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खुद को गंगा की तरह पवित्र मत समझिए गन्दे नाले का पानी हो तुम खुद को कमल का फूल मत समझिए ।। नरेन्द्र परमार ✍️
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हर कमियां आप मुझमें मत ढूंढिए ज़रा खुद को एक बार आप आईने में भी देखिए ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "
पत्नी स्वामी जी आज़ रविवार है शाम को खाना में नहीं बनाउंगी आज़ छूट्टी रहेंगी ! पति कोई बात नहीं है में रेस्टोरेंट में जाकर खाना खा लूंगा ! पत्नी तो में कहा खाना खाऊंगी ??? 🤔🤔🤔 पति तुम अपना खाना बनाकर खा लेना 😀😀🤣🤣🤣 पत्नी 😡😡😡😡🤫🤫 नरेन्द्र परमार ✍️
नहीं जानने वाले लोग,वो भी मुझे जानते हैं वो मुझे नहीं ??? मेरी काबिलियत को पहेचानते है ।। नरेन्द्र परमार ✍️
सेल्फ़ी के चक्कर में कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं ! समझाने वाले बड़े बुजुर्ग समझाते भी है आज़ की नई जनरेशन को ! जो लोग सेल्फ़ी की वज़ह से अपना वारिस गंवा चुके हैं ।। नरेन्द्र परमार ✍️
अब तो हमें तेरी मोहब्बत से भरोसा ही उठ गया जब से तुमने अपना रंग बदलना शुरू कर दिया ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "
मुझसे एक गुस्ताखी हों गई है तुझे बगैर पहेचाने मोहब्बत जो हों गई है ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "
ग़लती तेरी थी या फिर मेरी ??? ऐ तो मुझे नहीं पता ! किंतु ग़लती तो ईश्वर की थी जो तुझे मेरी तक़दीर में नहीं लिखा ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "
वो हररोज कोलगेट से ब्रस करती थी दांत उसके चांदी जैसे चमकदार थे ! दिल मेरा उसकी एक मुस्कान पर आ गया किंतु उसका दिल तो पत्थर का निकला ।। नरेन्द्र परमार ✍️
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