ना लगा मरहम अब मेरे जख्मों पर -ए -ज़ालिम, की अब तो दवा भी दर्द देती है.. .... संपर्क करें pandeyneerja1910@gmail.com

जब भी परिवर्तन की खातिर
कोई अलख जगाता है।
घोर घने अंधियारे में
जब कोई दीप जलाता है
मंजधारे में डूबती नैया
जब कोई पार लगाता है
तब अदना सा वो इंसान मसीहा बन जाता है
क्या दरकार उसे थी तीन तलाक़ हटाने थी
हलाला प्रेमी मौलानाओं के खिलाफ जाने की
क्या क्य भुगता क्या क्या गुजरी ये पूछो उस नारी से
तीन तलाक़ और हलाला झेली उस बेचारी से
घोर घनेरे अंधियारे में जब कोई दीप जलाता है
मझधार में डूबती नैया जब कोई पार लगाता है
तब अदना सा वह इंसान मसीहा बन जाता है
मैं क्या बोलूं क्या बतलाऊ
जिसने किया जीवन समर्पित देश की खातिर
मां बहन पत्नी और भाई छोड़ा देश की खातिर
क्या समझेंगे क्या जानेंगे ये पीढ़ी दर पीढ़ी सत्ता भोगने वाले ये सत्ता के लोलुप नेता देश जलाने वाले,
भोली भाली जनता को भड़काने वाले,
मैं ना कार्य कर्ता भाजपा की ना आलोचक कांग्रेस की,
मैं एक नारी सीधी साधी घर बार चलाने वाली।

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Neerja Pandey लिखित कहानी "नकाब - 1" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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कौन है हत्यारा ये अभी राज है।
हर शक्श अपने दिल में छुपाए एक राज है।
परत दर परत राज जब खुलेगा...
हर चेहरे से नकाब उतरेगा।

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Neerja Pandey लिखित उपन्यास "पल पल दिल के पास" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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आया सावन का महीना,
अब लागे दिल कहीं ना।
दौड़ी बाबा गलियां जाऊं,
जल बेलपत्र चढ़ाऊं।

"नकाब - 1" by Neerja Pandey read free on Matrubharti
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ना दूध है ना फल है,
मेरे पास सिर्फ जल है।
बाबा इसे स्वीकार करो,
मेरी नैया पार करो।

गुरु गर्व है..गुरु सर्व है,
गुरु ही खेवन हार।
रख दो सर पर हाथ मेरे तुम,
हो जाए उद्धार।

-Neerja Pandey

Thanks to all my curious and loving readers for supporting me all the time and inspiring me to share more of my creations.

हार नहीं मानी हमने,
जीवन के तूफानों से।
रार नही ठानी हमने,
गैर होते अपनों से।

Neerja Pandey लिखित उपन्यास "पल पल दिल के पास" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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