जीवन मनुष्य की बहुमूल्य निधि है, पता नहीं कितने भिन्न भिन्न प्रकारों के जन्मों के बाद मनुष्य जीवन प्राप्त होता है। अपने आपको भाग्यशाली, मानकर ही जीवन को सही माप-दंडो के अनुरुप चलाने में साहित्य की अपनी विशिष्ठ भूमिका होती है। पेशे से वकील होते हुए भी बचपन से साहित्य के प्रति सदा अनुराग रहा है। कुछ सालों से लेखन के प्रति झुकाव बढ़ गया है। कोई जरुरी नहीं बड़े-लेखकों की श्रेणी में आऊ, पर अच्छा लिखूं, सुधार को सदा मान्यता दूँ। कोशिश भर ही समझे, मेरे लेखन को, और मेरा मार्ग-दर्शन करे। शुभकामनाओं के साथ,

मौत आयेगी तो जिंदगी ठहर जायेगी
प्रियतम कहकर वो गले लग जायेगी

बेवफा है जिंदगी एक दिन साथ छोड़ देगी
तमाम उम्र बहुत कुछ करा रिश्ता तोड़ देगी

क्या ऐसा जिंदगी पर जो इतना हम इतराये ?
भूल जाये उसकी फितरत और सिर्फ लहराये

सच कहें तो जिंदगी एक बहती सी दरिया है
उसमें चंद खुशिया बाकी गहन जिम्मेदारियां है

"कमल" न कर गरुर जीना सिर्फ साँसों का सरुर है
कम होती जिंदगी में रोशनी चंद ज्यादा अंधकार है

समझ इतनी ही अच्छी हम इंसान बनकर आये है
कुछ भी नहीं है सिर्फ अस्त-उदय होने वाले साये है
✍️ कमल भंसाली

-Kamal Bhansali

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जैन होने के नाते ही नहीं एक साधारण इंसान होने के कारण अपनी गलतियों का अवलोकन क्षमा याचना दिवस पर्व पर जरूर करता। किसी भी समय, किसी भी रूप में आपको जरा भी कष्ट मन, वचन और कर्म से दिया हो या अहसास हुआ तो क्षमा-याचना करता हूँ। आपकी दी क्षमा मेरे लिए बहुमूल्य है।

🙏🙏 मिच्छामि दुक्कड़म🙏🙏
क्षमा जीवन का आधार, गलत कर्मों से करे उद्धार
'कमल' क्षमा-याचना करता, आप करे इसे स्वीकार

जाने-अनजाने गलत हो जाये जब आपसी व्यवहार
मन कहे सिर्फ खमा में ही रिश्तों का अमृत्व आधार

राह जीवन की कठिन चंचल मन हो जाता कमजोर
शब्दों में पन्हा ले अँहकार करता अवांछित व्यवहार

भूल-चूक बन जाये जब आपसी द्वेष का जागरण
हमारी क्षमा-याचना कर सकती सात्विक निवारण

दो साँसों का जीवन किस बात का करे अँहकार
धरा का धन धरती पर सिर्फ क्षमा पर ही अधिकार

सर्व सत्य ही करता उद्धार, क्षमा जब हो स्वीकार
मिच्छामि दुक्कड़म कहे, 'कमल' आपको बार बार
✍️ कमल भंसाली

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जख्म जब जिंदगी देती
परिभाषा प्रेम की बदल देती
गले लगे अपनों की बस्ती
वीरानी सी नजर आने लगती
✍️ कमल भंसाली

-Kamal Bhansali

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स्वतन्त्र हुआ देश मना रहा पचतहरवाँ साल
जन गण मन भारत का भाग्य हो बेमिशाल

हर दिन का उत्सव आज बना अमृत महोत्सव
शान से लहराओ तिरंगा सम्मान करेगा सारा विश्व

शुभकानाये, लहराता रहे तिरंगा भारत का प्यारा
गले लग कहे हम चमकता रहे जय हिंद का सितारा

पँद्रह अगस्त याद आये, उस शुभ रात्रि का कमाल
तोड़ी गुलामी की जंजीरे हुये स्वतंत्र, भारत के लाल

दर्द दिल में एक ही रहा देश दो भागों में बंट गया
भविष्य का यह दर्द बहुत कुछ अनचाहा सा दे गया

देश के दिल ने सह्रदयता से ये दंश स्वीकार किया सम्मान के साथ अत्यचारी अंग्रेजो को बाहर किया

बहुत कुछ खोने के बाद मिलता वो अनमोल होता
स्वतंत्र है सोच कर दिल में अहसास विशाल होता

जिनके बलबूते पर स्वतन्त्र है देश के वो शहीद है
जिन्होनें दी कुर्बानियाँ हमारी कई जन्मों की याद है

पर देश उतना खुश नहीं जितने हम खुश हो रहे
सालों बाद भी चंद अमीर बाकी गरीब ही रह रहे

सवाल सत्ता के दीवाने न समझे खुद में मशगूल है
वक्त कह रहा संभल जाये अति गरीबी दावानल है

जश्न तभी मनेगा जब कोई लाचार न दिख पायेगा
गरीबी का नाम लेकर कोई नेता महल में न सोयेगा

कर्तव्य और अधिकार दोनों में ही स्वतंत्रता समायी
नमन उनको देश-भक्ति जिन्होंने आत्मा से निभायी

देश हमारा हम देश के फिर क्यों उग्र अशांत हो रहे
बेहतर यही है देशहित में, देश दिल ओ जान में रहे

तिरंगा लहराता रहे विश्व में भारत का सम्मान रहे
गर्व हम हिंदुस्तानी है, तिरंगा दिल में लहराता रहे
✍️कमल भंसाली

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जिन्हें अपना समझा वो अब गैर हुए
जिन्हें गैर जाना वो अब अपने से हुए
रिश्तों की परिभाषा में बदले अर्थ हुए
देखे सपने टूटे तो प्रेम के रँग फीके हुए
✍️ कमल भंसाली

-Kamal Bhansali

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शीर्षक : सिद्धांत
ता: 10/08/2022

न रोको जिंदगी को उसे आगे बढ़ने दो
मौसम है बहारों का उसे भी मजे लेने दो

भूल जाओ कल लोग क्या क्या करते थे ?
माना पहले बिन सोचे पैर आगे नहीं बढ़ते थे

बंदिशों में ही पर्व मनाना कभी एक उसूल था
आदमी खुद में कम गेरों में ज्यादा मशगूल था

बदली हुई दुनिया में हर व्यवहार बदल गया है
अपनों की बात छोड़ो पड़ोसी भी दूर हो गया है

मैं न बदलूंगा ये फ़लसफ़ा अब फिजूल लगता है
पैबंद लगे कपड़े में हर कोई बुद्धिमान दिखता है

'कमल' दुनिया बदल दूँ कहना गलत लगता है
खुद को बदल लें यही सिद्धांत अब सही लगता है
✍️ कमल भंसाली

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शीर्षक: तुम आओगे..

तुम आओगे ये ख्याल था मेरा
दूर तक देखा साया तक न था तुम्हारा
तुम आओगे....

बहक गया न संभल पाया हिया मेरा
अब तक तुम्हें न भूल पाया अफसोस मेरा
तुम आओगे...

न सोचा कभी साथ छोड़ दोगे यों मेरा
इत्तफाक समझ इंतजार कर रहा मायूस दिल मेरा
तुम आओगे....

कोई गिला हो तो बताना फर्ज है तुम्हारा
पर ये न कहना टूट गया रिश्ता हमारा-तुम्हारा
तुम आओगे....

लौट आओ जिंदगी फिर न मिलेगी दुबारा
कसम ले लो बिन तुम दिल हुआ बेसहारा मेरा
तुम आओगे....
✍️ कमल भंसाली

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मोहब्बत सिर्फ शुकून नहीं दरियाई आग है
अगर सिर्फ जिस्म सी की तो बदगुमां दाग है
✍️कमल भंसाली

-Kamal Bhansali

हकीकत से दूर थे हम
सच में बहुत मजबूर थे हम

किसे कहते ? उनके के टूटे ख्बाब थे हम
कभी थे उनके अब बेगानों के साथ है हम

मुद्दतो से से वो उदास और तन्हा रहते है
कहने को आज भी उन्हें "माता-पिता" कहते है

जो हमारे एक आँसूं देख कर पिघल जाते थे
न सोचा कभी हमारे दिये गम में कैसे रह जाते थे ?

कल की जिनके पास जीने की वजह थे हम
हकीकत में आज उनकी मौत की चाह है हम

क्या कहें कितने मजबूर हो गये है, अब हम
चले आये उनसे दूर पर बिन अफसोस रह रहें हम

सजा तो मिलनी है कीमत तो गलती की चुकानी है
पछतावे की राते लम्बी उनकी यादें तो सदाआनी है
✍️ कमल भंसाली

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मिले.....कमल भंसाली

मन को मीत मिले, साँसों को संगीत मिले
प्यार को शब्द मिले, होठों को गीत मिले

मिलन को बाहें मिले, विरह को चाहत मिले
खुशियों को फूल मिले, दर्द को राहत मिले

दोस्त को दोस्ती मिले, दुश्मन को क्षमा मिले
परिश्रम को मंजिल मिले, आलस को त्याग मिले

सेवा को मेवा मिले, अत्यचारी को पश्चाताप मिले
अहिंसा को साहस मिले, हिंसा को अभिशाप मिले

आँचल को ममत्व मिले, स्नेह को पुष्पहार मिले
कली को संस्कार मिले, फूलों को त्योहार मिले

आदर्शो को साथ मिले, अनुशासन को उपहार मिले
शब्दों को संदेश मिले, नव-सृजन को सिंगार मिले

नारी को सम्मान मिले, नर को ज्ञान मिले
देश को भक्ति मिले, सँसार को विज्ञान मिले

व्यापार को लाभ मिले, बचत को धन मिले
कुछ को कुछ न मिले, पर सब को ईश्वर मिले
✍️ कमल भंसाली

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