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Shree Kriti

Shree Kriti

@kritikasrivastav657138
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"किसी भी इंसान में इतनी समझ तो होनी ही चाहिए कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं। सही और ग़लत की यही समझ ज़िन्दगी को आसान बना देती है।"

~ श्री कृति

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माना, मेरे दामन में दाग़ हज़ार सही,
चलो अब अपने आईने की धूल तो साफ़ कर लो।

~ श्री कृति

रास्ते बदलते रहे, पर सफ़र वही रहा,
मुक़द्दर का वो पुराना असर वही रहा।
कल तक ढूँढती थी मैं दुनिया में अपनों को,
आज ख़ुद की तलाश का हुनर वही रहा।

- श्री कृति

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सिगरेट के अंगारों से लगाकर,
उड़ाते जो चले जाते हो।
क्या कभी यह सोचा है,
जीवन धुआँ तो नहीं।
तुम्हारे संग जुड़े हैं कुछ जीवन,
जल उठेंगे हृदय से,
सिगरेट की सुलगन से।
क्या कभी यह सोचा है,
रिश्ते धुआँ तो नहीं।
सड़क के किनारे खड़े होकर फूँको,
या वातानुकूलित दफ़्तर में,
खुलेआम सुलगाओ,
या चोरी-छुपे कमरे में।
क्या कभी यह सोचा है,
कलेजा धुआँ तो नहीं।
गर अब भी न सम्भलोगे,
तो विनाश को गले लगाओगे।
क्या कभी यह सोचा है,
उस क्षण तुम भी रह जाओगे बनकर
मात्र धुआँ ॥

~ श्री कृति

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तुम औरत हो
फिर क्यों
एक औरत की आवाज़ को
शोर में दबा रही हो?
जिसने तुम्हारी तरह ही
स्वप्नों को सीने में दबाया है,
जिसने तुम्हारी तरह ही
रातों से समझौते किए हैं।
तुम जानती हो ना...
औरत का दर्द
सिर्फ़ आँसू नहीं होता,
कभी झिकझिक होती है,
कभी चुप्पी,
तो कभी ज़िंदा लाश-सी मुस्कान।
फिर क्यों
उसकी उड़ान से जलती हो?
क्यों उसकी हार पर
तसल्ली से मुस्कुराती हो?
अगर औरत ही
औरत का हाथ छोड़ दे,
तो ये दुनिया
उसे जीने का हक़ कब देगी?
सोचो,
जब एक औरत दूसरी औरत के खिलाफ़ खड़ी होती है,
तो सिर्फ़ एक इंसान नहीं टूटता,
पूरी पीढ़ियाँ बिखर जाती हैं।
सोचो...
तुम औरत हो,
फिर भी औरतों के नस्ल को दर्द में दफ़ना रही हो।

- श्री कृति

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"किसी को सुख न दे सको तो न सही, मगर किसी के दुःख का कारण भी कभी मत बनो, क्योंकि जिसे दूसरों की तकलीफ़ का अहसास होता है, वही इंसान होता है।"

- श्री कृति

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ईश्वर के द्वार पर भेदभाव?
हे देव!
क्या आपके चरणों में भी अमीर-गरीब अलग हैं?
क्या आप पत्थरों में बसते हैं दाता?
क्या आप भी जात-पात देखकर डालते हैं,
भक्त पर अपनी कृपादृष्टि?
हे ईश्वर!
अगर यही है आराधना,
यही है पूजा,
तो मुझे नहीं करनी ऐसी पूजा।
हे देवता!
आप मेरी आत्मा में स्थापित हैं,
किसी मूर्ति या मंदिर में नहीं।

-श्री कृति

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अनन्य मुरीद हैं लोग जब अंग्रेज़ी के,
तब भाषा की महता क्या है ?
खुरदरे - खिलंदड़े शब्दों की गठरी बांध ,
यह अंग्रेज़ीयत का भवन क्या शानदार बनाया है ।
सच !
कभी हालात इतने अजीब न थे ।
भाषा तक गॅंवा दी ,
पहले हम इतने तो गरीब न थे ।।

- श्री कृति

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तेरी बेरुखी का भी अपना एक अंदाज़ है,
हम पुकारते रहे...
और तू मौत का बहाना बना कर,
ख़ामोशी से दिल में बैठ गया ।।।

- श्री कृति

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