I am reading and writing on MB besides for Delhi Press English and Hindi magazines.

A friend has just sent ..

*फिजां में घुल रही है महक अदरक की !*
*आज सर्दी भी चाय की तलबगार हो गई !!*

*अदाएं तो देखिए गुनहगार चायपत्ती की !*
*जरा दूध से क्या मिली,शर्म से लाल हो गई !!*

*थोड़ा पानी गम का उबालिये,*
*खूब सारा दूध ख़ुशियों का,*
*थोड़ी पत्तियां ख़यालों की ..*
*थोड़े गम को कूटकर बारीक,*
*हँसी की चीनी मिला दीजिये,*
*उबलने दीजिये ख़्वाबों को ;*
*कुछ देर तक ..*

*यह ज़िंदगी की चाय है, जनाब ;*
*इसे तसल्ली के कप में छानकर,*
*घूंट-घूँट कर मज़ा लीजिये...!!!*

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You don't need to win every argument or in every situation but you need to be true to yourself.

Somebody correctly said -

Make peace with your past , so it won't mess up with your present.

छोटी सी बात पे तुम रूठे
हम भी रूठ बैठे
न तुम हमें मनाने आये
न हम तुम्हें मनाने आये
फिर कौन किसे मनाये
तुम भी खामोश रहे
हम भी खामोश रहे
फिर खमोशी टूटे कैसे
गलती कुछ तुम्हारी थी
कुछ हमारी भी थी
फिर क्यों न दोनों बैठें
और शायद बातों बातों में
फिर से बात बन जाए

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जिसने न किया किसी से प्रीत
वो क्या जाने दर्द ए दिल की टीस

जिसके लिए मेरा रिश्ता अहम नहीं
उसके जाने का हमें भी गम नहीं

जैसे तैसे बीत रही है जिंदगी
ये जीना क्या जीना
पता नहीं
बचपन में माँ बाप की चली
स्कूल में मास्टर की चली
जवानी में बीबी की चली
और बुढ़ापे में बच्चों की
अपनी कभी चली कि नहीं
और कभी चलेगी या नहीं
पता नहीं
हमें कभी आज़ादी मिली ही नहीं
और आगे मिलेगी या नहीं
पता नहीं ,शायद कभी नहीं
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बातों का तीर जो दिल में चुभा
घाव कर गया बहुत गहरा
लाख कोशिश की भुलाने की
मुमकिन न हुआ भूल पाना
जाओ तुम्हे माफ़ किया
फिर ऐसी बातें मत दुहराना

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अगर हम से मोहब्बत नहीं कर सकते
जी भर के हमसे नफरत ही कर लेते
और मेरे खिलाफत में
एक मुकदमा ही दायर कर देते
कचहरी में तारीख पे तारीख मिलेगी
इसी बहाने तुमसे मुलाकात होती रहेगी

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सितम चाहे जितना करना चाहो कर के देख लो
ज़ख्म चाहे जितना भी गहरा चाहो दे कर देख लो
दर्द चाहे कितना भी क्यों न हो हम बयां करते नहीं
अपनी आँखों के आँसू अब हम यूँ ही जाया करते नहीं

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