Quotes by MASHAALLHA KHAN in Bitesapp read free

MASHAALLHA KHAN

MASHAALLHA KHAN

@mashaallhakhan600196


खुशबू फूलो की थी हम इतर ढूंढ रहे थे
जल्द बाजी के शहर मे हम सब्र ढूंढ रहे थे

जल्दबाजी में मै उसको मनाना भूल गया
निकला सफर में उसे बताना भूल गया
लोटा तो लोग हैरत में थे
वो छोड़ गया मुझे मे समझाना भूल गया

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एक चाराग लेकर निकला कुछ अंधेरा मिटाने को
एक हवा का झोका काफी था हमे होश मे लाने को

महंगा शोक नही मेरा , बस कुछ ख्वाब पूरे करने है
सब ने सब कुछ लिखा , बस मेरे किताब और खाली पन्ने है
कस्तिया दुब रही है सागर मे , बस मुझे तो किनारे तक उतरना है .

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