Quotes by archana in Bitesapp read free

archana

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@archanalekhikha
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अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद आती हैं, तो मेरी आवाज़ में इन्हें सुनने के लिए मेरे YouTube चैनल पर ज़रूर आएँ

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एक बात तो तय है...
किसी से जबरदस्ती प्रेम नहीं पाया जा सकता।
जिसे जाना होता है, वह एक न एक दिन चला ही जाता है।
और सम्मान भी कभी माँगकर नहीं मिलता,
चाहे आप कितने ही अच्छे इंसान क्यों न हों।
जहाँ प्रेम और सम्मान के लिए हाथ फैलाने पड़ें, वहाँ चुपचाप आगे बढ़ जाना ही आत्मसम्मान की पहली निशानी है। ❤️
- archana

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🌸 मेरे प्रिय पाठकों,
आप सभी का प्यार और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। ❤️
जब भी मैं कोई नई कहानी लिखती हूँ, सबसे पहले आप सभी का चेहरा याद आता है। आपकी प्रतिक्रियाएँ मुझे हर दिन कुछ नया और बेहतर लिखने की प्रेरणा देती हैं।
आज मैं आपसे एक छोटी-सी खुशी साझा करना चाहती हूँ।
अब आप मेरी कहानियाँ सिर्फ़ पढ़ ही नहीं, बल्कि मेरी अपनी आवाज़ में सुन भी सकते हैं। 🎙️
मेरे YouTube चैनल "Ragini Story Series" पर मेरी नई कहानी "किराए की दुल्हन" का पहला एपिसोड आ चुका है।
अगर आपने मेरी कहानियों को पढ़कर कभी महसूस किया है कि काश इन्हें सुन भी पाते... तो अब आपका इंतज़ार खत्म हुआ।
💛 एक बार YouTube पर "Ragini Story Series" ज़रूर खोजिए।
आपका एक Subscribe, एक Comment और आपका प्यार मेरे लिए बहुत मायने रखता है।
आशा है, जैसे आपने मेरी कलम को अपनाया है, वैसे ही मेरी आवाज़ को भी अपना प्यार देंगे। 🌸
स्नेह सहित,
✍️ अर्चना कुमारी ❤️

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हर पति एक जैसा नहीं होता। पत्नी के प्रति उसका व्यवहार अक्सर तीन तरह का देखने को मिलता है—

पहला पति वह होता है जो समझदारी से पत्नी का साथ देता है। अगर घर वाले पत्नी से नाराज़ हों, तो वह बिना किसी का अपमान किए, बड़े धैर्य और बुद्धिमानी से पत्नी का पक्ष रखता है। वह ऐसा संतुलन बनाता है कि न पत्नी का सम्मान कम हो और न ही परिवार को बेवजह ठेस पहुँचे। ऐसे पति घर को जोड़ते हैं, तोड़ते नहीं।

दूसरा पति वह होता है जिसे हमेशा यही डर रहता है कि कहीं परिवार वाले नाराज़ न हो जाएँ। इसलिए वह पत्नी की भावनाओं की परवाह कम करता है। चाहे पत्नी का दिल टूट जाए, उसकी आँखों में आँसू आ जाएँ, लेकिन वह परिवार वालों के सामने कभी पत्नी के लिए नहीं बोलता। ऐसे रिश्तों में पत्नी धीरे-धीरे अकेली महसूस करने लगती है।

तीसरा पति सबसे उलझा हुआ होता है। पत्नी के सामने तो उसकी हाँ में हाँ मिलाता है और परिवार वालों के सामने परिवार की तरफ हो जाता है। इतना ही नहीं, जब बात रिश्तेदारों, पड़ोसियों या समाज तक पहुँचती है, तो अपनी पत्नी को ही गलत साबित कर देता है ताकि उसकी अपनी छवि अच्छी बनी रहे। ऐसे पति किसी के भी सच्चे नहीं होते, क्योंकि वे हर जगह सिर्फ अपना फायदा देखते हैं।

रिश्ता तभी मजबूत बनता है जब पति सच का साथ दे, चाहे गलती पत्नी की हो या परिवार की। न्याय और सम्मान ही हर रिश्ते की सबसे मजबूत नींव होते हैं।

चौथा पति
चाहे पत्नी अपनी जगह पूरी तरह सही हो, फिर भी वे परिवार, रिश्तेदारों और समाज के सामने उसी की गलतियाँ गिनाते रहते हैं। इतना ही नहीं, अगर उनका किसी और से संबंध हो, तो उस रिश्ते को छिपाने के लिए भी पत्नी को ही दोषी ठहराते हैं।
वे कहते हैं, "तुम्हारे साथ मुझे कभी सुकून नहीं मिला... घर में हमेशा क्लेश रहता था... इसलिए मैं किसी और के पास चला गया।"
लेकिन सच यह है कि किसी रिश्ते में समस्या होना और किसी का विश्वास तोड़कर अफेयर करना, दोनों अलग बातें हैं। अपने फैसले की जिम्मेदारी लेने के बजाय जब कोई अपनी बेवफाई का ठीकरा हमेशा पत्नी के सिर फोड़ देता है, तो यह जिम्मेदारी से बचने और अपने व्यवहार को सही ठहराने की कोशिश होती है।
एक अच्छा जीवनसाथी अपनी गलतियों की जिम्मेदारी भी स्वीकार करता है। हर गलती का दोष केवल पत्नी पर डाल देना न तो न्याय है और न ही एक स्वस्थ रिश्ते की निशानी।

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हर पति एक जैसा नहीं होता, लेकिन कुछ पति ऐसे भी होते हैं जो अपनी पत्नी को हर जगह गलत साबित करने की कोशिश करते हैं।

चाहे पत्नी अपनी जगह पूरी तरह सही हो, फिर भी वे परिवार, रिश्तेदारों और समाज के सामने उसी की गलतियाँ गिनाते रहते हैं। इतना ही नहीं, अगर उनका किसी और से संबंध हो, तो उस रिश्ते को छिपाने के लिए भी पत्नी को ही दोषी ठहराते हैं।

वे कहते हैं, "तुम्हारे साथ मुझे कभी सुकून नहीं मिला... घर में हमेशा क्लेश रहता था... इसलिए मैं किसी और के पास चला गया।"

लेकिन सच यह है कि किसी रिश्ते में समस्या होना और किसी का विश्वास तोड़कर अफेयर करना, दोनों अलग बातें हैं। अपने फैसले की जिम्मेदारी लेने के बजाय जब कोई अपनी बेवफाई का ठीकरा हमेशा पत्नी के सिर फोड़ देता है, तो यह जिम्मेदारी से बचने और अपने व्यवहार को सही ठहराने की कोशिश होती है।

एक अच्छा जीवनसाथी अपनी गलतियों की जिम्मेदारी भी स्वीकार करता है। हर गलती का दोष केवल पत्नी पर डाल देना न तो न्याय है और न ही एक स्वस्थ रिश्ते की निशानी।

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"करते होंगे लोग नशा सिगरेट और शराब का…
हमें तो नशा है कागज़, कलम और दवात का।"


"लोग ग़म भुलाने के लिए
शराब का सहारा लेते हैं…
हम ग़म को कागज़ पर उतार देते हैं।
उनका नशा बोतल में होता है,
हमारा नशा कलम और अल्फ़ाज़ में। ✍️🥀"

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