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MASHAALLHA KHAN

MASHAALLHA KHAN

@mashaallhakhan600196
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गर ना बदला है कोई, ना फिर बदलेगा कोई,
ये सफर आम सा नही, ना फिर आये कभी,
लोग यू तो ठुकरा देते है मंजिले चांद की,
फिर चन्द रास्तो से आगे ना बड़ पाया है कोई .

-MASHAALLHA....

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छिन लिया सब कुछ मेरा, और मुझसे दुआए मगवाने लगे,
गरदीश मे है सितारे और मुझे अब नजर आने लगे,
बेचेन है मन और उलझा हुआ है मेरा जहां
ये किस तरह मुझको सताने लगे,
मै क्या करु ऐ खुदा कि तू मान जाये, अब तो आंखो मे भी आंसू आने लगे .

-MASHAALLHA...

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कल भी कितना खुबसुरत होता है ना
जिसके लिए हम आज का गला घोट देते,
फिर जब वह कल आता है ना तो फिर हम आज
को कौसते है .

-MASHAALLHA

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मिला नही मुझको जिसकी रही तलाश
मर मर के जी रहे है बस चलने लगी है लाश,

रोका है किसने मुझको यू चढ़ते उरोज से
चन्द कदम बाकि थे फिर मंजिले थी पास,

अब सोचते है कुछ मकसद है खो दिया
काज का किला था सब गिर गये है ताश .

-MASHAALLHA...

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कुछ जंजीरे है जो कभी तुटती नही,
बस उन जंजीरो की चाबी बदलती रहती है .
(जिम्मेदारी) .

-Mashaallha

मिट्टी देने हमारी क्रब पर वो लोग भी आये,
जिससे ताउम्र हम खफा रहे, और हेरत इस बात
की है, गलत हम आज भी नही है .

-Mashaallha

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लोग नजर अन्दाज करने लगे हमे देखकर,
ये हमारा किरदार नही हमारी हेसियत है .

-Mashaallha

सजा भी क्या खुबसूरत चीज है ना
उसको ही मिलती है जो उसका हकदार नही होता .

-Mashaallha

मेरा वक्त खराब नही है मेरे दोस्त
ये तो आसलियत दिखा रहे है लोग,

पिछा किसी का ना कभी किया मैंने
वो अलग बात है मेरे गिरते ही मेरे पिछे
से जा रहे है लोग,

कभी मै सिर्फ सच ही बोलता था
अब मुझे ही झूठा बता रहे है लोग,

और खानदान के खानदान उजड़ गए
इस तरह रिश्ते निभा रहे है लोग .

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जरूरी नही है कि सब जगह तारीफ हो मेरी,
मेरे कुछ लोग है जो मुझसे किनारा करते है,
कुछ समझदार है जो जुबा पर ले आते है बात,
और कुछ बस मुस्कुराकर बहाना करते हैं.

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