आयुर्वेद का पहला नियम भोजन दवा रूपी ही ग्रहण करे । Diabetes Awareness Plan I मल्टीग्रेन अनाज की रोटी I राबड़ी @multigrain_Meal @Healthy_food I //कृपया प्रतिदिन आहार में जौ,ज्वार,मक्का,बाजरा,चना, मूंग और मोठ का ही दलिया व आटे की रोटी, राब-राबड़ी डोहे की राब-राबड़ी का सेवन करे और निरोगी काया रखें ।// https://www.youtube.com/watch?v=vZwq6rBVTIA अधिक जानकारी के लिए मेरे टीवी चैनल अथवा मेरे लिए के नंबर 9414416705 पर भी संपर्क कर सकते हैं अथवा मेरे ईमेल एड्रेस rggaaf@gmail.com पर भी संपर्क कर सकते हैं

अमृतं मोक्षवाचन्तु तेनास्मदवकुण्ठनात् । प्राप्येते भोगमोक्षौ हि स्थित्यन्ते मदनुग्रहात् ॥

उत्तानभागपर्णेन मूर्ध्नि मे न्युब्जमर्पयेत् । मोक्षेऽमृतावकुण्ठोऽहं भवेयं तव कामधुक् ॥

येन केन प्रकारेण बिल्वकेनापि मां यज । तीर्थदानतपोयोगस्वाध्याया नैव तत्समाः ॥

बिल्वं विधानतः स्थाप्य वर्धयित्वा च तद्दलैः । यः पूजयति मां भक्त्या सोऽहमेव न संशयः ॥

य एतदधीते ब्रह्महाऽब्रह्महा भवति । स्वर्णस्तेय्यस्तेयी भवति ।

सुरापाय्यपायी भवति । गुरुवधूगाम्यगामी भवति ।

महापातकोपपातकेभ्यः पूतो भवति ।

ॐ सत्यम् ॥

न च पुनरावर्तते ।

न च पुनरावर्तते ।

न च पुनरावर्तते ।

ॐ सत्यम् ॥ ॐ सत्यम् ॥ॐ सत्यम् ॥ॐ सत्यम् ॥

RobustTV_Jugal kishore sharma

@Robustlife_multigrains

Regularly available images and videos for the technique, taste and method of preparation of robust food are available free of cost for the awareness of the general public. Spread maximum publicity and stay healthy and make others aware for the sake of health. https://lnkd.in/dtRwzNRX

Kind Attention Pl. Jugal Kishore Sharma 9414416705

#health #food

Read More

भगवन् सर्वलोकेश सत्यज्ञानादिलक्षण ।

कथं पूजा प्रकर्तव्या तां वदस्व दयानिधे ॥



इति पुनः पृच्छन्तं वामदेवमालिङ्ग्येति होवाच ॥



बुद्विमांस्त्वमिति ज्ञात्वा वक्ष्यामि मुनिसत्तम ।

मम प्रियेण बिल्वेन त्वं कुरुष्व मदर्चनम् ॥



द्रव्याणामुत्तमैर्लोके मम पूजाविधौ तव ।

पत्रपुष्पाक्षतैर्दिव्यैर्बिल्वपत्रैः समर्चय ॥



बिल्वपत्रं विना पूजा व्यर्था भवति सर्वदा ।

मम रूपमिति ज्ञेयं सर्वरूपं तदेव हि ॥



प्रातः स्नात्वा विधानेन सन्ध्याकर्म समाप्य च

भूतिरुद्राक्षभरण उदीचीं दिशमाश्रयेत् ॥

Read More

https://www.youtube.com/shorts/f3zSD9d8Rbc

Dibetic | Thyriod | RA | Dibetic Type 1 / Type 2 | Gut Health | Hearts Issues | Best Nutrition

સામાન્ય રીતે, આપણે ખાવાની નિયમિતતા અને ખોરાકની ગુણવત્તા અને ગુરુત્વાકર્ષણ પ્રત્યે ઘણી વખત અસ્વસ્થતા તેમજ બેદરકાર રહીએ છીએ. આનું મુખ્ય કારણ આપણી વિચારસરણી, અમુક યા બીજી જીવનશૈલી અને અન્યાય, દવા વગેરેના યુગ પર સર્વાંગી બજારવાદનું વર્ચસ્વ છે. આપણી આજુબાજુની વ્યવસ્થા અને અડધા-અધૂરા જ્ઞાનથી આગળ વધીને સમજદાર જીવન જીવવું પણ જરૂરી છે, તેને સમજવું આપણા માટે આ સમયની સૌથી મોટી પ્રાથમિકતા છે. જીવન ક્યારેય સ્થિર થતું નથી, સમસ્યા હંમેશા શટલ થાય છે. નિયમિત અંતરાલે દરેક રાઉન્ડમાં પ્રાપ્ત. ઘણી વાર આપણને કુદરત સાથે રહેવાની ટેવ હોવી જોઈએ, આપણે સ્થાનિક રીતે ઉપલબ્ધ ખોરાકનું વ્યવસ્થિત રીતે સેવન કરવું જોઈએ અને ઋતુ અનુસાર, આપણે રહેવાની અને સરળ ધોરણે સ્થાયી થવાની ટેવ પાડવી જોઈએ, જેમ કે ઓછી ઉર્જાનો ખોરાક અને ગરમીમાં શિયાળામાં, આપણે ફક્ત તે જ ખાવું જોઈએ જે આપણને તાજગી આપે અને પેટને યોગ્ય ઠંડક આપે, આ ​​તે ખોરાક હોવો જોઈએ જે સ્થાનિક સ્તરે ઉપલબ્ધ હોય, જેમાં ભારતીય સંસ્કૃતિ અને સંસ્કૃતિના વારસામાં બાજરો, જુવાર, મકાઈ, ચણા, મગ, ​​શલભ વગેરે કરવામાં આવ્યું છે, માત્ર આનું નિયમિત સેવન કરવાથી અને નિયમો અનુસાર સ્વાસ્થ્ય સંબંધિત તમામ સમસ્યાઓમાંથી મુક્તિ મેળવી શકાય છે.

// કૃપા કરીને જવ, જુવાર, મકાઈ, બાજરી, ચણા, મૂંગ અને શલભના દાળ અને લોટની રોટલી, રાબ-રાબરી દોહેની રાબ-રાબડીનું રોજિંદા આહારમાં સેવન કરો અને સ્વસ્થ શરીર રાખો.//

https://www.matrubharti.com/jugalkishoresharma WS +91- 9414416705

Read More

In general, we often remain uncomfortable as well as careless about the routine of eating and the quality and gravity of the food. The main reason for this is the dominance of all-round marketism on our thinking, some or the other lifestyle and the era of injustice, medicine etc. Beyond the system around us and half-incomplete knowledge, it is also necessary to live a wise life, it is the biggest priority of this time for us to understand. Life never settles down, the problem always shuttles. Received in each round at regular intervals. Often we should have a habit of living with nature, we should consume locally available food in a systematic way and according to the season, we have to make a habit of living and settling on an easy basis, such as little energy food and warmth in winter. In times, we should eat only that food which gives us freshness as well as proper coolness to the stomach, this should be the food available locally, in which in the heritage of Indian civilization and culture millet, jowar, maize, gram, moong, moth etc. It has been done, by consuming only these regularly and according to the rules, one can get rid of all the problems related to health.

// Please consume barley, sorghum, maize, millet, gram, moong and moth porridge and flour bread, Raab-Rabri dohe's Raab-Rabri in daily diet and keep a healthy body.//

https://www.matrubharti.com/jugalkishoresharma WS +91- 9414416705

Read More

सामान्य तौर पर हम प्राय खाने के रूटिंन और भोजन की क्वालिटी एंव ग्रेविटि को लेकर लापरवाह के साथ-साथ असहज रहते हैं. इसका प्रमुख कारण हमार सोच पर चौतरफा बाजारवाद का हावी, कुछ कुछ या बहुत कुछ लाईफ स्टाईल और नांइसाफी का दौर, दवा आदि सब रेडीटूईट के साथ हंकमंक है. हमारे चारों ओर की व्यवस्था और आधा अधूरा ज्ञान से परे विवेकपूर्ण जीवन आवश्यकभी है यह हमे समझना इस समय की सबमें बड़ी प्राथमिकता है । जीवन कभी सैटल नहीं होता है, समस्या शटल ही रहती है. नियमित अन्तराल से हर दौर में प्राप्त है. प्रायः हमें नेचर के साथ रहने की आदत होनी चाहिए हमें स्थानीय तौर पर उपलब्ध आहार का व्यवस्थित तरीके से ही सेवन करना चाहिए और रितु यानी मौसम के अनुसार आसान आधार पर रहन सहन और व्यवस्थित होने की आदत डालनी होगी यथा सर्दी में थोड़ा एनर्जी फूड और उष्णना काल में वह खाना ही खाये जो हमे ताजगी के साथ पेट को उचित ठण्डक भी दे यही खाना चाहिए स्थानीय तौर पर उपलब्ध जिसमें भारतीय सभ्यता और संस्कृति की विरासत में बाजरी जो ज्वार मक्का चना मूंग मोठ आदि अनेक प्रकार के रितु की उपज सहज सुलभ यत्रतत्र सर्वत्र कराई है इन्हीं के ही नियमित और नियम अनुसार सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधित समस्त दिक्कतों से छुटकारा पाया जा सकता है ।

//कृपया प्रतिदिन आहार में जौ,ज्वार,मक्का,बाजरा,चना, मूंग और मोठ का ही दलिया व आटे की रोटी, राब-राबड़ी डोहे की राब-राबड़ी का सेवन करे और निरोगी काया रखें ।//

https://www.matrubharti.com/jugalkishoresharma WS +91- 9414416705

Read More

क्रोध - वाच्यावाच्यं प्रकुपितो न विजानाति कर्हिचित् । नाकार्यमस्ति क्रुद्धस्य नवाच्यं विद्यते क्वचित् ॥

क्रोध की दशा में मनुष्य को कहने और न कहने योग्य बातों का विवेक नहीं रहता । क्रुद्ध मनुष्य कुछ भी कह सकता है और कुछ भी बक सकता है । उसके लिए कुछ भी अकार्य और अवाच्य नहीं है ।

“We should always speak what would please the man of whom we expect a favour, like the hunter who sings sweetly when he desires to shoot a deer.” ~ Chanakya

“A good wife is one who serves her husband in the morning like a mother does, loves him in the day like a sister does and pleases him like a harlot in the night.”~

Read More

सत्य -सत्यमेवेश्वरो लोके सत्ये धर्मः सदाश्रितः । सत्यमूलनि सर्वाणि सत्यान्नास्ति परं पदम् ॥

सत्य ही संसार में ईश्वर है; धर्म भी सत्य के ही आश्रित है; सत्य ही समस्त भव - विभव का मूल है; सत्य से बढ़कर और कुछ नहीं है ।

“Do not be very upright in your dealings for you would see by going to the forest that straight trees are cut down while crooked ones are left standing.”

“He who lives in our mind is near though he may actually be far away; but he who is not in our heart is far though he may really be nearby.”

बोधमात्रोऽहमज्ञानाडुपाधिः कल्पितोमया।

एवंविमृशतोनित्यनिर्विकल्पेस्थितिर्मम ॥

नमेबन्धोऽस्ति मोक्षा वा भ्रान्तिःशान्ता निराश्रया ।

अहो मयि स्थितं विश्वं वस्तुतो न मयि स्थितम्॥

Read More

सभी को सुप्रभात प्रतिदिन स्वास्थ्य में संजीदगी संजो के रखें स्वास्थ्य ही सब कुछ है सबसे बड़ा धन है स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक है बच्चे जवान बुड्ढे महिला या पुरुष सबके लिए उत्तम स्वास्थ्य अति आवश्यक है 40 से 70 साल के मध्य भारत में दो तिहाई लोगों को डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी है डायबिटीज के लक्षण है उस से मोटापा पेट संबंधी बीमारियां लिवर संबंधी किडनी संबंधी हार्ट रोग कोलेस्ट्रॉल विभिन्न प्रकार के रोग अथवा मल्टीपल बीमारियां शरीर में जमा होती रहती है 20 वर्ष से 40 वर्ष की आयु के मध्य स्वास्थ्य में पौष्टिक भोजन आवश्यक है हम जो जवार मक्का बाजरा चना मूंग और मोठ का आटा दलिया आदि उपयोग करें और स्वस्थ रहें

Read More