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सुनो ऐ खुशियों! क्यों घूमती रहती हो तुम बनकर खानाबदोश क्यों नहीं टिककर बैठती तुम किसी एक ठौर। चलो कुछ दिन, नहीं कुछ साल तो तुम मेरे साथ बिताओ हां मानती हूं, मैं एक अच्छी मेहमाननवाज नहीं फिर भी कोशिश रहेगी मेरी पूरी कि रहे ना तुम्हारी सेवा में कोई कोर कसर । खाने पीने और मनोरंजन के साधनों से जब तुम लगोगी उकताने और ढूंढने लगोगी मेरे घर से विदा होने के बहाने,तब मैं तुम्हें अपनी लिखी कविता और कहानियां पढ़ाऊंगी। कितनी शिद्दत से तुझे चाहा,एक एक हर्फ समझाऊंगी । यकीं है मुझको कि पढ़कर अपने बारे में मेरे जज़्बात तुम छोड़ कर मेरा साथ, फिर और कहीं ना जा पाओगी । लेकिन सुनो सखी! मैं इतनी भी खुदगर्ज नहीं जो तुम्हें बांधकर रखूं, हमेशा के लिए अपने साथ। तुझ पर तो है हक सबका, सबकी है तू जागीर भरी रहे तुझसे सबकी झोलियां,वो राजा हो चाहे फकीर। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
समय बदला,बदल रही है सोच पहले निस्वार्थ सेवा करनेवालों का सब दिल खोल करते थे गुणगान आज ऐसे सेवादारों के सिर पर लोग सजाते बेवकूफी का ताज।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
सुबह कुहासा,रात कोहरा तन मन ठिठुरा जाए जाड़े की मुलायम कुनकुनी धूप शरीर गरमा आलस दूर भगाए ।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
कभी बुजुर्गो से सुना था, सच्चे दिल से निभाएं रिश्ते लंबे टिकते हैं उन्हें मालूम ना था, आज ऐसे सच्चे दिलवालों को ही ये रिश्ते ठगते हैं। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
गुमशुदा नोट हो या गुमशुदा खजाना दोनों ही मिलते तब, जब बीत जाता जमाना।। सरोज प्रजापति ✍️ नोट बंदी की मारी और चीजों को ज्यादा ही संभाल कर रखने वाली प्रत्येक महिला का दर्द ।🫣😂 - Saroj Prajapati
जिस तरह विपरीत परिस्थितियों में प्रयास छोड़ना सही नहीं उसी तरह सुख के दिनों में गुमान करना क्योंकि वक्त और हालात कभी एक से नहीं रहते।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
नूतन वर्ष, नूतन हर्ष नूतन उमंग, तरंग व उल्लास। स्नेहाशीष व साथ रहे अपनों का, इतनी कृपा करना हम पर हे कृपा निधान।।🙏 आपको व आपके परिवार को नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं 💐🎉 सरोज प्रजापति ✍️
तूने जो दिया वो मेरी तकदीर तो ना था आगे भी रहे मेरे सिर पर तेरा हाथ सदा बस इतनी कृपा और करना मेरे कृपापनिधान! जिंदगी में आए चाहे कैसा भी दौर बस यूं ही थामे रखना तू मेरे जीवन की डोर।।🙏 सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
बीत गया एक और दिन जिंदगी की जद्दोजहद में खुद से मिलने की फुर्सत आज फिर ना मिल सकी।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
मामूली सी चोट का बना तमाशा लोग पीट देते ढोल और जिन्हें लगी यहां गहरी चोट वो रहते अक्सर मौन।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
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