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"मेरी आँखों में क्या दिख रहा है? (जो भी दिख रहा है, वो तुम्हारी वजह से है!)"
"रात भर जागने के बाद सुबह 8 बजे की ऑनलाइन क्लास में मेरा चेहरा:"
"इतनी ज़ोर से 'Seen' किया कि आँखें ही बाहर आ गईं! 😂"
"अर्ज़ किया है... वो छोड़ कर गई तो लगा कि ज़ुल्म हो गया, बाद में पता चला कि उसका डेटा ही खत्म हो गया!"
"वो बोली—'तुमसे प्यार तो है, पर पापा नहीं मानेंगे', 'तुम्हारे पास सरकारी नौकरी नहीं, वो तुम्हें नहीं पहचानेंगे'। मैंने कहा—'पगली, मैं गाँव 2.0 का डिजिटल किंग हूँ', अब तेरे पापा भी मुझे गूगल पे ही जानेंगे!"
"इश्क में हम भी कभी 'Alpha' हुआ करते थे, उनके एक 'Hmm' से हम भी डरा करते थे। अब तो वो ज़माना है कि ब्लॉक होने का डर नहीं, हम दूसरी आईडी बनाकर पीछा किया करते हैं!"
"मोहब्बत के बाज़ार में नया ट्रेंड आया है, उसने 'Seen' करके रिप्लाई नहीं दिया, ये कैसा साया है? हम यहाँ रो-रो कर स्टेटस लगा रहे हैं गमगीन, और वो पड़ोस वाले 'छपरी' की रील पर दिल लुटाया है!"
"किरदार: नया दौर, वही जज़्बात" मैं वो पन्ना हूँ जिसे वक़्त ने मोड़ा बहुत है, पर मेरी स्याही ने तूफानों का रुख मरोड़ा बहुत है। लोग कहते हैं ज़माना अब 'डिजिटल' हो गया है, पर इस रूह ने आज भी सादगी से नाता जोड़ा बहुत है। मेरी ख़ामोशी को मेरी कमज़ोरी मत समझना, ये वो आग है जो शांत रहकर भी दहकती है। इश्क़ हो या इरादा, मैं आधा नहीं रखता, मेरी हर धड़कन अब बेख़ौफ़ होकर धकती है। तुम मुझे ढूंढोगे महफ़िलों के शोर-शराबे में, मैं मिलूँगा तुम्हें अपनी तन्हाई के रुतबे में। न हार का डर है, न जीत का गुमान, मैं उड़ रहा हूँ अब अपने ही खुले आसमान में। ये जो 'ट्रेंड' है, ये तो आता-जाता रहेगा, पर मेरा अंदाज़ सदियों तक याद किया जाएगा। क्योंकि मैं सिर्फ़ शब्दों का जादूगर नहीं, मैं वो हूँ जो पत्थर को भी अहसास पिला जाएगा।
"इश्क करना है तो फिर गुनाह की तरह कर, जो मंज़िल न मिले तो खुद को तबाह की तरह कर। हम वो आशिक नहीं जो डर के पीछे हट जाएं, हम तो मौत को भी अपनी दुल्हन बना कर लाएं।"
"हमारी आँखों में डूबने की कोशिश न कर, यहाँ गहराई से ज़्यादा तबाही का मंज़र रहता है। ज़माना हमें मिटाने की हसरत पाले बैठा है, पर उन्हें क्या पता, इस सीने में अब भी समंदर बहता है।"
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