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Dr Darshita Babubhai Shah

Dr Darshita Babubhai Shah Matrubharti Verified

@dbshah2001yahoo.com
(2.3m)

मैं और मेरे अह्सास
बरसात में
बरसात में इश्क़ वालों के हौसले बढ़ जाते हैं l
हुस्न वाले निगाहों से मोहब्बत पढ़ जाते हैं ll

मौसम की या इश्क़ की इंतिहा ही कहो कि l
बादलों के पार पहुँचने ऊपर चढ़ जाते हैं ll

आहलदायक नशीले से माहौल में दौनों ही l
बारिस में भिगकर भिगोकर सज जाते हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास
बधाई हो बधाई
बधाई हो बधाई विरा शज़र पर बहार आई l
खुशीयों के मारे बयार ने शहनाई बजाई ll

चौतरफ फ़िज़ाओं में खुशनुमा खुशबु फेला l
उपवन में रंगबिरंगी फूलों से डाली सजाई ll

हवाएँ भी रंगीन मिजाज की होती है कि l
कायनात में चारो ओर की खुशबु लाई ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास
जिंदगी के सलीब
जिंदगी के सलीब के साथ जीना सीख लो l
कड़वे मीठे सभी बोल को पीना सीख लो ll

बड़े से बड़ा ज़ख्म भी वक्त भर देगा तो l
खामोश रहकर ही मुँह सीना सीख लो ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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તરસી રહ્યા છે લોકો,
વરસી જાય તો સારું.
સખી
દર્શિતા બાબુભાઇ શાહ
- Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास
आसमान
जीने के लिए एक मुट्ठी आसमान चाहिए l
कलि को खिलने के लिए बागबान चाहिए ll

प्यार मोहब्बत तो बच्चों का खेल नहीं है l
हुस्न का दिल जीतने को आहवान चाहिए ll

पैसे की बोलबाला इंसान की किमत नहीं l
आज कल सब को बड़ा खानदान चाहिए ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

सुलगता इश्क़
सुलगते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं l
छलकते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

मुलाकात की तड़प इस तरह बढ़ गई कि l
तडपते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

सुलगता इश्क़
सुलगते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं l
छलकते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

मुलाकात की तड़प इस तरह बढ़ गई कि l
तडपते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

युगों से तरस गई निगाहें देखने के लिए l
तरसते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

सुलगता इश्क़
सुलगते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं l
छलकते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

मुलाकात की तड़प इस तरह बढ़ गई कि l
तडपते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

युगों से तरस गई निगाहें देखने के लिए l
तरसते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

सुलगता इश्क़
सुलगते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं l
छलकते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

मुलाकात की तड़प इस तरह बढ़ गई कि l
तडपते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

युगों से तरस गई निगाहें देखने के लिए l
तरसते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

सुलगता इश्क़
सुलगते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं l
छलकते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

मुलाकात की तड़प इस तरह बढ़ गई कि l
तडपते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

युगों से तरस गई निगाहें देखने के लिए l
तरसते इश्क़ से सीने में सुनामी आई हैं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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