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GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

@ganeshptewarigmail.com064906

दुख में भी उत्तम पुरुष, चलता नहीं अलीक। कान झुकाकर सिंह ज्यों, लेता कभी न भीख।।
दोहा --497
(नैश के‌ दोहे ‌से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'

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कलही होता अधम नर, मध्यम चाहे मेल। उत्तम चाहे मान को, यही जगत‌ का खेल।
दोहा--496
(नैश के‌ दोहे ‌से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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विषय भोग से मनुज में, बढ़ती सदा अशान्ति। जैसे जलती अग्नि को, करे नहीं घृत शान्ति।।
दोहा --495
(नैश के‌ दोहे ‌से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'

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राज्य सफल होता तभी, जब हो जन कल्याण। जनहित यदि होता नहीं, राज्य बने निष्प्राण।।
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'

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पृथ्वी मेरी मातु है, मै हूँ इनका पुत्र। रात-दिवस सेवा करूँ, बनकर नेक सुपुत्र।।
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी नैश'

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मधुर वचन बोलें सभी, सबको दें सम्मान। रखें परस्पर प्रेम सब,
मिट जाए अज्ञान।।
दोहा --492
(नैश के‌ दोहे ‌से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'

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इस समाज में अनवरत, सबका हो उत्थान। एक दूसरे का सभी, करें यथा सम्मान।।
दोहा --490
(नैश के‌ दोहे ‌से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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भूखे-प्यासे न रहें, रहें नहीं
भयभीत। ऊँच-नीच सब लोग में, हो आपस में प्रीत।।
दोहा --490
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'

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रहो एक सा इस तरह, जैसें पाक ज़मीन। एक तरह से पालती, हरिजन और कुलीन।।
दोहा -489
(नैश के‌ दोहे ‌से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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जिस समाज में चल रहा, ऊँच नीचे का भेद। आपस के सम्बन्ध को, वे करते विच्छेद।
दोहा --488
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'

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