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इश्क़ करने का इरादा हरगिज़ न था ,


बाखुदा हो गया देखते देखते ।

जिन्हों ने मुझे नफ़रत करना सिखाया ,
उन्हें मैने कोई क्षति नहीं पहुँचाई ,

वे सिर्फ मेरे प्रेम से वंचित रहे ।

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खुद ही रोए और खुद ही चुप हो गए ,


ये सोचकर कि कोई अपना होता तो रोने ही ना देता ।

वो खुद पे इतना गुरूर करते हैं ,
तो इसमें हैरत की बात नहीं,


जिन्हें हम चाहते हैं ,
वो आम हो ही नहीं सकते।

मेरे इश्क़ के तरीके बेहद जुदा है.....
औरो से ,

मुझे तन्हा होने पर भी इश्क़ करना आता है.....
तुमसे ।

न जाने किस हुनर को शायरी कहते होंगे लोग .......

हम तो वो लिख रहे है , जो किसी से कह नही पाते ।

नफ़रत हो जायेगी तुझे अपने ही किरदार से ,


अगर मैं तेरे ही अंदाज में तुझसे बात करूँ ।

उसे अपने झूठ और गलतियों पर भी गरूर था ,


दफन हो गया मेरा सच ,
जो बेकसूर था ।

जो छोड़ गए वो बोझ थे ,



जो पास है वो खास है ।

🙏🙏 Happy Teacher's Day 🙏🙏