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jetha malde

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@jetha


થોડો બદનમાં જોશ રહી ગયો, થોડો મનમાં રોષ રહી ગયો,
આનંદમાં હર્ષ જ નીતર્યો,પણ અધકચરો અફસોસ રહી ગયો

કોઈ તરકટ તીર લાગ્યું નહીં, ચાલાકી‌ ચિતમાં ચિતરાણી નહીં,
કપટના કલર રગળાઈ ગયા, ખાલી પીંછીમાં ફીરદોશ રહી ગયો

આમ તો ખાસ કાંઈ વાત નહોતી, ખાલી ચિલાચાલુ ચર્ચા ચાલી
ઉઠવામા‌‌ થૈ‌ આળસ,તો ફેલાઈ ગયો, ને જમીનદોસ્ત રહી ગયો

ન અલંકારથી શણગારી એને, ન છંદોના રૂપક માં દીપાવી મેં
અમસ્તી આંખથી ટપકી ગઝલ,તો કહે એમાં શબ્દકોશ રહી ગયો

શિખર ભણી જ ચાલ્યા,'તા, પણ તળેટીમાં કાફલો ભળી ગયો
ખીણની ધારોધાર ચાલ્યા એ,ને ખાઈમાં જ હોશકોશ રહી ગયો

એક‌ કે'વાની વાત અધૂરી રહી,એમાં‌‌ તો ફરી જનમ લેવો પડ્યો,
કહી ન શકાયું એ કથન,ને ફરી એની વાતોમાં મદહોશ રહી ગયો

આમ મીટ માંડીને વાટ જોવાનું, સૌને નસીબે નથી હોતું જેઠા
જનાજામાં રહી અધખુલ્લી તો,સૌ કહે આંખોમાં દોષ રહીગયો.

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सिखलाता है, फुसलाता है मुझे,वो बातें भी बताता है बहुत
मेरे अंदर का एक आदमी मुझे,रोज़ रोज़ सताता है बहुत,

मगफिरत मिलेगी तेरी रूह को,जन्नत हासिल होगी तुझे,
दोस्त हो जैसे फरिश्तों का, ऐसे गुरुर दिखाता है बहुत ‌

बहतर हूरें मिलेंगी,बाअदब पेश आ तेरी खिदमत में रहेंगी
पर न जाने क्या हैं वो,मेरी रूह की नूर से कतराता है बहुत

सुना है मैंने,ब़ंदगी से‌ ही ब़ंदा पाता है,दीदार ए ख्वाब जिंदगी का
उसे ताबूत पे क्यूं नाज़ है, तुरबत की अहमियत बताता है बहुत

कहूं मेरे रोंगटे में मैंने देखा उसे,आंखो से पीया है दरिया उसका
ये जरिया वो आजमाता नहीं,मेरी मासूमियत से इतराता है बहुत

मिट्टी के मिलन की बात बोलूं,बादल के छींटें को साहेद रखकर,
बिजली के जो राज बताऊं,तो मुझे घूरकर बोखलाता है बहुत

कहूं,खुद को पाने में जो मज़ा है जेठा,वो जन्नत में हासिल नहीं होगी जाहीद
उसे,खुद का रास्ता पता न खुदको,पर वो ख़ुदा का रास्ता दिखलाता है बहुत
- jetha malde

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सिखलाता है, फुसलाता है मुझे,वो बातें भी बताता है बहुत
मेरे अंदर का एक आदमी मुझे,रोज़ रोज़ सताता है बहुत,

मगफिरत मिलेगी तेरी रूह को,जन्नत हासिल होगी तुझे,
दोस्त हो जैसे फरिश्तों का, ऐसे गुरुर दिखाता है बहुत ‌

बहतर हूरें मिलेंगी,बाअदब पेश आ तेरी खिदमत में रहेंगी
पर न जाने क्या हैं वो,मेरी रूह की नूर से कतराता है बहुत

सुना है मैंने,ब़ंदगी से‌ ही ब़ंदा पाता है,दीदार ए ख्वाब जिंदगी का
उसे ताबूत पे क्यूं नाज़ है, तुरबत की अहमियत बताता है बहुत

कहूं मेरे रोंगटे में मैंने देखा उसे,आंखो से पीया है दरिया उसका
ये जरिया वो आजमाता नहीं,मेरी मासूमियत से इतराता है बहुत

मिट्टी के मिलन की बात बोलूं,बादल के छींटें को साहेद रखकर,
बिजली के जो राज बताऊं,तो मुझे घूरकर बोखलाता है बहुत

कहूं,खुद को पाने में जो मज़ा है जेठा,वो जन्नत में हासिल नहीं होगी जाहीद
उसे,खुद का रास्ता पता न खुदको,पर वो ख़ुदा का रास्ता दिखलाता है बहुत

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पूछा हाल शहर का.. तो वो मुस्कुरा के बोलें
लोग तो जिंदा हैं, पर ज़मीरों का पता नहीं..!

ये हीजरांती बस्तियां, दिकते ये भूखे कहराते लोग
वो राशन का गेहूँ दे गई चंदे में,यहाँ अमीरो पता नहीं

बात मैने जो किसीको न बताई,वो फेल गई अखबारो में,
अपने तो अपने होते हैं ना,पर ये मुखबिरो का पता नहीं

कौन सी रहेमें,किसकी दुआ,किसकी नज़र बरसी हम पर, ,
जो हथेली में न खींची गई,वो अनजान लकीरों का पता नहीं

उलफतो से संवारे जो जेठा, इसके मायने तो समझे,
नफ़रतो से भी छूटने न दे, वो जंजीरो का पता नहीं

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ચાલને થોડું જરા વ્હાલ વાવી જોઈએ
ઊગે છે શું? જરા તપાસી તો જોઈએ
એમાં કાંઈ બહુ ઝાઝું નહીં જ જોઈએ
કે નહીં એમાં બહુ સામટું કાંઈ ખોઈએ

બસ બે એક મીઠાં બોલ ને એક મીઠી નજર
નજરમાં સહજ નેહ,ને બોલમાં વાસંતી સમર
સમરને પાનખર તણી ઝાંકળની વાત કહીએ
હેતાળ હથેળીમાં ઝાંકળના નીર ભરી જોઈએ
મીંઢા મુક્કા ને ચાલને અંજલિ બનાવી જોઈએ
ચાલને થોડું જરા વ્હાલ વાવી જોઈએ

વિરાટની વાટ તો બહુ વસમી છે વ્હાલા
ભૂલા પડશું તો નાહક ના ભટકશુ ઠાલાં
આ ભોમિયા'ય રસ્તા બતાવે છે, પોતે ચીતરેલા
ને ગણાવેશે "ઈશ" એને, છે પોતે ધૂળમાં કોતરેલાં
મૂકી વૈરાટ,ચાલ વામન ને ગળે લગાવી જોઈએ
ચાલને થોડું જરા વ્હાલ વાવી જોઈએ

ગણવા જોડવાની આંહીં રૂડી રીત દોડે છે
માંજારી નું ઠીકરું આંહીં મૂષક માથે ફોડે છે
શબ્દો ના ટાંકા મારી ખાલી પહેરણ દોડાવે
ખાલી ખિસ્સામાં આખો કુબેર ભંડાર ગણાવે
ફક્ત લખે કે વખતે જીવે છે એવું,ચાલ જેઠાને પણ અજમાવી જોઈએ
ચાલને થોડું જરા વ્હાલ વાવી જોઈએ

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मन और बुद्धि की भी कभी जन्मोंत्री मिला लेंना
जिसके गुण न मिले उससे जल्द बिदा ले लेना

सिर्फ रकीबों को ही नहीं कभी हबीबो को भी आज़मा लेना
दुश्मन अगर खानदान निकले तो पहले उसे मना लेना

कभी कभी खा जाओ उसे,जो सर ऊंचा रखना हो तो
मुंडी नीचे रख के खाने से, ज़्यादा अच्छा है ठोकरें खा लेना

दूध में मक्खन है,पर वह चाबुक से नहीं निकाला जाता
मथनी ढूंढो यारों, जहां जो रस्म चले उसे आज़मा लेना

सिर्फ इश्क में नहीं,अनदेखी में,नफ़रत में भी प्यार होता है
बिना बरसात,बिना बादल,आता नहीं बिजली को गरज लेना

जेब अगर भर जाए तो,सीना तान लेती है,पर दिल पे बोझ देती हैं
अपनी सेहत के वास्ते भी अपने दोस्तों से पेहरन बदल लेना

बहुत सोचने को मजबूर कर दे जेठा,ऐसी ख्वाहिशों से गुरेज अच्छा
जंजीर बांध कर दौड़ में धकेल दे ऐसी पहेली से पहले से मुंह मोड़ लेना

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वो आती है तो, उसको आने दो ज़रा भी रोकना मत
उलझ जाएंगी घबराकर,रास्ते में कहीं उसे रोकना मत

काई बार आई वो मेरी देहलीज पर,मगर मिला ही नहीं मैं
अब सीधे पते पर ही आ गई, तो उसे ज़रा भी टोकना मत

मिल लेने दो उसे, गले, दिल से,या तेज-तर्रार शरारती नैनों से, कहीं पे रुकती नहीं वो जरुरत से ज्यादा, तो अनाप-शनाप भोंकना मत

मेरा बिगाड़ेगी कुछ भी नहीं,इतनी बुरी भी नहीं है वो मासूम
फिर कभी नहीं आएगी इधर, तो इधर उधर की सोचना मत

तुम्हारे दिए हुए सब, तुमको देकर जाएंगी, सर,सरताज,सब,, ,
वर्ना भी कुछ ले जाये,तो मांग लेना उससे,ज़रा भी शर्माना मत

वो भी ले लेना जो तुमने दिया था अश्क अकराम, शोहरत शबाब सब
वो तो मेरी रूह की तलबगार है,उसे मेरे रूह से बिछडवाना मत

सारी जिंदगी उसके इंतजार में बैठे रहा, तभी लो अब आई और हंसके बोली
कभी झुका नहीं तु जेठा,मैं मोत हूं तो क्या? मेरे सामने भी सर झुकवाना मत

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