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पेड़ पौधे प्रकृति संत महात्मा योगी से बढ़कर होते हैं ये उनकी तरह प्रवचन नहीं देते अपितु मौन रहकर अपना सर्वस्व जन कल्याण हेतु न्यौछावर कर देते हैं। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
आजकल ना जाने क्यों खुशियां मुझसे चल रही हैं ख़फ़ा काफी दिनों से उन्होंने मेरी ओर रूख ही नहीं किया सिफारिशों का दौर है ऐ जिंदगी! तू ही जाकर मेरी थोड़ी सिफारिश लगा।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
ऐ रिश्तों के आइने, तू जरा इतना बता गर्दिशों की आंधियों में, तू क्यों धुंधला पड़ जाता भला!! सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
अपनी मुट्ठी भर जरूरतों को महंगें शौक में तब्दील किया है जबसे ऐ जिंदगी! ना जाने क्यों मेरी खुशियों ने मुझसे मुंह मोड़ लिया है तबसे।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
उम्मीदों की फेहरिस्त इम्तिहानों के सिलसिले बेनतीजा यूं ही ताउम्र चलते रहे। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
मार कर किसी का हक, खुश रह पाओगे कब तक वक्त की बेआवाज़ लाठी से आखिर कब तक बच पाओगे अपने अच्छे बुरे कर्मों का फल यहीं भोग कर जाओगे।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
नहीं खत्म हुआ अभी मासूमियत का दौर अब भी थामें हुए हैं, लोग इंसानियत की डोर सबने खूब आगे बढ़ मदद का हाथ बढ़ाया हम अजनबियों को तपती धूप में घरों में बैठाया उनका एक गिलास ठंडा पानी था अमृत समान इन कुछ ही दिनों में उनसे जुड़ गए दिल के तार इस जनगणना ने समाज के कई रूप दिखलाए अच्छे इंसान मिले ज्यादा, बुरे कम नजर आए।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
वक्त का कसूर था सारा, ऐ जिंदगी कह दूं मैं कैसे!! कहीं कुछ कमी, मेरे इरादों में भी तो रही होगी।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
बात वो अनकही सी जुबां तलक ना आ सकी बनकर रह गई अफसाना अंजाम अपना पा न सकी। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
ना मैं तुझसे करूं कोई शिकवा ना तू कर कोई शिकायत ऐ जिंदगी बस आखिरी सांस तक बन उम्मीद तू मेरा साथ निभाती चल ऐ जिंदगी।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
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