जितनी जानकारी है, उसके अनुसार जब उन जानवरों में म्यूटेशन आया था तब उन्हें बहुत सी पावर से मिली थी, जैसा कि हर कोई जानता है कि किसी का भी शरीर हो... चाहे वह इनिमल्स का हो या प्लांट्स का वह कुछ एलिमेंट से मिलकर ही बना हुआ होता है , जैसे, wind , fire , lightening, soil , water आदि"" लेकिन अंकल इन बातों को उनकी पावर से क्या लेना-देना " प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर उनसे बीच में ही पूछने लगा।प्रकश अंकल तुरंत बोले, "मतलब है वीर मतलब है , उन एस्टेरॉयड से निकली रेडिएशन की वजह से कुछ जानवर पावरफुल हो गए हैं जिन्हें हम mutated जानवर बोले , लेकिन कुछ जानवर ऐसे हैं जो natural elements को भी अपनी मर्जी से कंट्रोल कर सकते हैं "तभी वीर प्रकाश अंकल को बीच में ही टोकते हुए बोला, " अंकल में कुछ समझा नहीं।""समझाता हूं वीर" प्रकाश  अंकल गहरी सांस लेते हुए बोले।और फिर कुछ उदाहरन देते हुए कहने लगे, "यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा कि सुपर हीरो फिल्म में होता है , हम इन जानवरों को mutated beast बोलते है। यह अपनी मर्जी से कई तरह के elements को काबू करके अपने दुश्मनों पर हमला करके उन्हें खत्म करने में सक्षम हो सकते हैं।"तब वीर उत्सुकता के साथ प्रकाश अंकल से पूछने लगा, "अगर यह जानवर मेरा मतलब mutated beast इतनी ज्यादा ताकतवर है तो हम इनका  मुकाबला कैसे कर सकते हैं।"तब वीर के सवालों का जवाब देते हुए प्रकाश अंकल बोले , " इस दुनिया में कुछ भी असम्भव नहीं है , सब कुछ संभव है , सब जानते हैं कि ह्यूमन बॉडी भी एलिमेंट से मिलकर ही बनी है और हम अगर अपने अंदर की एलिमेंटल पावर को जगा ले तब हम भी एलिमेंट्स को कंट्रोल कर सकते हैं यह एक तरह से जादू ही है।"यह सब सुनकर वीर को समझ नहीं आ रहा था कि वह रिएक्ट कैसे करें , यह सब जानकर वीर भी जल्द से जल्द elements पर काबू करना सीखना चाहता था।