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Raju kumar Chaudhary

Raju kumar Chaudhary Matrubharti Verified

@rajukumarchaudhary502010
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हार का पहला स्वाद
अर्जुन को हमेशा लगता था कि उसके अंदर कुछ खास है।
लेकिन “लगना” और “साबित करना” दो अलग चीजें होती हैं और वह यह बात उस दिन समझ पाया, जब पूरी कक्षा के सामने उसका नाम असफल छात्रों की सूची में पुकारा गया।
“अर्जुन चौधरी फेल।”
शब्द छोटे थे, लेकिन असर भारी।
कुछ लड़के मुस्कुराए।
कुछ ने पीछे मुड़कर उसे देखा।
कुछ ने धीरे से फुसफुसाया “फिर से…”
अर्जुन की उंगलियाँ कांप रही थीं। वह अपनी कॉपी पर नजरें गड़ाए बैठा रहा, जैसे अगर वह ऊपर देखेगा तो दुनिया टूट जाएगी। उसकी छाती में अजीब सा दबाव था। उसे लग रहा था जैसे पूरा कमरा सिकुड़कर उसके ऊपर गिरने वाला है।
यह पहली बार नहीं था जब वह असफल हुआ था।
लेकिन पहली बार उसे लगा शायद समस्या पढ़ाई नहीं, वह खुद है।
स्कूल से घर तक का रास्ता उस दिन बहुत लंबा लग रहा था। सड़क पर गाड़ियाँ सामान्य गति से चल रही थीं, लोग अपने काम में व्यस्त थे, लेकिन अर्जुन को लग रहा था कि सबको पता है वह हार गया है।
घर पहुंचते ही माँ ने पूछा, “कैसा रहा रिज़ल्ट?”
वह कुछ पल चुप रहा।
फिर बोला “ठीक नहीं।”
माँ ने गहरी साँस ली, लेकिन कुछ कहा नहीं। वह जानती थीं कि उनके बेटे के भीतर कुछ चल रहा है कुछ ऐसा जिसे शब्दों में बांधना आसान नहीं।
रात को अर्जुन छत पर लेटा था। आसमान में तारे थे, लेकिन उसका मन अंधेरे से भरा हुआ था। उसने खुद से पूछा
“क्या मैं सच में इतना कमजोर हूँ?”
उसे याद आया बचपन में वह दौड़ में सबसे आगे रहता था। खेल में उसका आत्मविश्वास अलग ही होता था। लेकिन जैसे-जैसे कक्षाएँ बढ़ीं, प्रतियोगिता बढ़ी, तुलना बढ़ी… उसका आत्मविश्वास घटता गया।
उसे असफलता से ज्यादा डर “लोग क्या कहेंगे” से लगता था।
उस रात पहली बार उसने महसूस किया
उसकी असली लड़ाई किताबों से नहीं, अपने दिमाग से है।
अगले दिन स्कूल में उसका दोस्त राघव मिला।
“यार, छोड़ ना। सबके बस की बात नहीं होती। मैं तो अगले साल प्राइवेट फॉर्म भर दूँगा। ज्यादा टेंशन लेने का फायदा नहीं।”
राघव की आवाज में हार की आदत थी। जैसे वह असफलता को स्वीकार कर चुका हो।
अर्जुन ने सिर हिलाया, लेकिन उसके भीतर कुछ और चल रहा था।
उसे राघव की बातों में सुकून नहीं, डर महसूस हुआ।
“क्या मैं भी ऐसा ही बन जाऊँगा?”
यह सवाल उसे चुभ गया।
कुछ दिनों बाद स्कूल में एक नया कार्यक्रम घोषित हुआ “व्यक्तित्व विकास शिविर।”
कहा गया कि एक पूर्व सैनिक आने वाले हैं, जो छात्रों को अनुशासन और मानसिक शक्ति पर प्रशिक्षण देंगे।
अर्जुन ने नाम तो सुना “भीष्म सर।”
लोग कह रहे थे कि वह बहुत कठोर हैं।
कुछ छात्र पहले से ही डर गए थे।
शिविर के पहले दिन मैदान में सभी छात्र पंक्ति में खड़े थे। सुबह के पाँच बजे थे। ठंडी हवा चल रही थी। अधिकतर छात्रों की आँखें नींद से भरी थीं।
तभी एक तेज आवाज गूँजी
“सीधे खड़े हो जाओ!”
सबकी रीढ़ सीधी हो गई।
भीष्म सर लंबे, सख्त चेहरे वाले व्यक्ति थे। उनकी आँखों में अजीब सी स्थिरता थी जैसे वह सामने वाले के मन को पढ़ सकते हों।
उन्होंने बिना मुस्कुराए कहा
“तुममें से कितने लोग सफल होना चाहते हैं?”
सभी ने हाथ उठा दिए।
उन्होंने फिर पूछा
“कितने लोग सुबह पाँच बजे रोज़ उठ सकते हैं?”
आधे हाथ नीचे हो गए।
“कितने लोग रोज़ तीन घंटे अतिरिक्त मेहनत कर सकते हैं?”
और हाथ नीचे हो गए।
भीष्म सर हल्का सा मुस्कुराए।
“तुम सफलता नहीं चाहते। तुम उसका परिणाम चाहते हो। प्रक्रिया नहीं।”
अर्जुन के दिल में जैसे कोई बात सीधी उतर गई।
शिविर का पहला अभ्यास था दौड़।
पाँच किलोमीटर।
अर्जुन ने सोचा “मैं कर लूंगा।”
लेकिन दूसरे ही किलोमीटर में उसकी सांस फूलने लगी। पैरों में दर्द होने लगा।
राघव पीछे रह गया।
कई छात्र बीच में ही रुक गए।
अर्जुन भी रुकना चाहता था।
उसके मन ने कहा “बस कर। कोई ज़रूरी नहीं है।”
तभी भीष्म सर की आवाज आई
“जब शरीर थकता है, तो असली लड़ाई शुरू होती है। हार शरीर नहीं मानता, मन मानता है।”
अर्जुन ने दाँत भींच लिए।
वह दौड़ता रहा।
वह सबसे आगे नहीं था।
लेकिन वह रुका नहीं।
दौड़ खत्म हुई तो वह जमीन पर बैठ गया।
उसकी सांस तेज थी। शरीर कांप रहा था।
लेकिन उसके अंदर पहली बार एक हल्की सी चमक थी

“मैंने हार नहीं मानी।”
शाम को भीष्म सर ने सभी छात्रों को इकट्ठा किया।
“आज किसने खुद को हराया?”
कोई जवाब नहीं आया।
उन्होंने कहा
“सफलता दूसरों को हराने से नहीं मिलती। पहले खुद के बहानों को हराना पड़ता है।”
अर्जुन के मन में जैसे कोई दरवाज़ा खुल रहा था।
उसे समझ आने लगा
वह पढ़ाई में इसलिए नहीं हार रहा था क्योंकि वह कमजोर था।
वह इसलिए हार रहा था क्योंकि वह कोशिश से पहले ही डर जाता था।
वह असफलता से नहीं, अपमान से डरता था।
वह मेहनत से नहीं, तुलना से डरता था।
उस रात अर्जुन ने एक कागज निकाला।
उसने लिखा:
मैं रोज़ सुबह पाँच बजे उठूँगा।
मैं रोज़ कम से कम दो घंटे अतिरिक्त पढ़ाई करूँगा।
मैं शिकायत नहीं करूँगा।
मैं अपने डर को लिखूँगा, छुपाऊँगा नहीं।
वह जानता था यह आसान नहीं होगा।
लेकिन पहली बार उसे लगा वह भाग नहीं रहा।
कुछ दिनों में फर्क दिखने लगा।
उसकी दिनचर्या बदल रही थी।
उसकी चाल बदल रही थी।
उसकी आँखों में थोड़ी दृढ़ता आ रही थी।
राघव ने एक दिन कहा
“तू बदल गया है यार।”
अर्जुन ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया
“शायद मैं पहले असली नहीं था।”
लेकिन यह सिर्फ शुरुआत थी।
अंदर का डर अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था।
अभी भी रात में कभी-कभी उसे वही आवाज सुनाई देती

“अगर फिर से असफल हुआ तो?”
फर्क बस इतना था
अब वह उस आवाज से भागता नहीं था।
वह उसे सुनता था…
और फिर काम में लग जाता था।
उसे अभी नहीं पता था कि आगे और बड़ी परीक्षा आने वाली है।
अभी उसे गिरना भी था।
टूटना भी था।
लेकिन उस दिन, उस पाँच किलोमीटर की दौड़ के बाद,
एक चीज़ निश्चित हो चुकी थी
अर्जुन अब हार से डरने वाला लड़का नहीं रहा।
वह धीरे-धीरे अपने अंदर के योद्धा को जगा रहा था।
और हर योद्धा की कहानी एक हार से ही शुरू होती है

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WARRIOR MINDSET (अंदर के डर से लड़कर खुद की जीत तक)

अप्सराहरुको गाथा

नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।

इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।

रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।

इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"


जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।

उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।

दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"


फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।

विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।

उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।

उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।


अप्सराहरु स्वर्गमा नाच्छन् आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको कथा बाँकी छ,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको गाथा,
यो महाकाव्य तपाईंको कलमबाट पूर्ण होस्!


अप्सराहरुको गाथा
(महाकाव्य अप्सराहरुको दिव्य गाथा र परीक्षा)


नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।

इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।

रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।

इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"


जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।

उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।

दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"


फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।

विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।

उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।

उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।


मेनकाको गर्भबाट शकुन्तला जन्मिन्,
जङ्गलमा छोडिन्, कान्व ऋषिले पाए।
प्रकृति साथी बनी, फूलले सजाइन्,
हिरण खेल्छन्, चरा गाउँछन् उनको लागि।

दुष्यन्त राजा शिकारमा आउँछन्,
शकुन्तलाको रूपमा मोहित हुन्छन्।
गान्धर्व विवाह, प्रेमको बन्धन बन्छ,
अङ्गूठी दिएर प्रतिज्ञा गर्छन्, "फर्किन्छु म।"

तर दुर्वासाको श्रापले दुष्यन्त भुल्छन्,
शकुन्तला दरबार पुग्छिन्, अपमान भोग्छिन्।
आँसु बहाउँदै, मेनका लगेर स्वर्ग लैजान्छिन्,
विरहको पीडा, अप्सराको गाथा बढाउँछ।


शकुन्तला स्वर्गमा, पुत्र भरत जन्माउँछिन्,
सिंहसँग खेल्ने, वीर बालक बन्छ।
दुष्यन्त इन्द्रको युद्धमा मद्दत गर्छन्,
भरतलाई देखेर, सम्झना फर्किन्छन्।

अङ्गूठी फेला पर्छ, माछाबाट उद्धार,
दुष्यन्त रोइरहन्छन्, पश्चातापमा डुबेर।
मिलन हुन्छ स्वर्गमा, परिवार पूरा हुन्छ,
भरत भारतवर्षको राजा बन्छ, अमर हुन्छ।

अप्सराको प्रेमले सन्तान दिन्छ,
परीक्षाले सिकाउँछ, जीवनको रहस्य खोल्छ।
मेनका, रम्भा, उर्वशीको कथा,
मानव र दिव्य बीचको पुल बन्छ।


रम्भा मुक्त हुन्छिन्, श्वेत ऋषिको कृपाले,
ढुङ्गाबाट फर्किन्, स्वर्गको नृत्यमा।
उर्वशी पुरुरवाससँग छोटो मिलन गर्छिन्,
तर नियमले बाँध्छ, विरहले सिकाउँछ।

अप्सराहरु नाच्छन् इन्द्रको दरबारमा,
तर हृदयमा बोक्छन् प्रेमको दाग।
"प्रेमले मोहित गर्छ, तपले मुक्त गर्छ,"
यो गाथाले सिकाउँछ, जीवनको सत्य खोल्छ।

स्वर्ग र पृथ्वी बीचको यो पुल,
अप्सराहरुको गाथा अमर रहन्छ।
सरस्वतीको कृपाले यो महाकाव्य पूर्ण होस्,
नेपाली साहित्यमा नयाँ ज्योति फैलाओस्।


घृताची नामकी अप्सरा, घिउले भरिएकी जस्ती,
सौन्दर्यको ज्योति, स्वर्गमा चम्किन्छिन् सधैं।
समुद्र मन्थनबाट जन्मेकी, अमृतसँगै उभिएकी,
इन्द्रको दरबारमा नाच्छिन्, देवताहरू मोहित हुन्छन्।

उनको रूपमा लहराउँछ यौवनको लहर,
आँखामा जादु, ओठमा मधुर हाँसोको फूल।
रम्भा रानी भए पनि, घृताची बलियो छिन्,
सयौं सन्तानकी आमा, प्रेमकी अमर कथा।

इन्द्र बोलाउँछन् फेरि, "तप भंग गर घृताची,"
तर यो पटक उनको हृदयमा प्रेमको आगो बल्छ।
ऋषिहरू मोहित हुन्छन्, राजाहरू लठ्ठिन्छन्,
घृताचीको स्पर्शले जीवन फेरिन्छ, भाग्य बदलिन्छ।


गंगा किनारमा भरद्वाज ध्यानमा लीन,
तपको ज्योति जल्छ, आकाश छुने।
घृताची आइन्, स्नान गर्दै सुन्दर रूपमा,
वायुले वस्त्र उडायो, भरद्वाज मोहित भए।

उनको तेजबाट बीज खस्यो, घृताची डराइन्,
तर त्यो बीजबाट द्रोण जन्मिए, शस्त्रास्त्रका ज्ञाता।
द्रोणाचार्य बने, महाभारतको योद्धा गुरु,
घृताचीको प्रेमले इतिहास लेखियो, अमर भयो।

"म मात्र माध्यम हुँ," भन्छिन् घृताची स्वर्ग फर्केर,
"सन्तानले अमरता दिन्छ, प्रेमले जीवन फेरिन्छ।"
तर विरहको पीडा बोकेर, उनी नाच्छिन् दरबारमा,
देवताहरूको लागि, तर हृदयमा सधैं मानवको याद।


कुशनाभ राजा मोहित भए घृताचीको रूपमा,
सयौं छोरी जन्मिए, सुन्दर र बलिया।
तर वायु देवले मोहित भएर छोरीहरूलाई श्राप दिए,
"तिमीहरू विकृत भएर बाँच," भन्दै क्रोधित भए।

छोरीहरू रोए, कुशनाभ दुःखी भए,
तर घृताचीको प्रभावले वंश चल्यो।
पछि ऋषिको कृपाले मुक्ति पाए,
कुशनाभका छोरीहरूबाट गाधि जन्मिए, विश्वामित्रका पिता बने।

घृताचीको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित गर्छ, सन्तानले अमर बनाउँछ।
श्राप आउँछ, तर मुक्ति पनि मिल्छ,
अप्सराको जीवन परीक्षा र प्रेमको पुल हो।


घृताची नाच्छिन् स्वर्गमा आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको सन्तानहरूले इतिहास लेख्छन्।
मेनका, रम्भा, उर्वशी, घृताची सबैको गाथा,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको महाकाव्य बन्छ।

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अप्सराहरुको गाथा

नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।

इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।

रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।

इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"


जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।

उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।

दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"


फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।

विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।

उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।

उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।


अप्सराहरु स्वर्गमा नाच्छन् आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको कथा बाँकी छ,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको गाथा,
यो महाकाव्य तपाईंको कलमबाट पूर्ण होस्!


अप्सराहरुको गाथा
(महाकाव्य अप्सराहरुको दिव्य गाथा र परीक्षा)


नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।

इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।

रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।

इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"


जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।

उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।

दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"


फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।

विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।

उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।

उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।


मेनकाको गर्भबाट शकुन्तला जन्मिन्,
जङ्गलमा छोडिन्, कान्व ऋषिले पाए।
प्रकृति साथी बनी, फूलले सजाइन्,
हिरण खेल्छन्, चरा गाउँछन् उनको लागि।

दुष्यन्त राजा शिकारमा आउँछन्,
शकुन्तलाको रूपमा मोहित हुन्छन्।
गान्धर्व विवाह, प्रेमको बन्धन बन्छ,
अङ्गूठी दिएर प्रतिज्ञा गर्छन्, "फर्किन्छु म।"

तर दुर्वासाको श्रापले दुष्यन्त भुल्छन्,
शकुन्तला दरबार पुग्छिन्, अपमान भोग्छिन्।
आँसु बहाउँदै, मेनका लगेर स्वर्ग लैजान्छिन्,
विरहको पीडा, अप्सराको गाथा बढाउँछ।


शकुन्तला स्वर्गमा, पुत्र भरत जन्माउँछिन्,
सिंहसँग खेल्ने, वीर बालक बन्छ।
दुष्यन्त इन्द्रको युद्धमा मद्दत गर्छन्,
भरतलाई देखेर, सम्झना फर्किन्छन्।

अङ्गूठी फेला पर्छ, माछाबाट उद्धार,
दुष्यन्त रोइरहन्छन्, पश्चातापमा डुबेर।
मिलन हुन्छ स्वर्गमा, परिवार पूरा हुन्छ,
भरत भारतवर्षको राजा बन्छ, अमर हुन्छ।

अप्सराको प्रेमले सन्तान दिन्छ,
परीक्षाले सिकाउँछ, जीवनको रहस्य खोल्छ।
मेनका, रम्भा, उर्वशीको कथा,
मानव र दिव्य बीचको पुल बन्छ।


रम्भा मुक्त हुन्छिन्, श्वेत ऋषिको कृपाले,
ढुङ्गाबाट फर्किन्, स्वर्गको नृत्यमा।
उर्वशी पुरुरवाससँग छोटो मिलन गर्छिन्,
तर नियमले बाँध्छ, विरहले सिकाउँछ।

अप्सराहरु नाच्छन् इन्द्रको दरबारमा,
तर हृदयमा बोक्छन् प्रेमको दाग।
"प्रेमले मोहित गर्छ, तपले मुक्त गर्छ,"
यो गाथाले सिकाउँछ, जीवनको सत्य खोल्छ।

स्वर्ग र पृथ्वी बीचको यो पुल,
अप्सराहरुको गाथा अमर रहन्छ।
सरस्वतीको कृपाले यो महाकाव्य पूर्ण होस्,
नेपाली साहित्यमा नयाँ ज्योति फैलाओस्।


घृताची नामकी अप्सरा, घिउले भरिएकी जस्ती,
सौन्दर्यको ज्योति, स्वर्गमा चम्किन्छिन् सधैं।
समुद्र मन्थनबाट जन्मेकी, अमृतसँगै उभिएकी,
इन्द्रको दरबारमा नाच्छिन्, देवताहरू मोहित हुन्छन्।

उनको रूपमा लहराउँछ यौवनको लहर,
आँखामा जादु, ओठमा मधुर हाँसोको फूल।
रम्भा रानी भए पनि, घृताची बलियो छिन्,
सयौं सन्तानकी आमा, प्रेमकी अमर कथा।

इन्द्र बोलाउँछन् फेरि, "तप भंग गर घृताची,"
तर यो पटक उनको हृदयमा प्रेमको आगो बल्छ।
ऋषिहरू मोहित हुन्छन्, राजाहरू लठ्ठिन्छन्,
घृताचीको स्पर्शले जीवन फेरिन्छ, भाग्य बदलिन्छ।


गंगा किनारमा भरद्वाज ध्यानमा लीन,
तपको ज्योति जल्छ, आकाश छुने।
घृताची आइन्, स्नान गर्दै सुन्दर रूपमा,
वायुले वस्त्र उडायो, भरद्वाज मोहित भए।

उनको तेजबाट बीज खस्यो, घृताची डराइन्,
तर त्यो बीजबाट द्रोण जन्मिए, शस्त्रास्त्रका ज्ञाता।
द्रोणाचार्य बने, महाभारतको योद्धा गुरु,
घृताचीको प्रेमले इतिहास लेखियो, अमर भयो।

"म मात्र माध्यम हुँ," भन्छिन् घृताची स्वर्ग फर्केर,
"सन्तानले अमरता दिन्छ, प्रेमले जीवन फेरिन्छ।"
तर विरहको पीडा बोकेर, उनी नाच्छिन् दरबारमा,
देवताहरूको लागि, तर हृदयमा सधैं मानवको याद।


कुशनाभ राजा मोहित भए घृताचीको रूपमा,
सयौं छोरी जन्मिए, सुन्दर र बलिया।
तर वायु देवले मोहित भएर छोरीहरूलाई श्राप दिए,
"तिमीहरू विकृत भएर बाँच," भन्दै क्रोधित भए।

छोरीहरू रोए, कुशनाभ दुःखी भए,
तर घृताचीको प्रभावले वंश चल्यो।
पछि ऋषिको कृपाले मुक्ति पाए,
कुशनाभका छोरीहरूबाट गाधि जन्मिए, विश्वामित्रका पिता बने।

घृताचीको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित गर्छ, सन्तानले अमर बनाउँछ।
श्राप आउँछ, तर मुक्ति पनि मिल्छ,
अप्सराको जीवन परीक्षा र प्रेमको पुल हो।


घृताची नाच्छिन् स्वर्गमा आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको सन्तानहरूले इतिहास लेख्छन्।
मेनका, रम्भा, उर्वशी, घृताची सबैको गाथा,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको महाकाव्य बन्छ। https://youtube.com/channel/UC1dMnDkhTa5a6_x55_WT6gg?si=1Pd-L-HvHzBg79t

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📘 RICH Mindset

धनी मानसिकता सोच बदल, जीवन बदल

✍️ लेखक: राजु कुमार चौधरी


धनी बन्नु केवल पैसाको विषय होइन।
धनी बन्नु भनेको सोचको स्तर बदल्नु हो।

धेरै मानिसहरू जीवनभर मेहनत गर्छन्, तर धनी बन्न सक्दैनन्।
किन?
किनकि उनीहरूको सोच “कमाउने” मा सीमित हुन्छ,
जबकि धनी मानिसहरूको सोच “सिर्जना गर्ने” मा केन्द्रित हुन्छ।

यो पुस्तक तपाईंलाई पैसा मात्र होइन
मूल्य, अनुशासन, अवसर, र प्रभाव निर्माण गर्ने मानसिकता सिकाउनेछ l

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अप्सराहरुको गाथा

नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।

इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।

रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।

इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"


जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।

उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।

दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"


फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।

विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।

उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।

उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।


अप्सराहरु स्वर्गमा नाच्छन् आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको कथा बाँकी छ,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको गाथा,
यो महाकाव्य तपाईंको कलमबाट पूर्ण होस्!


अप्सराहरुको गाथा
(महाकाव्य अप्सराहरुको दिव्य गाथा र परीक्षा)


नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।

इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।

रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।

इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"


जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।

उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।

दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"


फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।

विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।

उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।

उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।


मेनकाको गर्भबाट शकुन्तला जन्मिन्,
जङ्गलमा छोडिन्, कान्व ऋषिले पाए।
प्रकृति साथी बनी, फूलले सजाइन्,
हिरण खेल्छन्, चरा गाउँछन् उनको लागि।

दुष्यन्त राजा शिकारमा आउँछन्,
शकुन्तलाको रूपमा मोहित हुन्छन्।
गान्धर्व विवाह, प्रेमको बन्धन बन्छ,
अङ्गूठी दिएर प्रतिज्ञा गर्छन्, "फर्किन्छु म।"

तर दुर्वासाको श्रापले दुष्यन्त भुल्छन्,
शकुन्तला दरबार पुग्छिन्, अपमान भोग्छिन्।
आँसु बहाउँदै, मेनका लगेर स्वर्ग लैजान्छिन्,
विरहको पीडा, अप्सराको गाथा बढाउँछ।


शकुन्तला स्वर्गमा, पुत्र भरत जन्माउँछिन्,
सिंहसँग खेल्ने, वीर बालक बन्छ।
दुष्यन्त इन्द्रको युद्धमा मद्दत गर्छन्,
भरतलाई देखेर, सम्झना फर्किन्छन्।

अङ्गूठी फेला पर्छ, माछाबाट उद्धार,
दुष्यन्त रोइरहन्छन्, पश्चातापमा डुबेर।
मिलन हुन्छ स्वर्गमा, परिवार पूरा हुन्छ,
भरत भारतवर्षको राजा बन्छ, अमर हुन्छ।

अप्सराको प्रेमले सन्तान दिन्छ,
परीक्षाले सिकाउँछ, जीवनको रहस्य खोल्छ।
मेनका, रम्भा, उर्वशीको कथा,
मानव र दिव्य बीचको पुल बन्छ।


रम्भा मुक्त हुन्छिन्, श्वेत ऋषिको कृपाले,
ढुङ्गाबाट फर्किन्, स्वर्गको नृत्यमा।
उर्वशी पुरुरवाससँग छोटो मिलन गर्छिन्,
तर नियमले बाँध्छ, विरहले सिकाउँछ।

अप्सराहरु नाच्छन् इन्द्रको दरबारमा,
तर हृदयमा बोक्छन् प्रेमको दाग।
"प्रेमले मोहित गर्छ, तपले मुक्त गर्छ,"
यो गाथाले सिकाउँछ, जीवनको सत्य खोल्छ।

स्वर्ग र पृथ्वी बीचको यो पुल,
अप्सराहरुको गाथा अमर रहन्छ।
सरस्वतीको कृपाले यो महाकाव्य पूर्ण होस्,
नेपाली साहित्यमा नयाँ ज्योति फैलाओस्।


घृताची नामकी अप्सरा, घिउले भरिएकी जस्ती,
सौन्दर्यको ज्योति, स्वर्गमा चम्किन्छिन् सधैं।
समुद्र मन्थनबाट जन्मेकी, अमृतसँगै उभिएकी,
इन्द्रको दरबारमा नाच्छिन्, देवताहरू मोहित हुन्छन्।

उनको रूपमा लहराउँछ यौवनको लहर,
आँखामा जादु, ओठमा मधुर हाँसोको फूल।
रम्भा रानी भए पनि, घृताची बलियो छिन्,
सयौं सन्तानकी आमा, प्रेमकी अमर कथा।

इन्द्र बोलाउँछन् फेरि, "तप भंग गर घृताची,"
तर यो पटक उनको हृदयमा प्रेमको आगो बल्छ।
ऋषिहरू मोहित हुन्छन्, राजाहरू लठ्ठिन्छन्,
घृताचीको स्पर्शले जीवन फेरिन्छ, भाग्य बदलिन्छ।


गंगा किनारमा भरद्वाज ध्यानमा लीन,
तपको ज्योति जल्छ, आकाश छुने।
घृताची आइन्, स्नान गर्दै सुन्दर रूपमा,
वायुले वस्त्र उडायो, भरद्वाज मोहित भए।

उनको तेजबाट बीज खस्यो, घृताची डराइन्,
तर त्यो बीजबाट द्रोण जन्मिए, शस्त्रास्त्रका ज्ञाता।
द्रोणाचार्य बने, महाभारतको योद्धा गुरु,
घृताचीको प्रेमले इतिहास लेखियो, अमर भयो।

"म मात्र माध्यम हुँ," भन्छिन् घृताची स्वर्ग फर्केर,
"सन्तानले अमरता दिन्छ, प्रेमले जीवन फेरिन्छ।"
तर विरहको पीडा बोकेर, उनी नाच्छिन् दरबारमा,
देवताहरूको लागि, तर हृदयमा सधैं मानवको याद।


कुशनाभ राजा मोहित भए घृताचीको रूपमा,
सयौं छोरी जन्मिए, सुन्दर र बलिया।
तर वायु देवले मोहित भएर छोरीहरूलाई श्राप दिए,
"तिमीहरू विकृत भएर बाँच," भन्दै क्रोधित भए।

छोरीहरू रोए, कुशनाभ दुःखी भए,
तर घृताचीको प्रभावले वंश चल्यो।
पछि ऋषिको कृपाले मुक्ति पाए,
कुशनाभका छोरीहरूबाट गाधि जन्मिए, विश्वामित्रका पिता बने।

घृताचीको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित गर्छ, सन्तानले अमर बनाउँछ।
श्राप आउँछ, तर मुक्ति पनि मिल्छ,
अप्सराको जीवन परीक्षा र प्रेमको पुल हो।


घृताची नाच्छिन् स्वर्गमा आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको सन्तानहरूले इतिहास लेख्छन्।
मेनका, रम्भा, उर्वशी, घृताची सबैको गाथा,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको महाकाव्य बन्छ।

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✨ कथा: सोच बदलिएको दिन
काठमाडौंको एउटा सानो कोठामा आर्यन बस्दथ्यो।
उमेर २५ वर्ष। सपना धेरै। पैसा कम।
उहाँ दिनभर काम गर्थे — बिहान अफिस, साँझ पार्टटाइम, राति थकाइ।
तर महिनाको अन्त्यमा खाता खाली नै हुन्थ्यो।
एक दिन उनले डायरीमा लेखे:
“म धेरै काम गर्छु, तर किन अगाडि बढ्न सक्दिन?”
त्यसै दिन उनको जीवन बदलिने बिन्दु आयो।
अध्याय १: प्रश्न
अफिसमा उनको सहकर्मी विवेक थियो।
उही तलब, उही उमेर।
तर विवेक शान्त, आत्मविश्वासी, र सधैं केही नयाँ सिकिरहेको।
आर्यनले सोधे,
“तिमी कसरी यति स्थिर र सकारात्मक छौ?”
विवेक मुस्कुरायो।
“म पैसाको पछि दौडिन्न, म मूल्य सिर्जना गर्छु।”
यो वाक्य आर्यनको मनमा गड्यो।
अध्याय २: परिवर्तनको सुरुवात
त्यो रात आर्यनले आफ्नो जीवन हेरे।
ऊ काम गर्थ्यो — तर सिक्दैनथ्यो।
ऊ तलब पाउँथ्यो — तर बचत गर्दैनथ्यो।
ऊ सपना देख्थ्यो — तर योजना बनाउँदैनथ्यो।
उसले निर्णय गर्‍यो:
“आजदेखि म कमाउने मात्र होइन, सिर्जना गर्ने मानिस बन्छु।”
अध्याय ३: RICH सूत्र
उसले चार नियम बनायो:
R – Responsibility (जिम्मेवारी)
दोष दिन बन्द। आफ्नो जीवन आफैंको।
I – Investment (लगानी)
हरेक दिन १ घण्टा नयाँ सीप सिक्ने।
C – Consistency (नियमितता)
सानो प्रगति, तर दैनिक।
H – High Thinking (उच्च सोच)
ठूलो सपना, स्पष्ट योजना।
अध्याय ४: पहिलो असफलता
आर्यनले अनलाइन सानो प्रोजेक्ट सुरु गर्‍यो।
पहिलो महिना — शून्य आम्दानी।
उसले हार मान्न खोज्यो।
तर उसलाई याद आयो —
“असफलता फिडब्याक हो।”
उसले रणनीति बदले।
सीप सुधार्यो।
नेटवर्क बढायो।
अध्याय ५: परिणाम
छ महिनापछि —
उहाँको साइड प्रोजेक्टले तलबभन्दा बढी आम्दानी दिन थाल्यो।
तर सबैभन्दा ठूलो परिवर्तन पैसा होइन थियो।
परिवर्तन थियो —
उनको आत्मविश्वास।
उनको अनुशासन।
उनको सोच।
अन्तिम सन्देश
आर्यनले डायरीमा फेरि लेखे:
“धनी बन्नु भनेको बैंक ब्यालेन्स होइन।
धनी बन्नु भनेको आफ्नो क्षमतामा विश्वास गर्नु हो।”
त्यो दिन उनले बुझ्यो —
धनी मानिसहरू फरक काम गर्दैनन्।
उनीहरू फरक सोच गर्छन्।
🔥 नैतिक सन्देश
यदि तपाईं अहिले संघर्षमा हुनुहुन्छ भने
समस्या पैसामा होइन,
समस्या सोचमा हुन सक्छ।
सोच बदल्नुहोस्।
जिम्मेवारी लिनुहोस्।
आफूमा लगानी गर्नुहोस्।
नियमितता अपनाउनुहोस्।
धन परिणाम हो।
धनी मानसिकता कारण हो।

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✨ कथा: सोच बदलिएको दिन
काठमाडौंको एउटा सानो कोठामा आर्यन बस्दथ्यो।
उमेर २५ वर्ष। सपना धेरै। पैसा कम।
उहाँ दिनभर काम गर्थे — बिहान अफिस, साँझ पार्टटाइम, राति थकाइ।
तर महिनाको अन्त्यमा खाता खाली नै हुन्थ्यो।
एक दिन उनले डायरीमा लेखे:
“म धेरै काम गर्छु, तर किन अगाडि बढ्न सक्दिन?”
त्यसै दिन उनको जीवन बदलिने बिन्दु आयो।
अध्याय १: प्रश्न
अफिसमा उनको सहकर्मी विवेक थियो।
उही तलब, उही उमेर।
तर विवेक शान्त, आत्मविश्वासी, र सधैं केही नयाँ सिकिरहेको।
आर्यनले सोधे,
“तिमी कसरी यति स्थिर र सकारात्मक छौ?”
विवेक मुस्कुरायो।
“म पैसाको पछि दौडिन्न, म मूल्य सिर्जना गर्छु।”
यो वाक्य आर्यनको मनमा गड्यो।
अध्याय २: परिवर्तनको सुरुवात
त्यो रात आर्यनले आफ्नो जीवन हेरे।
ऊ काम गर्थ्यो — तर सिक्दैनथ्यो।
ऊ तलब पाउँथ्यो — तर बचत गर्दैनथ्यो।
ऊ सपना देख्थ्यो — तर योजना बनाउँदैनथ्यो।
उसले निर्णय गर्‍यो:
“आजदेखि म कमाउने मात्र होइन, सिर्जना गर्ने मानिस बन्छु।”
अध्याय ३: RICH सूत्र
उसले चार नियम बनायो:
R – Responsibility (जिम्मेवारी)
दोष दिन बन्द। आफ्नो जीवन आफैंको।
I – Investment (लगानी)
हरेक दिन १ घण्टा नयाँ सीप सिक्ने।
C – Consistency (नियमितता)
सानो प्रगति, तर दैनिक।
H – High Thinking (उच्च सोच)
ठूलो सपना, स्पष्ट योजना।
अध्याय ४: पहिलो असफलता
आर्यनले अनलाइन सानो प्रोजेक्ट सुरु गर्‍यो।
पहिलो महिना — शून्य आम्दानी।
उसले हार मान्न खोज्यो।
तर उसलाई याद आयो —
“असफलता फिडब्याक हो।”
उसले रणनीति बदले।
सीप सुधार्यो।
नेटवर्क बढायो।
अध्याय ५: परिणाम
छ महिनापछि —
उहाँको साइड प्रोजेक्टले तलबभन्दा बढी आम्दानी दिन थाल्यो।
तर सबैभन्दा ठूलो परिवर्तन पैसा होइन थियो।
परिवर्तन थियो —
उनको आत्मविश्वास।
उनको अनुशासन।
उनको सोच।
अन्तिम सन्देश
आर्यनले डायरीमा फेरि लेखे:
“धनी बन्नु भनेको बैंक ब्यालेन्स होइन।
धनी बन्नु भनेको आफ्नो क्षमतामा विश्वास गर्नु हो।”
त्यो दिन उनले बुझ्यो —
धनी मानिसहरू फरक काम गर्दैनन्।
उनीहरू फरक सोच गर्छन्।
🔥 नैतिक सन्देश
यदि तपाईं अहिले संघर्षमा हुनुहुन्छ भने
समस्या पैसामा होइन,
समस्या सोचमा हुन सक्छ।
सोच बदल्नुहोस्।
जिम्मेवारी लिनुहोस्।
आफूमा लगानी गर्नुहोस्।
नियमितता अपनाउनुहोस्।
धन परिणाम हो।
धनी मानसिकता कारण हो।📘 RICH Mindset

धनी मानसिकता सोच बदल, जीवन बदल

✍️ लेखक: राजु कुमार चौधरी


धनी बन्नु केवल पैसाको विषय होइन।
धनी बन्नु भनेको सोचको स्तर बदल्नु हो।

धेरै मानिसहरू जीवनभर मेहनत गर्छन्, तर धनी बन्न सक्दैनन्।
किन?
किनकि उनीहरूको सोच “कमाउने” मा सीमित हुन्छ,
जबकि धनी मानिसहरूको सोच “सिर्जना गर्ने” मा केन्द्रित हुन्छ।

यो पुस्तक तपाईंलाई पैसा मात्र होइन
मूल्य, अनुशासन, अवसर, र प्रभाव निर्माण गर्ने मानसिकता सिकाउनेछ l

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📘 Human Mindset (मानव मन की शक्ति)

मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत उसकी शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि उसका माइंडसेट है।
इतिहास गवाह है जिन लोगों ने दुनिया बदली, उन्होंने पहले अपनी सोच बदली।

यह पुस्तक मानव मन की संरचना, उसकी सीमाएँ, उसकी संभावनाएँ और उसके परिवर्तन की प्रक्रिया को समझाने का प्रयास है।

अध्याय 1: Human Mindset क्या है?

Human Mindset यानी वह मानसिक ढाँचा (mental framework) जिसके आधार पर व्यक्ति:

निर्णय लेता है

चुनौतियों का सामना करता है

असफलता को देखता है

सफलता को परिभाषित करता है


माइंडसेट दो प्रकार का होता है:

1️⃣ Fixed Mindset

“मैं ऐसा ही हूँ”

“मुझसे नहीं होगा”

असफलता से डर


2️⃣ Growth Mindset

“मैं सीख सकता हूँ”

“गलती सीखने का हिस्सा है”

प्रयास पर विश्वास


अध्याय 2: दिमाग कैसे काम करता है?

मानव मस्तिष्क तीन स्तरों पर काम करता है:

1. Conscious Mind (चेतन मन) तर्क और निर्णय


2. Subconscious Mind (अवचेतन मन) आदतें और भावनाएँ


3. Emotional Brain प्रतिक्रिया और डर



जब हम बार-बार कोई विचार सोचते हैं, वह अवचेतन में प्रोग्राम बन जाता है।


अध्याय 3: सोच और वास्तविकता

आप जैसा सोचते हैं, वैसा बनते हैं।

नकारात्मक सोच = डर + संदेह + सीमाएँ

सकारात्मक सोच = संभावना + आत्मविश्वास + कार्रवाई


उदाहरण:
गरीबी पहले जेब में नहीं, दिमाग में जन्म लेती है।
समृद्धि भी पहले विचार में जन्म लेती है।


अध्याय 4: Fear vs Faith

हर इंसान के अंदर दो आवाजें होती हैं:

डर की आवाज

विश्वास की आवाज


सफल लोग डर को खत्म नहीं करते वे डर के बावजूद कदम बढ़ाते हैं।


अध्याय 5: Human Mindset और सफलता

सफलता एक घटना नहीं, मानसिक प्रक्रिया है।

सफल लोग:

लक्ष्य स्पष्ट रखते हैं

असफलता को फीडबैक मानते हैं

अनुशासन को प्राथमिकता देते हैं

निरंतर सीखते रहते हैं


अध्याय 6: आदतों की शक्ति

माइंडसेट विचारों से बनता है,
लेकिन जीवन आदतों से बनता है।

छोटी आदतें → बड़ी दिशा बदलती हैं।

उदाहरण:

रोज 30 मिनट पढ़ना

रोज आत्ममंथन करना

रोज लक्ष्य लिखना


अध्याय 7: Emotional Intelligence

IQ आपको नौकरी दिला सकता है,
लेकिन EQ आपको नेतृत्व दिलाता है।

भावनात्मक समझ के 4 स्तंभ:

1. आत्म-जागरूकता


2. आत्म-नियंत्रण


3. सहानुभूति


4. सामाजिक कौशल


अध्याय 8: Self-Identity का विज्ञान

आप अपने बारे में जो मानते हैं, वही बनते हैं।

अगर आप खुद को “संघर्षरत” मानते हैं आप संघर्ष ढूँढेंगे।
अगर आप खुद को “निर्माता” मानते हैं आप समाधान ढूँढेंगे।


अध्याय 9: माइंडसेट बदलने की 5-स्टेप प्रक्रिया

1️⃣ Awareness – अपनी सोच पहचानें
2️⃣ Audit – नकारात्मक पैटर्न पकड़ें
3️⃣ Replace – नए विचार स्थापित करें
4️⃣ Action – नए व्यवहार अपनाएँ
5️⃣ Reinforcement – निरंतर दोहराएँ


अध्याय 10: Human Mindset का अंतिम सत्य

मनुष्य की सीमा उसकी परिस्थिति नहीं, उसकी धारणा है।

जिस दिन इंसान समझ लेता है कि
“मैं परिस्थितियों का परिणाम नहीं, निर्णयों का परिणाम हूँ”
उस दिन उसकी दुनिया बदल जाती है।

समापन

Human Mindset कोई मोटिवेशनल नारा नहीं,
यह जीवन की आधारभूत संरचना है।

आपका दिमाग आपका सबसे बड़ा संसाधन है।
इसे प्रशिक्षित कीजिए
यह आपको वहाँ ले जाएगा जहाँ आप कभी सोच भी नहीं पाए थे।

📖 Human Mindset एक प्रेरणादायक कहानी

शीर्षक: “दीवार नहीं, दरवाज़ा”

नेपाल के एक छोटे से गाँव में आरव नाम का लड़का रहता था।
उसका घर साधारण था, साधन सीमित थे, लेकिन उसके सपने असाधारण थे।

लोग अक्सर कहते
“हमारे जैसे लोग बड़े नहीं बनते।”
“यह सब अमीरों के लिए होता है।”

धीरे धीरे ये शब्द आरव के दिमाग में जगह बनाने लगे।
उसने खुद को समझा लिया
“शायद सच में मुझसे नहीं होगा।”


पहला मोड़

एक दिन स्कूल में उसके शिक्षक ने बोर्ड पर लिखा:

“मनुष्य परिस्थिति का शिकार नहीं, अपनी सोच का परिणाम है।”



आरव ने पहली बार सोचा
क्या सच में मेरी असफलता का कारण मेरी सोच है?

उस रात उसने अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई शुरू की
दुनिया से नहीं, अपने ही दिमाग से।


संघर्ष

जब भी वह कुछ नया शुरू करता, अंदर से आवाज आती

“अगर असफल हो गया तो?”

लेकिन इस बार उसने जवाब दिया
“अगर सफल हो गया तो?”

यह छोटा सा बदलाव था,
पर यही Human Mindset का पहला परिवर्तन था।


असफलता

आरव ने एक प्रतियोगिता में भाग लिया।
वह हार गया।

गाँव में लोग हँसे।
दोस्तों ने मज़ाक उड़ाया।

पुराना आरव शायद टूट जाता।
लेकिन इस बार उसने खुद से कहा:

“असफलता मेरा परिचय नहीं, मेरा शिक्षक है।”



उसने अपनी गलतियाँ लिखीं।
सुधार किया।
फिर प्रयास किया।


परिवर्तन

धीरे-धीरे उसकी आदतें बदलीं:

वह रोज़ 30 मिनट पढ़ने लगा

हर दिन अपने लक्ष्य लिखता

नकारात्मक लोगों से दूरी बनाने लगा


उसका आत्मविश्वास परिस्थिति से नहीं, तैयारी से आने लगा।


परिणाम

कुछ साल बाद वही लड़का शहर के मंच पर खड़ा था।
लोग उससे सफलता का राज पूछ रहे थे।

उसने मुस्कुराकर कहा:

“मैंने बस अपनी सोच बदली।
दीवारें दरवाज़े बन गईं।”


✨ कहानी का संदेश

Human Mindset कोई जादू नहीं।
यह रोज़ लिया गया निर्णय है।

डर को बहाना बनाना
या

डर के बावजूद कदम बढ़ाना


आपकी परिस्थिति आपकी पहचान नहीं।
आपकी सोच आपकी दिशा है।

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HUMAN MINSET ( मानव मन की शक्ति )📘 Human Mindset (मानव मन की शक्ति)

मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत उसकी शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि उसका माइंडसेट है।
इतिहास गवाह है जिन लोगों ने दुनिया बदली, उन्होंने पहले अपनी सोच बदली।

यह पुस्तक मानव मन की संरचना, उसकी सीमाएँ, उसकी संभावनाएँ और उसके परिवर्तन की प्रक्रिया को समझाने का प्रयास है।

अध्याय 1: Human Mindset क्या है?

Human Mindset यानी वह मानसिक ढाँचा (mental framework) जिसके आधार पर व्यक्ति:

निर्णय लेता है

चुनौतियों का सामना करता है

असफलता को देखता है

सफलता को परिभाषित करता है


माइंडसेट दो प्रकार का होता है:

1️⃣ Fixed Mindset

“मैं ऐसा ही हूँ”

“मुझसे नहीं होगा”

असफलता से डर


2️⃣ Growth Mindset

“मैं सीख सकता हूँ”

“गलती सीखने का हिस्सा है”

प्रयास पर विश्वास


अध्याय 2: दिमाग कैसे काम करता है?

मानव मस्तिष्क तीन स्तरों पर काम करता है:

1. Conscious Mind (चेतन मन) तर्क और निर्णय


2. Subconscious Mind (अवचेतन मन) आदतें और भावनाएँ


3. Emotional Brain प्रतिक्रिया और डर



जब हम बार-बार कोई विचार सोचते हैं, वह अवचेतन में प्रोग्राम बन जाता है।


अध्याय 3: सोच और वास्तविकता

आप जैसा सोचते हैं, वैसा बनते हैं।

नकारात्मक सोच = डर + संदेह + सीमाएँ

सकारात्मक सोच = संभावना + आत्मविश्वास + कार्रवाई


उदाहरण:
गरीबी पहले जेब में नहीं, दिमाग में जन्म लेती है।
समृद्धि भी पहले विचार में जन्म लेती है।


अध्याय 4: Fear vs Faith

हर इंसान के अंदर दो आवाजें होती हैं:

डर की आवाज

विश्वास की आवाज


सफल लोग डर को खत्म नहीं करते वे डर के बावजूद कदम बढ़ाते हैं।


अध्याय 5: Human Mindset और सफलता

सफलता एक घटना नहीं, मानसिक प्रक्रिया है।

सफल लोग:

लक्ष्य स्पष्ट रखते हैं

असफलता को फीडबैक मानते हैं

अनुशासन को प्राथमिकता देते हैं

निरंतर सीखते रहते हैं


अध्याय 6: आदतों की शक्ति

माइंडसेट विचारों से बनता है,
लेकिन जीवन आदतों से बनता है।

छोटी आदतें → बड़ी दिशा बदलती हैं।

उदाहरण:

रोज 30 मिनट पढ़ना

रोज आत्ममंथन करना

रोज लक्ष्य लिखना


अध्याय 7: Emotional Intelligence

IQ आपको नौकरी दिला सकता है,
लेकिन EQ आपको नेतृत्व दिलाता है।

भावनात्मक समझ के 4 स्तंभ:

1. आत्म-जागरूकता


2. आत्म-नियंत्रण


3. सहानुभूति


4. सामाजिक कौशल


अध्याय 8: Self-Identity का विज्ञान

आप अपने बारे में जो मानते हैं, वही बनते हैं।

अगर आप खुद को “संघर्षरत” मानते हैं आप संघर्ष ढूँढेंगे।
अगर आप खुद को “निर्माता” मानते हैं आप समाधान ढूँढेंगे।


अध्याय 9: माइंडसेट बदलने की 5-स्टेप प्रक्रिया

1️⃣ Awareness – अपनी सोच पहचानें
2️⃣ Audit – नकारात्मक पैटर्न पकड़ें
3️⃣ Replace – नए विचार स्थापित करें
4️⃣ Action – नए व्यवहार अपनाएँ
5️⃣ Reinforcement – निरंतर दोहराएँ


अध्याय 10: Human Mindset का अंतिम सत्य

मनुष्य की सीमा उसकी परिस्थिति नहीं, उसकी धारणा है।

जिस दिन इंसान समझ लेता है कि
“मैं परिस्थितियों का परिणाम नहीं, निर्णयों का परिणाम हूँ”
उस दिन उसकी दुनिया बदल जाती है।

समापन

Human Mindset कोई मोटिवेशनल नारा नहीं,
यह जीवन की आधारभूत संरचना है।

आपका दिमाग आपका सबसे बड़ा संसाधन है।
इसे प्रशिक्षित कीजिए
यह आपको वहाँ ले जाएगा जहाँ आप कभी सोच भी नहीं पाए थे।

📖 Human Mindset एक प्रेरणादायक कहानी

शीर्षक: “दीवार नहीं, दरवाज़ा”

नेपाल के एक छोटे से गाँव में आरव नाम का लड़का रहता था।
उसका घर साधारण था, साधन सीमित थे, लेकिन उसके सपने असाधारण थे।

लोग अक्सर कहते
“हमारे जैसे लोग बड़े नहीं बनते।”
“यह सब अमीरों के लिए होता है।”

धीरे धीरे ये शब्द आरव के दिमाग में जगह बनाने लगे।
उसने खुद को समझा लिया
“शायद सच में मुझसे नहीं होगा।”


पहला मोड़

एक दिन स्कूल में उसके शिक्षक ने बोर्ड पर लिखा:

“मनुष्य परिस्थिति का शिकार नहीं, अपनी सोच का परिणाम है।”



आरव ने पहली बार सोचा
क्या सच में मेरी असफलता का कारण मेरी सोच है?

उस रात उसने अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई शुरू की
दुनिया से नहीं, अपने ही दिमाग से।


संघर्ष

जब भी वह कुछ नया शुरू करता, अंदर से आवाज आती

“अगर असफल हो गया तो?”

लेकिन इस बार उसने जवाब दिया
“अगर सफल हो गया तो?”

यह छोटा सा बदलाव था,
पर यही Human Mindset का पहला परिवर्तन था।


असफलता

आरव ने एक प्रतियोगिता में भाग लिया।
वह हार गया।

गाँव में लोग हँसे।
दोस्तों ने मज़ाक उड़ाया।

पुराना आरव शायद टूट जाता।
लेकिन इस बार उसने खुद से कहा:

“असफलता मेरा परिचय नहीं, मेरा शिक्षक है।”



उसने अपनी गलतियाँ लिखीं।
सुधार किया।
फिर प्रयास किया।


परिवर्तन

धीरे-धीरे उसकी आदतें बदलीं:

वह रोज़ 30 मिनट पढ़ने लगा

हर दिन अपने लक्ष्य लिखता

नकारात्मक लोगों से दूरी बनाने लगा


उसका आत्मविश्वास परिस्थिति से नहीं, तैयारी से आने लगा।


परिणाम

कुछ साल बाद वही लड़का शहर के मंच पर खड़ा था।
लोग उससे सफलता का राज पूछ रहे थे।

उसने मुस्कुराकर कहा:

“मैंने बस अपनी सोच बदली।
दीवारें दरवाज़े बन गईं।”


✨ कहानी का संदेश

Human Mindset कोई जादू नहीं।
यह रोज़ लिया गया निर्णय है।

डर को बहाना बनाना
या

डर के बावजूद कदम बढ़ाना


आपकी परिस्थिति आपकी पहचान नहीं।
आपकी सोच आपकी दिशा है।

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