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Ritu kumari

Ritu kumari

@ritukumari509471
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यहाँ रुक जाओ, ज़रा ठहरो, और खुद को थाम लो,
बहते हुए आँसुओं से थोड़ा आराम लो।
माना कि राहों का बोझ बहुत भारी है,
पर यह रात तुम्हारी आख़िरी रात नहीं है, अभी तो लड़ाई जारी है।
​ज़िंदगी से उकता जाना, थककर टूट जाना,
कोई गुनाह नहीं है खुद से रूठ जाना।
पर इस अँधेरे को ही आख़िरी सच मत मान लेना,
अभी रोशनी आनी बाकी है, यह खुद से ठान लेना।
​तुमने सहे हैं दर्द जितने, उतनी ही गहरी तुम्हारी पहचान है,
इस बिखरे हुए दिल में अभी भी एक पूरा आसमान है।
जब लगे कि सब कुछ ख़त्म होने को आया है,
याद रखना, नए सवेरे ने हमेशा काली रात को ही हराया है।
​बस आज की रात खुद को बिखरने दो,
रो लो जी भरकर, और दर्द को बहने दो।
कल फिर उठेंगे, एक नए हौसले के साथ,
पर आज के लिए, थामे रखो खुद का हाथ।

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गिरा है सिर्फ़ ख़्वाब तेरा, तू अभी हारी नहीं,
ज़िंदगी का खेल है यह, जंग कोई आख़िरी नहीं।
माना आज रास्ते में दर्द का एक मोड़ है,
पर तू रुकावटों को तोड़ दे, तुझमें वो ज़ोर है।
आँसुओं को पोंछकर तू फिर ज़रा मुस्कुरा,
अपनी छिपी हुई ताक़त से दुनिया को मिला।
जो टूट गया ख़्वाब, उसे वहीं छोड़ दे,
ज़िद से अपनी तू क़िस्मती का रुख़ मोड़ दे।
हर काली रात के बाद एक नया सवेरा आता है,
जो गिरकर संभलता है, वही इतिहास बनाता है।
उठ और बढ़ा क़दम, मंज़िल तेरा इंतज़ार करती है,
यह दुनिया भी उसी के आगे झुकती है, जो हार से नहीं डरती है।

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इल्ज़ाम
कभी ख़ामोशी पर इल्ज़ाम आ गया,
कभी बेबसी पर इल्ज़ाम आ गया।
ना थी ख़ता फिर भी हम मुस्कुरा दिए,
जब-जब महफ़िल में हमारा नाम आ गया।
वो समझते रहे हुनर सादगी को मेरी,
मेरी वफ़ा पे ही हर इल्ज़ाम आ गया।
ज़माने ने पत्थर भी उठाए उस मोड़ पर,
जहाँ दिल को थोड़ा आराम आ गया।
अब शिकवा करें भी तो किससे करें,
जब अपनों का ही दिया पैग़ाम आ गया।

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मेरा वजूद
​मैं किसी की ख़्वाहिशों का मोहताज़ नहीं,
मेरा वजूद ख़ुद मेरी पहचान है।
ज़माने की नज़रों में चाहे जो भी हूँ मैं,
मेरी हिम्मत ही मेरा असली आसमान है।
​नाप नहीं सकती यह दुनिया मेरी उड़ानों को,
मैंने ख़ामोशी से अपने पंखों को तराशा है।
गिरे हैं कई बार, पर हर बार उठे हैं,
ज़िंदगी की हर चुनौती को हँसकर तराशा है।
​न मुझे किसी के सहारे की तलाश है,
न ही किसी की दी हुई पहचान चाहिए।
मैं अपनी राह ख़ुद बनाती चली जाऊंगी
मुझे बस अपने सपनों का वो जहान चाहिए।
​जो आज ढला है, वो कल फिर उगेगा,
मैं उस सूरज की तरह अटूट विश्वास हूँ।
मेरी सादगी ही मेरी सबसे बड़ी ताक़त है,
मैं ख़ास नहीं, पर ख़ुद में बेमिसाल हूँ।

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"इंसानी वजूद"
नाज़ किस बात का करता है ऐ बंदे,
यह जिस्म तो मिट्टी की एक अमानत है।
तेरी असल अहमियत तेरे अलफ़ाज़ों में है,
वरना सांसें तो हर जानदार की आदत है।
किसी के गिरते हुए आंसुओं को पोंछ दे,
तो समझ कि तेरा होना साकार हुआ।
वरना आने-जाने के इस सिलसिले में,
कितने आए और कितनों का वजूद खाक हुआ।
वक्त रहते बांट ले थोड़ी खुशियां और सुकून,
कि इस ज़िंदगी का कोई ठिकाना नहीं।
कर ले कुछ ऐसे नेक काम इस जहान में,
कि जाने के बाद भी तुझे कोई भुला पाए नहीं।

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​"खामोशी का साया"
​कमरे के एक कोने में,
धुंधली सी एक परछाई है।
घड़ी की हर एक टिक-टिक में,
बस गहरी एक तन्हाई है।
​ठंडी होती चाय की प्याली,
खिड़की पर बैठा एक परिंदा।
कुछ खामोश से पन्ने दिल के,
पूछ रहे हैं, "क्या तू है जिंदा?"
​न कोई चीख, न कोई आँसू,
बस एक भारी सा सन्नाटा है।
वक्त की बहती धारा ने भी,
किनारा अपना कहीं बाँटा है।
- Ritu kumari

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