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mohansharma

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@momosh99


कितना रखूँ मैं अपनी खताओं का हिसाब..
क्योंकि तेरी अदाएं हुए जा रहीं हैँ बेहिसाब..

जो प्यार से तुम देखते तो मैं गुलाब लगता मोहन..
नफ़रत से तुमने देखा तो मैं कांटे सा चुभना ही था..

मोहन उसके लिए क्या रोने से मतलब..
जिसे नहीं हमारे होने ना होने से मतलब..

मैं उसे रोकता अगर वो होता अपना मोहन..
वो अपना अगर होता तो फ़िर जाता ही क्यों..

मोहन अब ऐसे मुकाम पर हैँ हम आए..
जिसे आना है आए जिसे जाना है जाए..
जो होना है वो तो होकर ही है रहने वाला..
ये सोच सोचकर फ़िर हम किसलिए घबराए..
रोका तो था उसको हमने कि यूँ ना जाओ..
फ़िर वो चला गया वो फ़िर वो भाड़ में जाए...

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🌹मोहन तुम होना नहीं वेळेटाइन डे के मोहताज़..
पूरे साल रागिनी छेड़िये साथ लेकर इश्क़ का साज़..🌹

हम वो नहीं जो वेळेटाइन डे का करें इंतजार..
अरे साल के तीन सौ पेंसठ दिन करो ना प्यार..

ये मेरी बातें तो फुरसत की हैँ मोहन..
मिलो फुरसत में फुरसत से कहेँगे..

कैसी शिकायत मोहन जो कोई गुलाब घाव दे गया...
हमने ही तो ख़ुद से पसंद किया था वो कंटीला गुलाब..

तुम क्यों हर किसी को दिखाते हो अपना जख़्म खोलकर..
मोहन यहाँ कौन हर किसी के जख्मों पर मरहम लगाता है..