Quotes by Saroj Prajapati in Bitesapp read free

Saroj Prajapati

Saroj Prajapati Matrubharti Verified

@saroj6130
(912k)

आज फिर चला यादों का काफ़िला
जाने कितनी दूर तलक तक जाएगा
आज फिर सारी रात कटेगी आंखों में
जाने कितना भूला बिसरा फिर याद आएगा।
सरोज प्रजापति ✍️


- Saroj Prajapati

Read More

मन भारी दिल उदास
किससे कहें अब दिल का हाल
उमड़ रहा जज्बातों का सैलाब
वो भी चल रहे शब्दों से नाराज
आईना भी कुछ खफा सा है
अक्स दिखाता कुछ जुदा सा है
आंसुओ ने समझे सब हालात
मनोभावों को मिला नया हमराज़।।
सरोज प्रजापति ✍️



- Saroj Prajapati

Read More

कुछ लोग खास होते हैं, हमेशा दिल के पास होते हैं
दूरियां नहीं रखती मायने, जब जुड़े जज़्बात होते हैं।।
सरोज प्रजापति ✍️


- Saroj Prajapati

Read More

थोड़ी सी खुशियां और अपनों का हो साथ
ऐ जिंदगी! इससे ज्यादा की है किसे दरकार!!
सरोज प्रजापति ✍️


- Saroj Prajapati

दिल पर चोट लगी थी गहरी
राजदार बनाया एक अपने को
सुबह तलक चर्चे आम हो गया
अब दोष बताओं दूं किसको ।।
सरोज प्रजापति ✍️


- Saroj Prajapati

Read More

धूप का वो एक कतरा बैठा कुछ जुदा सा है
मालूम होता है वो जिंदगी से कुछ खफा सा है।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati

पतंग सी है जिंदगी
कटना जिसका तय
क्यों ना फिर कटने से पहले
हसरतों की एक ऊंची उड़ान भर ली जाए ।।
सरोज प्रजापति ✍️


- Saroj Prajapati

Read More

रिश्तों की सदा लहलहाती रहेगी फसल
गर समय-समय पर डालते रहोगे उसमें
प्रेम सम्मान और अपनत्व भरी उर्वरक।।
सरोज प्रजापति ✍️


- Saroj Prajapati

Read More

ससुराल से भरी पूरी बेटियां
मायके केवल स्नेह की भूख मिटाने जाती है
ऐसी बेटियां भी मायके वालों को कुछ घंटे में ही
अखरने लगती है तो सोचो हो अगर कोई
तकदीर की मारी बहन बेटी वो कैसे मायके मे
एक कतरा भी प्रेम स्नेह इज्जत का पाती होगी
उसकी तो एक कौर रोटी भी उन्हें एक मण अनाज सी भारी नजर आती होगी।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati

Read More

सुनो ऐ खुशियों!
क्यों घूमती रहती हो तुम बनकर खानाबदोश
क्यों नहीं टिककर बैठती तुम किसी एक ठौर।
चलो कुछ दिन, नहीं कुछ साल तो तुम मेरे साथ बिताओ
हां मानती हूं, मैं एक अच्छी मेहमाननवाज नहीं
फिर भी कोशिश रहेगी मेरी पूरी
कि रहे ना तुम्हारी सेवा में कोई कोर कसर ।
खाने पीने और मनोरंजन के साधनों से
जब तुम लगोगी उकताने और ढूंढने लगोगी
मेरे घर से विदा होने के बहाने,तब मैं तुम्हें
अपनी लिखी कविता और कहानियां पढ़ाऊंगी।
कितनी शिद्दत से तुझे चाहा,एक एक हर्फ समझाऊंगी ।
यकीं है मुझको कि पढ़कर अपने बारे में मेरे जज़्बात
तुम छोड़ कर मेरा साथ, फिर और कहीं ना जा पाओगी ।
लेकिन सुनो सखी! मैं इतनी भी खुदगर्ज नहीं
जो तुम्हें बांधकर रखूं, हमेशा के लिए अपने साथ।
तुझ पर तो है हक सबका, सबकी है तू जागीर
भरी रहे तुझसे सबकी झोलियां,वो राजा हो चाहे फकीर।
सरोज प्रजापति ✍️

- Saroj Prajapati

Read More