Hey, I am on Matrubharti!

रंग बदलते लोगों का साथ,
ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता।
लाभ उसे जहां ज्यादा दिखता,
वहीं पर उसका सिर झुकता।।

सुप्रभात
मिश्री

-किरन झा मिश्री

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सबके लिए उर में प्रेम रखो,
प्रेम ही सबसे शुद्ध पावन।
छल कपट की इस दुनियां में,
बाकी सब तो है मनभावन।।

सुप्रभात
मिश्री

-किरन झा मिश्री

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मतलबी लोगों से , रहिए सदा ही दूर।
स्वार्थ सिद्धी के लिए,विश्वास करते चूर चूर।।

मिश्री

-किरन झा मिश्री

बुराई से बुराई पैदा हो,
अच्छाई से अच्छाई।
किसी का दिल न दुखे,
यही जीवन की कमाई।।

सुप्रभात
मिश्री

-किरन झा मिश्री

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मेरे पास शब्दों का भंडार नहीं,
फिर भी एक कोशिश करती हूं।
कोई त्रुटि हमसे न हो जाए,
लिखने में थोड़ा सा डरती हूं।।

मिश्री

-किरन झा मिश्री

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कुछ रोचक किस्से जिंदगी के,
अपनी यादों में पिरो जाना है।
जब भी जिक्र आयेगा हमारा,
महफिल में उसे गुनगुनाना है।।

सुप्रभात
मिश्री

-किरन झा मिश्री

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अपनों से जब भी मिलें।
खुशी से उनसे गले मिले।
कड़वी बातों को भुलाकर,
छोड़ दें सारे शिकवे गिले।।

सुप्रभात
मिश्री

-किरन झा मिश्री

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सुबह का मौसम दिल लुभाए,
चाय की प्याली जब याद आए।
दो दोस्त मिलकर चाय पिएं तो,
चाय का लुफ्त दोगुना हो जाए।।

सुप्रभात
☕मिश्री☕

-किरन झा मिश्री

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मन के इस उपवन में,
फूलों की तरह ही बिखरो।
महके सारा ये जीवन,
कुछ ऐसे ही प्रतिदिन निखरो।।

सुप्रभात
मिश्री

-किरन झा मिश्री

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भोर की लालिमा के साथ,
मन में आया एक विचार।
कर्म अपने करते जाना है,
नहीं करना कर्मो का प्रचार।।

सुप्रभात
मिश्री

-किरन झा मिश्री

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