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“एकतरफ़ा प्रेम” — राधा की मौन व्यथा मैंने तुमसे प्रेम किया, श्याम, पर कभी जताया नहीं, क्योंकि तुम्हें पाना नहीं, तुम्हें पूजना मेरा स्वभाव था। तुम मुस्कराए, तो संसार हँस पड़ा, तुम उदास हुए, तो मेरी आत्मा रोई, तुम्हें खबर तक न हुई कभी, कि मेरी हर साँस तुम्हारे नाम से जुड़ी थी। मैंने तुम्हारी राह देखी, पर तुम्हें रोकना नहीं चाहा, क्योंकि प्रेम अधिकार नहीं, स्वतंत्रता की पहली शर्त होता है। तुम रुकते तो मेरी दुनिया बनती, तुम चलते तो मेरी पूजा होती, मैंने हर हाल में तुम्हें चाहा, बिना शर्त, बिना शिकायत, बिना सौदे के। तुम किसी और की धड़कन बने, तो भी मैंने दुआ की, क्योंकि मेरा प्रेम इतना छोटा नहीं था, कि तुम्हारी खुशी से जल जाए। मैंने अपना नाम तुम्हारे नाम से जोड़ा नहीं, पर अपनी रूह तुम्हें सौंप दी, दुनिया ने इसे हार कहा, पर मैंने इसे भक्ति माना। क्योंकि जो प्रेम पाया जाए, वह संबंध होता है, जो प्रेम खोकर भी जिया जाए, वही सच्चा प्रेम होता है। तुम कभी मेरे नहीं हुए, श्याम, फिर भी मैं हर जन्म तुम्हारी ही रहूँगी, क्योंकि कुछ प्रेम मिलन के लिए नहीं होते, वे तो बस निभाने के लिए होते हैं — एकतरफ़ा, फिर भी सम्पूर्ण। 💔🌸
“सिर्फ तुम्हारे लिए” — राधा की ओर से कृष्ण को पत्र सिर्फ तुम्हारे लिए, श्याम, मैंने अपनी पहचान भुला दी है, अब लोग मुझे राधा नहीं कहते, कहते हैं — कृष्ण की दीवानी। सिर्फ तुम्हारे लिए, मुरलीधर, मैंने लोक-लाज को आँचल में बाँधा है, क्योंकि प्रेम जब तुम्हारा हो जाए, तो संसार छोटा पड़ जाता है। सिर्फ तुम्हारे लिए, नंदलाल, मैंने हर श्वास को रास बना लिया है, तुम पास न भी हो, तो भी तुम्हारी उपस्थिति में जीना सीख लिया है। सिर्फ तुम्हारे लिए, श्यामसुंदर, मैंने विरह को भी वरदान माना है, क्योंकि तुम्हारी यादों में जलकर ही तो प्रेम कुंदन बनता है। सिर्फ तुम्हारे लिए, मोहन, मैंने आँसुओं से भी श्रृंगार किया है, क्योंकि तुमने सिखाया — सच्चा प्रेम अधिकार नहीं, अर्पण होता है। सिर्फ तुम्हारे लिए, केशव, मैंने हर शिकायत को मुस्कान में ढाला है, तुम जहाँ हो, वही मेरा धाम है, वृंदावन अब हृदय में बसा लिया है। सिर्फ तुम्हारे लिए, कान्हा, मैंने खुद को ही तुम्हारा नाम कर दिया है, अब राधा अलग नहीं रही, तुम में मिलकर ही तो पूरी हुई है। लोग कहते हैं — प्रेम में दूरी होती है, पर उन्हें क्या पता श्याम, तुम मुझसे दूर होकर भी मेरी हर धड़कन में बसते हो। और अगर जन्मों का फेर फिर आए, तो मैं फिर राधा बन जाऊँगी, किसी वरदान की इच्छा नहीं, बस तुम्हें फिर से चाहूँगी। 💙🦚 क्योंकि संसार में सब कुछ बदला जा सकता है, पर मेरा प्रेम नहीं — वो तो हर जन्म में वही रहेगा, सिर्फ तुम्हारे लिए, कृष्ण। 🌸
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