Hey, I am on Matrubharti!

जिंदगी ओ जिंदगी

कभी फुलोंकी सेज बन जाती है जिंदगी;

कभी कांटो का बिस्तर हो जाती है यही जिंदगी ।

कभी खुशी है; तो कभी दुख है जिंदगी ।

हसाती है यह कभी तो कभी रुलाती है जिंदगी ।

कुछ भी हो, बहुत ही अजीब है यह जिंदगी

अंत तक समझ नहीं सकते है हम, आखिर क्या चीज़ है यह जिंदगी

Armin Dutia Motashaw

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Dearest darling Dad

Wishing you a Happy Father's Day; ADM Big hug n a thank you, I wish to say

I never ever thought Mum n you would be right besides me, through my crisis; all the way.

Messages I have received many times, through dreams or as ideas into me planted;

Thank Ahura I sincerely do, for this wonderful security He has to me granted.

Thank you both for enveloping me in your love, safe n secured keeping me;

When mercilessly thrown I was by destiny, into a deep dark roaring sea.

Parents, their children love beyond life, this I believe n very well know;

You both with me, spiritually present n protective are, feel I that cosmic flow

Keep us always under your spiritual protection, the way you do, night n day;

May you both n our dear ones to higher realms progress; for this, I daily pray.

Your ever loving daughter
Anar

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COMMERCE

Sadly money n influence have taken over the beauty of closeness in relationships.

Commerce today is important very, really proactive; not actual relationships

Modern youth/ children, money respect, more than their parents;

Siblings their spouses love more than their own blood; sad moments !

Daughters-in- law, even call elderly parents- in-law, dustbins;

Most pathetic to watch are such actual daily life scenes

Education should, our humility increase, instead fans it, our ego's fire

Watching all this decline in Your creation; Lord, doesn't it, You ire?

Commerce n science, instead of improving the situation, corrupts our mind

Religion today, commerce promotes n sadly divides mankind.

Armin Dutia Motashaw

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भरम

बस एक झलक पाते ही, आपके ख़यालो में हो गए मशरूफ;

सपनों की दुनिया में खो गए; और यहां से शुरू हुई तकलीफ़

देखा जो आपको, अपने ही दिल के हाथो, हो गए मजबूर

इश्क़ के हाथो बिक गए; आप के नाम से जुड़ कर, होना था मशहूर ।

पर आंख खुली तो समझ में आया, यह था एक जूठ, एक भरम

समझाया अपने आप को, शायद ऐसे अच्छे नहीं थे हमारे करम

इसी लिए बन के हम आंधी और तूफान से अनजान;

बिना समझे, जला दिया एक दीया आंधी में; जगा लिया दिल में तूफान

जीवन भर डोलेगी नैया, मिलेगा नहीं कभी साहिल

डूब जाएगी यह कश्ती, गहरी है झील; मिलेगी नहीं कभिभी मंज़िल ।

Armin Dutia Motashaw

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ख्वाहिशें

ख्वाहिशें मरती नहीं, न तो भुलाई जाती है ;

यह तो बस यादे बन के, हमें अक्सर सताती है ;

कभी कभी तो यह, हमें बहुत रुलाती भी है ।

खाहिशे मेरी, थी बहुत छोटी, फिर भी न मिली,

तब किसी ने कहा," प्रीत प्रेम है दोनों ही किम्मती ;

ये आसानी से मिलते नहीं, गलतफहमी है यह तेरी "

"आज के दौर में सच्ची प्रीत, सच्चा प्यार मिलता नही ।

वफा, दोस्ती, ईमानदारी की करना नहीं तु अपेक्षा"

तब लगा, यह "लोन" के ज़माने में गाडियां, घर मिल भी जाए;

पर मुफ्त में भगवान ने जो दी है भावनाए, वोह आजकल मिलती नहीं ।

मैंने पूछा, "तो क्या इंसान ख्वाहिशें रखनी छोड़ दें ?"

तब कहा उन्होंने, "बालक दिमाग से काम लो, दिलवालों की दुनिया अब रही नहीं"

ख्वाहिशें मेरी, मेरे मन में ही रह गई, जमाना जीत गया, मै हार गई ।

Armin Dutia Motashaw

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Even if rich ; of relations take care
Happiness n sorrow with them share
With them, your assets don't compare
This lead may to jealousy, poisoning the air.

Suspicion n ego make a deadly pair
Your misunderstandigs sit down n share.
Clear your doubts giving a chance fair
Relations are more important than money, DO TAKE CARE.

Armin Dutia Motashaw.

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प्यासी धरती करे पुकार

धूपमें तप के हो गई हूं मैं, जलता हुआ अंगार; कहे बिचारि यह धरा

चाहिए अब मुझे ठंडी ठंडी बौछार, और श्रृंगार सुंदर और हरा

नदियाँ हो रही है मेरी खाली, और सागर पानी से खूब है उभरा

सालभरकी प्यास बुझाने मेघराजको मैंने है, किया पुकार

आकाशको की है मिन्नतें हज़ार, जी भरके खोल दे आज तेरे द्वार

जी भर के मुझपे बरसना आज, सुन ले, इस धरतिने है तुझे पुकारा

ऐ हवा, लाना तू बदरीयां काली, ओ बदरी बरसा जा जल की धारा

आत्मा है मेरी प्यासी, तृप्त कर दे तू मुझे आज, कर दे मुझे हरा, ओ मेरे यारा

झूम झूमके बरस, प्यासी धरती आज करती है तुझे अंतरमनसे पुकार

बरसना होगा अब तुझे, तन मन है मेरा प्यासा, निभाना होगा तुझे वादा-ए- प्यार

मेरा अंतर है प्यासा, तुझे बरसना होगा यहाँ, निभाना चाहती हूं मैं यह व्यवहार

याद रखना सदा यह बात, प्यार तो आखीर प्यार है, नही कोई व्यापार ।

Armin Dutia Motashaw

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बोज़

तुम्हारे जानेसे, आज हम, सबके लिए और अपने लिएभी, एक बोज़ बन बैठे हैं;

माझी बगैर की नैया की तरह, संसार सागरकी लहरोंकी जोरदार मार खाते हुए, बैठे हैं

लोक शायद डरते है, कुछ करना न पड़े हमारे लिए, उन्हें हमारा कोई बोज़ उठाना न पड़े

मझधार में जब मांझी छोड़ देता है नाव, तो लोक देखते हैं उस नावको यू डूबते हुए; मज़ा लेते है वह, खड़े खड़े ।

कहीं कोई जिम्मेदारी उनपे नही आ जाये, यह डरसे हमें वो अब देखने है लगे;

जिंदगीने यू अचानक करवट बदली, की हम अब सबको एक पहाड़ जैसे पत्थरका बोज़ लगने लगे

रिश्ते इतने कमजोर है, यह कभी नहीं सोचा था हमने; बलकि रिश्तोपर बड़ा नाज़ था हमे

यह गलतफहमी निकल गयी है अब, आज यह बोज़ लिए जिंदा खड़े हैं; भगवान दे सहारा हमे

Armin Dutia Motashaw

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A TREE TALL

Now stood here, absolutely alone, all by itself, yet looking stately, a tree tall

Time had taken the rest away, leaving it lonely, all alone by itself stood, this single tree tall.

All its leaves it shed, its branches almost dry; weeping with excruciating pain, during this fall

With so many of them, right besides it, happy it was, accompanied n protected by them all.

Then came a time, when one by one the rest fell, it sadly stood, grimly watching this all.

Today even without autumn, it looks leafless n bare, all alone, eagerly waiting to fall

Birds few do come to chirp, but nestle they don't; insects some, occasionally do near it crawl.

Without them all, its greenery n charm has gone, its leaves rustling, awaiting God's call

Armin Dutia Motashaw

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ચાલો થોડુંક વિચારીએ આજે

માતાની સાથે જોડાયેલી, કપાઈ જાય છે જેમ જન્મતાજ શિશુની નાભિ,

થાય છે એવીજ હાલત, જ્યારે થઈ જાય છે ભાઈ વિદાય અને રહી જાય છે એકલી, ભાઈ વિનાની ભાભી.

સ્નેહી સંબંધીઓ, ગભરાય છે યા કતરાય છે; જુવે છે જમણી બાજુ જો ભૂલેથી દેખાઇ જાય ભાભી, ડાભે

માનવ કેટલો સ્વાર્થી થઈ શકે છે, કેટલો જલ્દી બદલાઈ જાય છે; શું તું આં દૃશ્યો જુવે છે, બેસી આભે?

રિષતાઓ ભુલાવી બેસે છે લોકો કેટલી સહજતાથી, સરળતાથી; કાઈ રહ્યું નથી, બોલું શું હું હવે આગળ

જઝબાત છે દબાવી રાખેલા, પણ આંસુ બની, ઉમટી પડે છે કયારેક ક્યારેક; ભલે દેખાય બહારથી કોરું, આં કાગળ.

માનવને સહારાની જ્યારે સૌથી વધારે જરૂર હોય છે, ત્યારે ખાલી તમારો હાથ મુકજો એને ખભે

તમારી સલાહની એને જરૂરત નથી જરાયે; સલાહ તો હોય છે મફત, માનવોના લબે લબે.

બે બોલ એવા બોલીએ, કે શાંતિ મળે એ દુઃખી સ્વજનોને, પીડા એમની ઘટે થોડી

આં બાબતે, ચાલો થોડુંક વિચારીએ આજે; તમને બધાંને, વિનંતી કરું છું હું, કર જોડી

Armin Dutia Motashaw

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