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SARWAT FATMI

SARWAT FATMI Matrubharti Verified

@sarwat
(287k)

कभी बातों-बातों में कोई अपना सा लगने लगता है,
अनजाना होकर भी दिल के करीब रहने लगता है।
पता ही नहीं चलता कब समझने लगे एक-दूजे को,
बस हर बात में एक सुकून सा मिलने लगता है।
शायद रिश्तों की खूबसूरती यही तो होती है—
बिना कहे भी कोई बहुत कुछ समझने लगता है।
- SARWAT FATMI

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एक ही पता, एक मीठा इत्तिफ़ाक़

एक ही पता था, रास्ते भी वही,
एक लड़का था, एक लड़की थी कहीं।
मुलाक़ातें कम थीं, मगर यादें हज़ार,
छोटी-सी वो दुनिया, लगती थी ख़ास।

इत्तिफ़ाक़ था या किस्मत की बात,
एक ही पते ने जोड़ दिए जज़्बात।
वक़्त गुज़र गया, रास्ते बदल गए,
पर वो मीठी यादें आज भी साथ रह गए। ❤️
- SARWAT FATMI

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माँ… चोट तो आज भी वही लगती है

चोट लगी तो सबसे पहले तुम्हारा ही ख़याल आया, माँ।
याद आया, कैसे तुम घबराकर कहती थीं,
“अरे… इतनी ज़ोर से चोट लग गई?”

फिर बिना कुछ कहे
रसोई की ओर भाग जाती थीं।
हल्दी वाला दूध बनाती थीं,
गर्म पानी से सिकाई करती थीं,
और अपने प्यार भरे हाथों से
हर दर्द को धीरे-धीरे चुरा लेती थीं।

आज भी चोट लगी है, माँ…
फ़र्क बस इतना है कि
हल्दी वाला दूध मैं ख़ुद बना रही हूँ,
गर्म पानी की सिकाई भी ख़ुद ही कर रही हूँ।

लेकिन तुम्हारे हाथों का वो स्पर्श,
तुम्हारी दुआओँ की गर्माहट,
तुम्हारी घबराहट में छिपा प्यार—
वो कहीं नहीं मिलता।

दर्द तो शायद वक़्त के साथ कम हो जाए,
मगर तुम्हारी कमी…
हर चोट के साथ और गहरी हो जाती है।

काश, आज तुम मेरे पास होतीं, माँ।
तो शायद ये चोट इतनी नहीं चुभती।

अब हर ज़ख्म बस यही कहता है—
दवा तो मिल जाती है,
पर माँ का स्पर्श कभी नहीं मिलता।

तुम्हारी याद ही अब मेरी मरहम है, माँ…
और तुम्हारा एहसास ही
हर दर्द में मुझे संभाल लेता है।
🥹Miss u Ammi🥹💕love u alot💕
❤️sarwat Fatmi❤️

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माँ ❤️

आज एक बात समझ आई…
माँ एक शब्द नहीं, सिर्फ एक रिश्ता नहीं,
वह हमारे लिए पूरी दुनिया है… बल्कि यूँ कहें, हमारी दूसरी दुनिया है।

वह हमें सिर्फ जन्म नहीं देती,
हर रोज खुद को मिटाकर हमें बनाती है।
उसकी नींद अधूरी रहती है,
पर उसकी दुआएँ कभी अधूरी नहीं होतीं।

माँ हमारी पहली आवाज, पहला सहारा
और आख़िरी उम्मीद होती है।
जब दुनिया हम पर उंगलियाँ उठाती है,
तो माँ ढाल बनकर खड़ी हो जाती है।

जब हर रिश्ता साथ छोड़ देता है,
तो माँ खामोशी से हमारा हाथ थाम लेती है।
वह टूटती तो है, पर बिखरती नहीं,
रोती भी है, पर अपने आँसू छुपा लेती है।

माँ कोई शब्द नहीं…
वह हमारी पूरी कायनात है।
खुद अधूरी रहकर भी हमें पूरा कर देती है।

❤️ Love you Maa ❤️
🥰 Sarwat Fatmi 🥰

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रिश्ते

रिस्तो में एक दूसरे की समझदारी ज्यादा जरूरी होती है
किसी भी रिश्ते में ये सवाल अकसर पूछ लेना चाहिए
"क्या हुआ,सब ठीक है ना, कोई परेशानी तो नहीं "
ताकि कभी खुद में भी सवाल ना खड़ा हो
के काश.... पूछ लेते" क्या हुआ था "???
क्यों की खामोशी अचानक नहीं आती
धीरे धीरे आपके रिश्ते में पन्मति है
इसलिए जो बातें हो वह पूछ लो
कल का क्या है???...
अक्सर कोई आपका है और वह पूछ रहा है
"क्या हुआ सब ठीक है कोई दिक्कत तो नहीं "
तो आप बहुत किस्मत वाले हो
वरना कुछ रिश्ते में ऐसा होता नहीं
और अफसोस ही रह जाता है
की क्या हुआ था हमें पता ही नहीं चला
🥰Sarwat Fatmi🥰

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PTM

जब हम सब मायें स्कूल जाते हैं रिपोर्ट कार्ड लेने
तो सिर्फ हम रिपोर्ट कार्ड नहीं लेते
हम टीचर से सिर्फ पढ़ाई की बातें नहीं सुनते
हम तो अपनी उम्मीदों का हाल सुनने जाते हैं
कभी-कभी अपने बच्चों की तारीफ सुनकर आंखें नम हो जाती हैं
तो कभी चुपचाप कुछ सोचते हुए स्कूल से लौटते है
और दिल ही दिल में कहते है
कोई नहीं, फिर से मैं कोशिश करूंगी
इस बार हार गई
अब नहीं हारूंगी
फिर हम अपने बच्चों का हाथ कसकर थाम लेते हैं
उसे वापस से तैयार करने के लिए और अपनी उम्मीदों का हाल सुनने के लिए
हम मायें है हारना कहां सीखा है
खुद को हिम्मत देकर,चेहरे पर मुस्कान रख,फिर सुबह हिम्मत के साथ खड़े हो जाते है
🥰sarwat Fatmi🥰

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कुछ अनसुलझी पहेलियाँ

उन्होंने कभी नहीं रोका
न टोका किसी राह पर
पर क्यों?
एक अदृश्य डोर खिंची रही
मैं खुल कर कभी चल न पाई

एक चिरस्थायी भय
मन के किसी कोने में दुबका रहा
चीजें खरीदने की छूट थी
पसंद चुनने की आज़ादी भी थी
पर बाज़ार की भीड़ में
मेरी उँगलियाँ जम सी जाती थीं
पसंद मेरी ठहर जाती थी

हर जगह मुझे आगे किया गया
मेरी छोटी से छोटी बात पर
पलकों का बिछौना बिछाया गया
बच्चों जैसी हर ज़िद पूरी हुई
फिर भी क्यों?
खुशी का वह रंग
दिल तक पहुँच ही नहीं पाया

वे कहते थे अक्सर
तुम्हारा मन जो चाहे करो
तुम बढ़ो आगे
मैं तुम्हारी परछाई बनकर साथ हूँ
तुम्हें कभी गिरने न दूँगा
बस जी लो अपनी ज़िंदगी खुलकर

वे कहते रहे
शब्दों के झरने बहाते रहे
पर मेरी उड़ान धीमी ही रही
उफ्फ ये कैसी उलझन है
कितना सोचा मैंने खुद के बारे में
कितनी रातें जाग कर बिताईं

फिर एक धीमी सी आवाज़ आई
रोकने वाला कोई नहीं था
बाहर से तो कोई बंधन न था
शायद इजाज़त
मैंने खुद को ही कभी दी नहीं

यह कैद बाहर की नहीं थी
यह दीवारें मेरे भीतर थीं
जहाँ मेरी मर्ज़ी
मेरी ही आवाज़ से दब गई
अनकही अनसुनी सी
बस एक सवाल बनकर रह गई
यह मौन स्वीकृति
किस डर की देन थी
मैं आज तक समझ न पाई।
🥰sarwat fatmi 🥰

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कुछ ऐसी बातें,जो मैंने कभी समझ नह पाई

उन्होंने मुझे कभी किसी चीज के लिए रोका नहीं,टोका नहीं पर न जाने क्यों?
खुल कर कभी चल नहीं पाई
एक डर सा बना ही रह गया
मुझे किसी भी चीज को खरीदने या अपनी पसंद के लिए मनाही नहीं
पर पता नहीं क्यों??
बाजार में कुछ खरीद नहीं पाई
पसंद नहीं कर पाई
हर जगह उन्होंने मुझे ही आगे रखा
मेरी हर बातो को पलकों पर रखा गया
मेरी हर ज़िद को, बच्चों की तरह पूरी की गई
पर पता नहीं क्यों??
खुशी महसूस ही नहीं हुई
वो अकसर कहते हैं
तेरा जो मन करें वो किया करो
तुम आगे बढ़ो
मैं तेरे पीछे ही हूं
तुम्हें कभी गिरने नहीं दूंगा
बस तू खुल कर अपनी जिंदगी जिया करो
वो कहते रहे मुझसे, पर मैंने किया नहीं
उफ्फ्फ.... ये उलझने
बहुत सोचा मैंने अपने बारे में
फिर एक आवाज आई
रोक तो किसी चीज की नहीं
पर शायद इजाजत मैं खुद को कभी दी नहीं
🥰sarwat Fatmi🥰

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मैं..... मैं, और सिर्फ मैं 🥰


मैं एक बीवी हूं
मैं एक बहू हूं
मैं मां हूं
मैं बेटी हूं
और साथ ही साथ एक working woman हूँ
पर इन सबसे ऊपर
मैं,और सिर्फ मैं हूं
कमियां मुझ में भी है
मैं थोड़ी ना परफेक्ट हूं
गलतियां तो मुझसे कहीं बार हो जाती है
दिन भर की थकान से कभी तो टूट जाती हूँ
गुस्सा आना तो लाज़मी है
पूरे शिद्दत से खुद को संभाल कर, सुबह उठ, बच्चों और husband के मनपसंद चीज बनाने में लग जाती हूं उनके साथ घंटो बात करके,
तो कभी बच्चों के साथ खेल-खेल के
वक़्त गुज़रता है
फिर शाम खुद को,खुद से मिलाती हूं
जब ट्यूशन में बच्चों का welcome होता है
कई घंटे के बाद लगता है
मैं, मैं हूं
कभी-कभी यूं ही बैठकर सोचती हूं
शादी से पहले जो मुझे पसंद नहीं होता
मम्मी मेरे लिए कुछ और बना देती
पर आज वही ना पसंद को मुस्कुराहट के साथ बनाती भी हूं और खा भी लेती हूं
क्योंकि अब मैं बेटी नहीं
एक मां हूं बीवी हूं और बहू भी हूँ
पहले जिद करके अपनी बातें मनवा लेती थी
पर अब तो जिम्मेदारियां काफ़ी हैं
लोग कहते हैं तुम बदल गई हो
मैं बदली नहीं हूं बस....
अपने परिवार के पसंद को ही अपना पसंद बना लिया है
sarwat fatmi🥰

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कुछ दिनों से दिल उदास सा है बहुत सोचा आखिर माज़रा क्या है??
जवाब कुछ ना मिला
तन्हा बैठकर पूरे दिन गुज़र जाती है
बात करना तो है पर अब ऐसा नंबर ही नहीं contact list में
अकेले में रहना अब...
डर सा लगता है
बस कानों में आवाज आती रहे किसी की
यह सोचकर पूरे दिन गाने सुनकर निकल जाती हैं
- SARWAT FATMI

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