Quotes by Captain Dharnidhar in Bitesapp read free

Captain Dharnidhar

Captain Dharnidhar Matrubharti Verified

@dharnidharpareek8400
(1.4m)

आकाश से गिरती बूंद ने सोचा मै अनजाने पथ पर बढ रही हूँ ,मेरा क्या होगा ? क्या मै तपते रेगिस्तान मे गिरूंगी या किसी विषधर के मुख का ग्रास बनूंगी या किसी धरती मे बोये बीज पर गिरकर उसे पोषित करूंगी , जो भी हो कर्म पथ पर बढना है , इसी सत्संकल्प ने उसे सीपी के मुख मे पहुंचा दिया वह मोती बन गयी । अतः गतिशील रहो सत्संकल्प से कर्म करते रहो तो परिणाम सुन्दर ही होता है

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जीवन के तीन उत्सव
जन्म विवाह और मृत्यु
पहला जन्म का उत्सव स्वयं नही मनाता घर वाले मनाते हैं । यह महत्वपूर्ण इस लिए है इसमे परिवार मे बढोतरी होती है , विवाह मे भी बढोतरी होती है इसमे स्वयं की सहभागिता महसूस होती है । यह रहन सहन आचार विचार मे परिवर्तन लाता है । तीसरा है मृत्यु का उत्सव, इसम भीे स्वयं की सहभागिता रहती है उत्सव की अनुभूति होती है या नही कह नही सकते । इन उत्सवो की समानता देखो एक मे थाली बजती है दूसरे मे ढोल बजता है तीसरे मे शंख घड़ावल बजता है । फर्क इतना है दो मे संयोग होता है तीसरे मे वियोग होता है । दो मे हंसी खुशी नृत्य गीत होते है तीसरे मे रूदन होता है ।
आध्यात्मिक रूप से देखे तो त्रिमूर्ति ब्रह्मा का निर्माण वृद्धि, पालन संहार दिखाई देते हैं । मृत्यु के भय से ही दर्शन शास्त्र का ज्ञान होता है ।

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दोहेता का जन्म नाना नानी की आंखो मे खुशी की चमक ला देता है । नाना नानी मिठाई बांटते है ।
बेटी आरही है यह सुनकर योजना बनने लगती है ससुराल मे घी कम खिलाया है हम ओर घी खिला देंगे बेटी को ।
यही संसार है यही मोह माया है

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दो शब्द है - निगाहे चुराना
निगाहे यानि दृष्टि और चुराना का मतलब चोरी कर लेना, चोरी वह है जो मालिक की बिना अनुमति लिए किसी वस्तु को ग्रहण कर लेना ।
यहां पर भी निगाह चुराने का भाव यह है जिसकी निगाह है वह छुप छुपकर बार बार देखे और ऐसा करते देख लेने पर दाये बाये झांकने लगे।
- Captain Dharnidhar

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हमारा नाम माता पिता या दादा दादी रखते हैं ,यदि वह सुन्दर नही रखते तो ?
हमारे मित्र अजीब मुंह बनाते

- Captain Dharnidhar

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मनुष्य श्रेष्ठ है या जानवर ?
उत्तर- जानवर मनुष्य से श्रेष्ठ तब हो जाते है जब मनुष्य अपनी मानवता छोड़ देते हैं । मानवता प्राणी मात्र का हित करना, प्रकृति का संरक्षण करना, अपने ये संस्कार अपनी संतानो को देना , जीवो और जीने दो का भाव आचरण मे लाना ।
जानवर अपने स्वभाव वश आचरण करते है किन्तु मनुष्य का स्वभाव जीव मात्र का कल्याण करना है ।

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शरीर की सुन्दरता मुख से मुख की सुन्दरता आंखो से दिखती है ।
मन की सुन्दरता विचारो से, विचारो की सुन्दरता आचरण से दिखती है ।
-कैप्टन
- Captain Dharnidhar

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हमारी पीढी मे पिता को देखकर पुत्र कुछ बोलते नही थे, ऐसा वे इसलिए करते थे, क्योंकि हमारी पीढी के हृदय मे प्रेम का अनुशासन होता था ।
आज की पीढी अनुशासन क्या है जानती ही नही, पुत्र के सामने माता पिता कलह न हो इस लिए मौन रहते है । हमारी बूढी आंखे आशंकाओ से घिरी रहती है । मरने का डर नही है हम इस पीढी की मानसिकता समझते है ।
आज की पीढी कर्तव्य भूल गयी है अधिकार याद रखती है ।
- कैप्टन

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*आनंद*
*आनंद दुर्जन और सज्जन दोनो लेते हैं*
एक फर्क है - दुर्जन दूसरों को दुःख देकर आनंद लेता है
सज्जन- दूसरों के दुःख दूर करके आनंद लेता है ।

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*🙏सवाल यह नहीं कि*
*सुंदर कौन है ।*
*सवाल यह है कि*
*हम सुंदर किसे मानते हैं।🙏*