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💫उस चाँदनी रात के नीचे💫 वो चाँदनी रात थी, पर ज़मीन पर अँधेरा था, नन्ही उम्र की मासूम आँखों में अब भी सपना सवेरा था। वो गुड़िया, जिसने कभी डर को जाना न था, आज दानवों की दुनिया में अकेली ठहरी, पर हिम्मत उसकी ऐसी थी, कि आँसू भी थम गए — जब उसने "ना" कहकर ज़माना गहरी। उसका छोटा भाई — जिसके हाथों में अभी खिलौने थे, वो दीवार बना खड़ा रहा, जैसे रक्षक कोई, टूटे हुए सपनों के कोने थे। दर्द ने घेरा, ज़ुल्म ने रौंदा, पर आत्मा नहीं टूटी उनकी, उनकी खामोशी आज भी चीख बनकर हर औरत की आँखों में बोलती। अब वो नहीं हैं — पर उस वीरान जगह पर जब हवा चलती है, तो लगता है जैसे कोई कह रहा हो — “हम हारे नहीं, बस कहानी अधूरी रह गई।”
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