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Shree...Ripal Vyas

Shree...Ripal Vyas Matrubharti Verified

@ripalvyas73gmail.com172629
(111)

पहाड़ों के दामन में भी
सुंदरता का खजाना है
ये उभर आया अपनी मर्जी से
कही पर...प्रकृति की गोद में बैठा चंचल बालक सा
तो कही पर...हरी चुनरिया लहराते हुए
इंतजार करता युवक सा
कही पर...चट्टानों से खड़ा जैसे योगी की मुद्रा
तो कही पर...पहेना है आभूषण नदिया
की धारा का
हरियाली चद्दर लपेटकर
कहता है अपना दामन फैलाए...
धूप आए चाहे बारिश घुलमिल जाओ उसी के
आवरण में....
देता है संदेश... चाहे कैसी भी उलझने आये रहना है अडिग

-Shree...Ripal Vyas

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पनघट पे
लज्जित पनिहारी
देख कनैया

-Shree...Ripal Vyas

हैकू
राह किनारे
आए लहरे पास
मन संतुष्ट

* श्वेत किटक
लिपटा हरियाली
लो, लगा दाग

* गहरी बात
पांच सात पांच में
सलाम उसे

-Shree...Ripal Vyas

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हाइकु
* माँ को नमन
वात्सल्य सरिता
भीगे तू हम

* ठाठ हिन्द का
बनाया चंद्रयान
बढ़ाई शान

* धरा चाहती
चाँद की नजदीकी
स्नेह सभर

-Shree...Ripal Vyas

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हाइकु
* आई बरखा
संतुष्ट है प्रकृति
खिली वसुधा

* गुरु चरण
मिले ज्ञान सरिता
पावन मन

* मित्रता रूपी
मिला है अवसर
स्नेह सभर
-Shree...Ripal Vyas

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ग्रीष्म
गरमी की छुट्टी आई कूलर पंखा साथ लाई
बच्चे कहे कहा खेले हम जब खेल के मैदान में निकले दम
पीले फूलों से सजा गरमाला ग्रीष्म के गले में आई वरमाला
जन जन को है छाया से निस्बत छांव की तो खुली किस्मत
रास्ता हुआ सुमसाम जैसे लोग हुए गुमनाम
याद आए बचपन की पल सुनकर जब स्कूल में होगी छुट्टी कल
आज अब आए शहर को हम तब याद सताए गांव का गम
सही में गर्मी की छूटी आई साथ ढेर सारी खट्टी मीठी याद लाई
धन्यवाद

-Shree...Ripal Vyas

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#Time

समय का निरंतर चलना
दिखाता है कमियाबी का रास्ता
बहते रहो कभी न कभी पहुंच जाओगे
दरिया के समीप
मिल जायेगी मंजिल रखो मान
समय का

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ખીલવાની શરૂઆત તો બહુ સમય પહેલા થઈ હતી....પણ....
ત્યારે ભીડ માં ખોવાતી ગઈ...
વ્હેણ નદી નું જ્યાં જાય ત્યાં ફંટાતી ગઈ...
આજે ફંટાઈ હું...દરિયા ને મળી
ઊછળતાં મસ્તી ભર્યા મોજા જોડે હિલોળે ચડી
મારી ખીલવા ની શરૂઆત કરેલી તેને વાટ મળી...
ને આજે પાછી ખુશીની લહેર માં ઉભરતી ગઈ...

-Shree...Ripal Vyas

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बचपन की वो यादे हमेशा मंडराती है मेरे आसपास
जैसे में पहुच जाती हूं बचपन मे
मां की ममता पिता का लाड़ प्यार
भाई की मस्ती बहन की अमिवर्षा में
खो जाती हुं बचपन की गलियों में
दोस्त के साथ पढ़ाई संग धींगामस्ती करना
पूरे दिन हँसते रहना
सहेलियों की खिलखिलाट से चहकता महोल्ला मेरा
त्यौहारो की रौनक से भरा उत्साहित माहौल
जैसे खुशियों की सौगात
परिवार की एक जुटता में बहती है प्यार की नदियाँ
याद आए मनमंदिर में बार बार
न कोई चिंता न कोई अनबन बिना परवाह किये हँसते खेलते
जब याद आये तो खो जाए हम
जैसे लौट आया बचपन हमारा

-Shree...Ripal Vyas

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માયા