(समय )
तीन बच्चो की माँ को पता चला.... तीन महीने बाद का चित्रण स्टेज पे.... ग्रेवाल अच्छी एक्ट कर लेता था... मानना पड़े गा। " पी कर आये है, पी कर जायेगे,
कुछ सकून दे जाओ, हम आज भी फरयादी है। " ये शायरी बलजीत सिंह के आगे रखी थी...". वाह के सिवा कया कहु। " दोनों गंभीर थे। पता नहीं उसके मुँह से निकला..." आज खाना बलजीत कौर के हाथो का खाओ गे.. सच मे। "
तभी रजिदर सिंह आ गया। " हरफ़न मोला चल आज तेरे गांव चलते है.... तूने यार कभी बताया ही नहीं, तुम्हरी बहन और बाबू जी रहते है। " वो एक दम सहम गया।
"हाँ... हाँ... कया हुआ.... बाबू जी ठीक है, आधे सेलरी के पैसे भेज देता हु " रजिदर सिंह गहरे भाव मे।
"बलजीत सिंह को जाने दे काम पर "
"ओके ऐसा ही करता हु "
"अच्छा बलजीत कल मिलेंगे... दोनों ने आगे पीछे कहा"
चुप दोनों।" आख़री अचनाक कया हुआ, तुमने स्क्रिप्ट ही घुमा दी। "
"--स्क्रिप्ट के बच्चे पुलिस तलाश कर रही है तुझे, कया जरूरत थी हीरो बनने की.... " तीन महीने से जयादा हो चूका है।
"चलो थाने चलते है ----" दोनों चुप।
फिर अंत चले गए.. "केस निपटना नहीं था "
वो वही घड़ूस SHO को मिले। " हाँ जनाब मै ही हु आप जिसे इतनी कर्जकुशलता से ढूंढ रहे है। "
"कया MLA बनना चाहते हो टीचर "
"तुमने मुझे मेरे कानून से भदा मजाक कयो किया, जान सकता हु "
"नहीं जनाब गुसे मे कुछ भी...... " रजिदर ने कहा।
"सर वैरी सॉरी, आगे से ख्याल रखेंगे।"
SHO गंभीर अवस्था मे आ गया। "चलो छोड़ दिया " इतना गुस्सा ठीक नहीं होता.... भूतनी के। " जान कर गाल निकाल दी। देखना चाहता था कया करता है लोडा.... "
पर वह ऐसे मूड मे नहीं था... "तब भी यही गाल सुन लेते तो कया सुनामी आ जाती। " चलो छोड़ो, सर। " रजिदर ने कहा। " अबे तू इसका चमचा है... भूतनी के बार बार ------ अभी उसने पूरा भी नहीं किया था लाइन को, एक मुक्का आया जोर से, SHO के जबडे पर पड़ा... लहू से लथ पथ..... टेबल पर ही सिर गिर गया।
वो दोनों ही इतनी जल्दी निकले की बस... " भागते हुए गली मे जो दरवाजा खुला था वही अंदर चले गए।
"कौन है.... कौन है... किसी ने जोर से आँगन मे कहा।
"घबराईये नहीं हम ही है... राजा का ही घर है.... हाँ।"
"जान गए हम प्रोफेसर जी " राजा की छोटी सिस्टर बोली थी। "बैठिये मुँह धो लीजिये। कया हुआ घबराये हुए कयो है आप "
सारा खुलासा कर दिया, रजिदर घबरा रहा था।" डरता कयो है... पापे का पापा ही रहेगा...."
"मै वकील की पढ़ाई पढ़ रही हु... परफेसर ग्रेवाल जी।"
ओह वैरी गुड.... "
"आप की जो भी स्टडी कराई है.. वो आज भी दिमाग़ मे है... "
"ये SHO वाला काम आप ने बहुत ही अच्छा किया... वो आपको अक्सर कया समझता था।"
"अक्ल ठिकाने आ गयी होंगी... "
"पता नहीं जी.... "रजिदर ने कहा।
चलो छोड़ो टोस्टर की भूख मुझे भी, आप को भी लगी है... जेक्शन अभी आया है... जो भोंक रहा है... अगर होता, आप अंदर नहीं आ सकते थे...आप यहां सेफ है।"
"टोस्टर खाने के बाद, थैंक्स कहा।"
"हाँ शायद मै आपका नाम भूल गया हु...."
"मेरा नाम शफाली है... "
"शफाली जी आपको और तंगी नहीं देना चाहते... "
"कयो... बाहर आप को ढूंढ लेगे "
"कोई बात नहीं.... हम कौन सा गुंडे है "
सोच लो एक बार ------------------ " राजे को आने दीजिये। "
(चलता )👍 नीरज शर्मा का जो लिखा ये स्टेज प्रोग्राम थोड़ा गमबीर हो जायेगा।