Quotes by Jeetendra in Bitesapp read free

Jeetendra

Jeetendra

@a9560
(1.2k)

जब तुम साथ नहीं होंगे,
मेरी सुबह अधूरी लगेगी 🌅💔,
कड़कती चाय की चुस्कियों में भी ☕
तुम्हारी यादें घुली होंगी… 💭
तुम्हारी हँसी की गूँज नहीं होगी 😔,
मेरे कमरे की खामोशी में 🏠
सिर्फ तुम्हारे जाने का खालीपन गूँजेगा… 🌙
हर रास्ता तुम्हारे नाम का लगेगा 🚶‍♂️,
हर मौसम तुम्हारी तस्वीर से भरा होगा 🍃📸,
और मैं उन पलों में खो जाऊँगा
जहाँ तुम्हारा हाथ मेरा हाथ थामे था… 🤝❤️
जब तुम साथ नहीं होंगे,
दिल हर धड़कन में तुम्हें पुकारेगा 💓,
और आँखें उन खिड़कियों की ओर टकटकी लगाएंगी 👀
जहाँ तुम कभी मेरी आँखों में मुस्कुराए थे… 😊
तुम दूर सही, पर तुम्हारी यादें पास हैं 🌌,
मेरे हर साँस, मेरे हर ख्वाब में… 🌠
और मैं समझ जाऊँगा,
कि प्यार सिर्फ साथ होने से नहीं,
दिल में होने से जिंदा रहता है… ❤️‍🩹

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इश्क़ की राह में हर कदम इबादत बन गया ❤️
तेरे इंतज़ार में मेरा हर लम्हा सजदा बन गया 🤲

रात भर जागते हैं तेरी यादों के साथ 🌙
इश्क़ भी तू, इंतज़ार भी तू, मेरी हर इबादत भी तू ही साथ ✨

तेरी एक झलक के लिए दिल धड़कता है हर बार 💓
इंतज़ार भी इबादत है, जब हो तेरा प्यार 🤍

मस्जिद भी गया, मंदिर भी गया तेरे नाम के साथ 🕌⛪
इश्क़ ने सिखा दिया, इंतज़ार ही असली इबादत की बात 🌹

तेरे बिना हर खुशी अधूरी लगती है 😔
इश्क़ में इंतज़ार भी मीठी इबादत सी लगती है 🌸

जब से तुझसे दिल लगा लिया है ❤️
हर इंतज़ार को इबादत बना लिया है 🤲

तेरी राहों में आँखें बिछाए बैठे हैं 👀
इश्क़ में इंतज़ार को भी इबादत बनाए बैठे हैं 🌙

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सुबह की धूप जब खिड़की से अंदर आती है,
तो वो सिर्फ रोशनी नहीं लाती…
वो रात भर की थकान भी चुपचाप समेट ले जाती है।

ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही है।
हर दिन कोई बड़ी जीत नहीं मिलती,
कभी सिर्फ चाय का गरम कप,
किसी अपने की हल्की-सी मुस्कान,
या रास्ते में मिली ठंडी हवा ही काफी होती है
दिल को फिर से चलने के लिए।

आज का दिन भी वैसा ही हो सकता है।
शायद कोई बड़ा चमत्कार न हो,
पर अगर मन शांत रहे
और कदम धीरे-धीरे सही दिशा में बढ़ते रहें,
तो वही दिन सबसे अच्छा बन जाता है।

सुप्रभात।
आज थोड़ा कम सोचिए,
थोड़ा ज्यादा जी लीजिए।

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अगर एक लड़का कहे कि "मैं हर रोज़ झूठ बोलता हूँ", तो क्या आज उसने सच बोला या झूठ?

फ्रेंड्स, इसका आंसर कमेंट में दीजिए।

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तुम मुझसे रूठी हो,
पर मेरी खामोशी में भी तुम्हारा नाम है।
हर पल तुम्हारी हँसी की आवाज़ मेरी सांसों में गूंजती है,
और हर खामोश लम्हा तुम्हारी याद से भर जाता है।

मैं जानता हूँ, मेरी बातों में कभी-कभी तूफ़ान आ जाते हैं,
पर मेरे दिल के कोने में सिर्फ़ तुम्हारी जगह है।
तुम्हारे बिना हर रंग फीका लगता है,
और हर गीत अधूरा सा लगता है।

अगर मैं कहूँ कि तुम्हारे बिना दुनिया बेरंग है,
तो क्या तुम मुझे माफ़ कर दोगी?
अगर मैं हाथ बढ़ाऊँ और कहूँ,
“चलो फिर से हँसें, साथ में,”
क्या तुम उस पल को फिर से मेरे साथ जीओगी?

मैं वादा करता हूँ,
ना कोई बड़ी बात होगी, ना कोई झगड़ा याद रहेगा।
सिर्फ़ तुम और मैं,
और वो नन्ही-सी मुस्कान जो तुम्हारे होंठों पर लौट आए।

तो क्या तुम मेरी दुनिया में फिर से लौटोगी,
और मेरे हर एक दिन को रोशनी से भर दोगी?

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नाम: खामोशी में तेरी

तुम पास हो, फिर भी दूर हो,
हर नजर मिलती है, पर हाथ नहीं मिलता।
कदम तेरे मेरे पास आते हैं,
पर राहें अचानक किसी अजनबी की तरह मोड़ लेती हैं।

तुम हंसते हो, और मेरी धड़कनें बढ़ जाती हैं,
शब्दों में कहीं दबा सा,
कोई सवाल उठता है—
क्यों हमारी बातें अधूरी रह जाती हैं?

हवा में तेरी खुशबू आती है,
और मैं खुद को रोकता हूँ,
ना छू लूँ, ना बोल दूँ,
पर दिल की ख्वाहिश, हर पल बढ़ती है।

तेरी आँखों में जो झलक है,
वो कहती है—“आओ।”
और आवाज़ मेरी,
सिर्फ़ खामोशी में फँस जाती है।

हर रात यही सोचता हूँ,
क्या मैं सही समय पर पहुँचूँगा?
या हमेशा इस खामोशी में,
तेरे करीब रहकर दूर ही रह जाऊँगा?

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