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कहती है मेरे चाहने वाले बहुत हैं। बेशक होंगे ! मगर तेरे चहाने वाले बचते कहां हैं!! - bk DHANERIYA
लोग कहते दुनिया का नाश विज्ञान करेगा लगता है लोग इश्क करना भूल गए हैं - bk DHANERIYA
युद्ध हमारे पुरखों ने भी लड़े थे वे लड़े थे बीमारी से गरीबी से साहूकारों की हैवानियत से भूँख से जर्जर शरीर से अपने मासूमों की चीख से लड़े थे जातिवाद के चक्र व्यूह से वो लड़े थे बिना धोती के कफन के रोटी के बस उन्हें तमगे नहीं दिए गये थे न ही नाम लिखे गए दीवारों पर नहीं इतिहास के पन्नों पर उन्हें नजर अंदाज कर दिया समाज ने धर्म ने गांव ने शहर ने देश ने उनके अपनो ने अनायाश उन्होंने जंग को खत्म नहीं किया वे वीर गति को प्रात हुए मगर किसकी को भनक तक नहीं होने दिया न ही हिसाब मांगा अपनी मर्दानगी का जवानी का कहानी का उन्होंने जंग की कुछ बेशकीमती यादें अपनी पीढ़ियों को सुनाई और चल बसे साहूकारों की बनाई कहानी के पात्रों के संग बैठ कर भैंसे पर जिन्होंने ने नसीब नहीं होने दिया जिंदगी भर आराम खाना पानी और रहना नाही ही वादा किया अगले जन्म में फिर से जंग लड़ने का क्यूंकि भरोसा उठ गया ऊपर से ओर ऊपर वाले से बे लौटेंगे तो बहस करेंगे कोर्ट में बिना वकील के सबूत के गवाह के और में दावे के साथ कह सकता हूं उनकी जीत मानी जाएगी हर जंग में बिना तलवार के भाले के तीर के तोप के
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