episode 22 in Hindi Drama by Priya Chaudhary books and stories PDF | 50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 22

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50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 22

(जंगलों के बीच एक पुरानी कार की आवाज़ जो धीमे-धीमे चल रही है। रात का सन्नाटा है, लेकिन हवा में रंजना की उन हाई-हील्स की आवाज़ गूँज रही है जो कंक्रीट पर एक लय में पड़ रही हैं। आर्यन का सिर अभी भी भारी है, वह एक अजनबी की तरह रंजना को देख रहा है।)
आर्यन ने रंजना की तरफ देखा। उसकी आँखों में न कोई नफरत थी, न ही कोई पहचान। उसने अपनी बेटी आयशा को अपनी बाहों में कसकर पकड़ रखा था। उसे बस इतना पता था कि उसे इस बच्ची की रक्षा करनी है, लेकिन क्यों? वह यह भूल चुका था।
सीन 1: अजनबी सा साथी
रंजना ने आर्यन के चेहरे के करीब आकर मुस्कुराते हुए कहा, "आर्यन, मुझे पता था कि तुम मीरा का वह नुस्खा आज़माओगे। कितना प्यारा है यह बलिदान, है ना? सब कुछ भूलकर, बस एक पिता की तरह जीना।"
आर्यन ने धीमी और भारी आवाज़ में पूछा, "तुम कौन हो? और हम कहाँ जा रहे हैं?"
रंजना ने एक ठंडी हँसी के साथ कहा, "मैं तुम्हारी सबसे पुरानी दोस्त हूँ। और तुम? तुम मेरे बिज़नेस पार्टनर हो। हम एक बहुत बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, लेकिन फिर तुम अपनी याददाश्त खो बैठे। अब मुझे तुम्हें सब कुछ फिर से याद दिलाना होगा... बिल्कुल वैसे, जैसा मैं चाहूँगी।"
सीन 2: 30वां दिन—धुंधली हकीकत
रंजना आर्यन को उसी पुरानी हवेली के एक गुप्त हिस्से में ले गई, जिसे अभी तक तोड़ा नहीं गया था। वहाँ की दीवारें अभी भी उस 'सन्नाटे' को संजोए हुए थीं जो आर्यन की पूरी ज़िंदगी का आधार था।
"यहाँ देखो, आर्यन," रंजना ने उसे एक बड़े हॉल में खड़ा किया जहाँ हज़ारों फाइल्स रखी थीं। "ये तुम्हारे बिज़नेस की फाइलें हैं। इन फाइलों के ज़रिए ही तुमने दुनिया पर राज किया था। तुम कोई भले इंसान नहीं थे, तुम एक शासक थे।"
आर्यन उन फाइलों को छूने लगा। उसे कोई याद नहीं आ रहा था, लेकिन उन फाइलों को छूते ही उसके हाथों में एक पुरानी आदत उभरी—कागजों को चेक करने की, गलतियाँ ढूँढने की। रंजना उसे वही 'अतीत' दे रही थी जिसे वह अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहती थी।
सीन 3: आयशा की बेचैनी
आयशा, जो अभी-अभी कोमा से जागी थी, उसे सब कुछ याद था। वह जानती थी कि रंजना कातिल है। उसने आर्यन के कान में फुसफुसाने की कोशिश की, "पापा, इसकी बातों में मत आइए! यह वही औरत है जिसने माँ को मारा था!"
लेकिन रंजना ने आयशा की बात काट दी। उसने अपनी जेब से एक डिजिटल टैबलेट निकाला और उसे दिखाया। उस पर कुछ तस्वीरें थीं—आर्यन की और रंजना की, जो एक-दूसरे के साथ बहुत करीब दिख रहे थे। "आयशा बेटा, तुम्हारे पापा का एक्सीडेंट हुआ था, और मैं ही थी जिसने उनका ख्याल रखा। तुम्हें शायद गलतफहमी हुई है।"
आर्यन ने आयशा और रंजना के बीच देखा। उसका दिमाग चकरा रहा था।
सीन 4: 29वां दिन—अंदरूनी विद्रोह
उसी रात, जब सब सो गए, आर्यन के अंदर का 'समीर' (अंतर्मन) फिर से सक्रिय हुआ। उसे याददाश्त तो नहीं थी, लेकिन उसे 'भावना' याद थी। उसे याद था कि वह इस हवेली से नफरत करता है।
उसने अंधेरे में अपनी जेब टटोली। वहाँ वही नोटबुक थी जो रंजना ने उससे छीनी थी, लेकिन उसने एक पन्ना पहले ही फाड़ लिया था। उस पर लिखा था—"रंजना पर भरोसा मत करना। वह कातिल है।"
आर्यन को यह समझ नहीं आया कि यह किसने लिखा है, लेकिन उसे अपनी लिखावट पहचान में आ गई। उसने रंजना के कमरे में घुसने का फैसला किया।
सीन 5: फाइलों का सच
रंजना के कमरे में आर्यन ने वह 'ब्लैक बॉक्स' देखा जिसे उसने मीरा की कब्र से निकाला था। वह अभी भी बंद था। उसने रंजना की मेज पर मौजूद उसके फिंगरप्रिंट्स का इस्तेमाल करके उस बॉक्स को खोला।
अंदर एक पुरानी वीडियो टेप थी। उसने उसे बगल के टीवी पर चलाया। वीडियो में रंजना के पिता और उसके (आर्यन के) पिता एक डील कर रहे थे। रंजना का असली नाम कुछ और था! वह रंजना नहीं, वह उस परिवार की सदस्य थी जिसे आर्यन के पिता ने बर्बाद किया था। वह रंजना नहीं, बल्कि 'मीरा' की बहन थी!
आर्यन का दिमाग फिर से घूमने लगा। रंजना, जो उसे मीरा की दुश्मन लगती थी, वह असल में मीरा की बहन थी जो बदला लेने के लिए आर्यन के जीवन में आई थी।
सीन 6: 28वां दिन—सच का मोड़
रंजना कमरे में आ गई। "तो, तुमने देख लिया? हाँ, मैं मीरा की बहन हूँ। मैं अपना बदला ले रही हूँ, आर्यन। लेकिन जिस तरह से मैंने मीरा को खोया, वैसे ही मैं तुम्हारी इस प्यारी बेटी को तुम्हारी आँखों के सामने तड़पते हुए देखना चाहती हूँ।"
आर्यन के हाथ में अब वह वीडियो टेप था। उसने रंजना को देखा, और अचानक, उसे कुछ धुंधला सा याद आया—मीरा का चेहरा, उनकी शादी, और वह दिन जब रंजना ने उसे पहली बार देखा था।
"तुम बदला लेने आई थी," आर्यन ने शांति से कहा, "लेकिन तुमने मेरे साथ भी वही किया जो मेरे पिता ने किया था। तुमने भी मासूमों को मोहरा बनाया।"
सीन 7: 28 दिन शेष
आर्यन ने कमरे के दरवाजे को लॉक कर दिया। रंजना ने बंदूक निकाली, लेकिन आर्यन अब वह आर्यन नहीं था जो 30 दिन पहले था। उसने रंजना के हाथ से बंदूक छीन ली।
"खेल खत्म, रंजना। भले ही मुझे अपना नाम याद न हो, लेकिन मुझे यह पता है कि क्या सही है और क्या गलत।"
नैरेटर: 28 दिन शेष हैं। आर्यन की याददाश्त तो नहीं आई, लेकिन उसकी रूह ने पहचान लिया है कि दुश्मन कौन है। अब आर्यन को रंजना को सज़ा दिलानी है और अपनी बेटी के साथ इस हवेली से बाहर निकलना है।
(सस्पेंस पॉइंट: तभी बंकर का दरवाजा खुला और वहाँ समीर खड़ा था—वही समीर जिसका आर्यन ने अस्तित्व मिटा दिया था। समीर ने कहा—"आर्यन, अभी तो पिक्चर शुरू हुई है। तुम जिसे अपना दुश्मन समझ रहे हो, वो तो बस एक मामूली मोहरा है। असली मालिक तो वो है जिसे तुमने 20 साल पहले मरा हुआ समझा था—तुम्हारी पहली पत्नी मीरा।" क्या मीरा ज़िंदा है और वही सब कंट्रोल कर रही है?)
लेखक: प्रिया
आर्यन अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ उसके अपने अतीत के लोग ही एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं। क्या मीरा ज़िंदा है? सस्पेंस की आग अब और भी तेज़ होगी... ⏳🖤🔓🔥