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ख्वाहिशें ही महंगी है ऐ जिंदगी! वरना सुकून तो सस्ता था धूल मिट्टी सना, खुशियों भरा मेरा वो बचपन ही अच्छा था।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
मन पर छाए चिंताओं के स्याह अंधेरे रात के अंधेरों से कहीं ज्यादा गहरे हैं,ऐ जिंदगी।। सरोज प्रजापति ✍🏻। - Saroj Prajapati
हाथों की ये चंद लकीरें मेहनत की चट्टानों पे जब घिसती है तकदीर बुलंद होकर तब ही निखरती है । सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
दबाव में लिए गए कुछ फैसले ताउम्र रहेंगे मन को कचोटते।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
उलझनें सुलझाऊं या अब तुझे सुलझाऊं ऐ जिंदगी ! क्यों हर दफा दोराहे पर लाकर खड़ा कर देती तू मुझे!! सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
पेड़ पौधे प्रकृति संत महात्मा योगी से बढ़कर होते हैं ये उनकी तरह प्रवचन नहीं देते अपितु मौन रहकर अपना सर्वस्व जन कल्याण हेतु न्यौछावर कर देते हैं। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
आजकल ना जाने क्यों खुशियां मुझसे चल रही हैं ख़फ़ा काफी दिनों से उन्होंने मेरी ओर रूख ही नहीं किया सिफारिशों का दौर है ऐ जिंदगी! तू ही जाकर मेरी थोड़ी सिफारिश लगा।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
ऐ रिश्तों के आइने, तू जरा इतना बता गर्दिशों की आंधियों में, तू क्यों धुंधला पड़ जाता भला!! सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
अपनी मुट्ठी भर जरूरतों को महंगें शौक में तब्दील किया है जबसे ऐ जिंदगी! ना जाने क्यों मेरी खुशियों ने मुझसे मुंह मोड़ लिया है तबसे।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
उम्मीदों की फेहरिस्त इम्तिहानों के सिलसिले बेनतीजा यूं ही ताउम्र चलते रहे। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
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