Quotes by Yogesh verma in Bitesapp read free

Yogesh verma

Yogesh verma

@pradeepverma.919819


"न घर रहा, न छत रही, न वो मंज़र पुराना रहा,
मैं तो बस एक 'टूटी खिड़की का मुसाफिर' अनजाना रहा।"
"लोग ढूंढते हैं महलों में सुकून अपनी ज़िंदगी का,
मेरा तो इन दरारों के बीच ही सारा ज़माना रहा।"
- Yogesh verma

Read More