मैं अपनी इबादत खुद ही कर लूं तो क्या बुरा हैं? किसी फ़कीर से सुना था कि मुझमें भी ख़ुदा रहता है...

✍🏻.....हमारे दिल मे भी झांको अगर मिले फुर्सत....


हुम् अपने चहरों से भी इतने नज़र नही आते!!!

-Kushwaha Arush

तुम जो आओ तो नींद नही आती...

नींद जो आये तो सारे ख़्वाब तेरे है!!!

-Kushwaha Arush

✍🏻...वो रूठा रहे मुझसे, ये मंज़ूर है लेकिन,

यारों उसे समझाओ मेरा शहर न छोड़े !!

-Kushwaha Arush

✍🏻...इस अजनबी दुनिया मे...,,
उम्मीदों का सहारा लेकर..,,


हम तुम्हें फिर से चाहेँगे...,,
एक उम्र दोबारा लेकर...!!!

-Kushwaha Arush

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✍🏻.....कुछ बिखरी हुई यादों के.., किससे भी बहुत थे..,,

कुछ उसने भी बालों को..,
खुला छोड़ दिया था।।

-Kushwaha Arush

✍🏻....मैं तेरी ही ग़ज़ल का कोई शेर हूँ ऐ-ज़िंदगी..,,

तू मुझे फिर से गुनगुनाने की कोशिश तो कर..।।

-Kushwaha Arush

✍🏻.....मैं भी एक हमसफ़र बनाता उसको तराश कर ...!!

बस मुझको मेरे मिजाज़ का पत्थर नहीं मिला ...!!

-Kushwaha Arush

✍️......ये रात ढलते ढलते रुक गई जवाब के लिए...

कि तेरी आँखें जागती हैं किस के ख़्वाब के लिए !!!

-Kushwaha Arush

✍🏻....तू है सूरज तुझे मालूम कहां रात का दुख...


तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बाद !!!

-Kushwaha Arush

✍🏻.....खामोशियां मुरव्वत नहीं करतीं ,दूर तक छेद जाती हैं...


ये फ़कत लफ्ज़ नहीं हैं , जो छूकर गुज़र जायेगे !!!

-Kushwaha Arush

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