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Kshitij daroch

Kshitij daroch Matrubharti Verified

@kshitijdaroch
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जब काँटों में जीये ज़िंदगी,
तो फूलों की क्या क़ीमत रह गई...
ज़माना इतना बदल गया कि,
मोहब्बत सिर्फ़ जिस्म तक सिमित रह गई...
झूठ से बने बादल,
धोखा आज खुले आम बरसता है...
क़दर नहीं पाने वाले को,
और चाहने वाला एक झलक को तरसता है...

- Kshitij daroch

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दुनिया है मेरी निगाहों में,
बस एक तेरी कमी खलती है.....
दिखावे की हंसी दिखती तो है सबको,
पर दिल में तो असल में तन्हाई पलती है.....



- Kshitij daroch

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दुनिया की भीड़ में जब खुद को अकेला पाएगी...
मुझे पता है तू अपना दर्द किसी को नहीं बताएगी...
मुझे तो भुला दिया तूने पर कम से कम मेरा पता याद रखना...
किया था तेरे किसी आशिक ने तुझसे वादा ये याद करना...
मिलूंगा तुझसे उन्हीं मोहब्बत की गलियों में
जो तेरे घर से होकर बहती हैं...
हाँ तुझे नहीं दिखता मैं पर मेरी धड़कनें
आज भी वहीं रहती हैं...
तू आज़मा के देख लेना हमें , तब भी मोहब्बत लुटा देंगे...
चाहे दर्द दिए हों हज़ारों तूने , तेरी खुशी के लिए सब भुला देंगे...

~ Kshitij daroch

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हमसे बेहतर पाकर भी जब तुझ,
आंखों में नमी महसूस होगी...
100 वजह हो चाहे हंसने की फिर भी,
तुझे मेरी कमी महसूस होगी...
कदर तुझे नहीं थी मेरे इश्क की,
ये बात सोचकर खुद को कोसेगी...
जब तू इश्क के नाम पर किसी को,
अपना जिस्म परोसेगी...

- Kshitij daroch

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